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UP News: वाहनों का वीआईपी नंबर तो मिला नहीं... पैसा भी फंस गया, 3200 वाहन मालिकों के नौ करोड़ अटके

Thu, 11 Sep 2025 04:01 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 11 Sep 2025 04:01 PM IST
सार

वाहन मालिकों को वीआईपी नंबर तो मिला नहीं उल्टे 3200 वाहन मालिकों के नौ करोड़ रुपये फंस गए। इनमें लखनऊ के 400 आवेदक हैं। बिचौलियों के खातों से भुगतान से रिफंड में तकनीकी पेच फंसा है।  

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VIP numbers of vehicles were not received and nine crore rupees of 3200 vehicle owners are stuck In Lucknow
गाड़ियों के नंबर प्लेट - फोटो : Grok Ai

विस्तार

उत्तर प्रदेश में वाहनों के लिए वीआईपी नंबर की चाह रखने वाले मायूस हैं। उन्हें वीआईपी नंबर तो मिला नहीं, लेकिन इसके एवज में अदा की गई मोटी रकम जरूर फंस गई। अब वे रिफंड के लिए परेशान हैं। लखनऊ सहित पूरे प्रदेश के 3200 से अधिक आवेदकों के 9 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इनमें ज्यादातर आवेदक ऐसे हैं जिन्होंने दलालों के खातों से फीस का भुगतान करवाया था। इनमें लखनऊ के 400 से अधिक आवेदक हैं।

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दरअसल, 450 से अधिक ऐसे वीआईपी नंबर हैं जिनके लिए आवेदन के लिए वाहन स्वामियों को बोली लगानी पड़ती है। इसमें 0001, 0007, 0786 जैसे नंबर मुख्य हैं। इन वीआईपी नंबरों के लिए वाहन स्वामियों को नीलामी में हिस्सा लेना पड़ता है। सर्वाधिक बोली लगाने वाले को नंबर आवंटित कर दिया जाता है। 
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यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। जिन्हें नंबर आवंटित नहीं होते उनका रिफंड खातों में वापस आ जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार 15 से 20 दिन लग जाते हैं। लेकिन वर्तमान में परिवहन विभाग में 3200 से अधिक ऐसे आवेदक हैं जिन्हें रिफंड नहीं मिला है। दूसरों के खाते से भुगतान किए जाने से उनके रिफंड में तकनीकी पेच फंस गया है।

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...इसलिए हुई दिक्कतें

वीआईपी नंबरों की नीलामी की व्यवस्था ऑनलाइन है। आवेदक साइबर कैफे से आवेदन करते हैं। उन्हें कैश भुगतान कर उनके खातों से फीस जमा करवाते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब नंबर आवंटित नहीं होता तो पैसा साइबर कैफे वाले के खाते में नियमतः जाएगा। ऐसे में वाहन मालिक चाहते हैं कि रिफंड उनके खातों में हो जो संभव नहीं इसलिए रिफंड फंस रहा है।

रिफंड की स्थिति जांचनी भी मुश्किल

वाहन मालिक यह तक नहीं पता लगा पा रहे हैं कि उनका पैसा रिफंड हुआ है या नहीं। ऐसी शिकायतें लेकर आवेदक ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ पहुंच रहे हैं। साइबर कैफे संचालक रिफंड आने से इन्कार कर रहे हैं। इससे आवेदकों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं। सरोजनी नगर के मो. आमिर भी ऐसी ही शिकायत लेकर पहुंचे थे। उनके पास पेमेंट का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। उन्हें साइबर कैफे वाले को कैश में पैसा दिया था।

इतनी देनी होती है फीस

अधिकारियों के मुताबिक आवेदकों को दो पहिया वाहनों के वीआईपी नंबरों के लिए 8000 रुपये, चार पहिया वाहनों के लिए 33 हजार रुपये फीस देनी होती है। नीलामी में नंबर मिलने पर बोली का अमाउंट अलग से देना होता है। नंबर आवंटित नहीं होने पर यह फीस वापस कर दी जाती है। अधिकारी बताते हैं कि बोली के बाद नंबर आवंटित होने के एक महीने में वाहन लेना अनिवार्य होता है। अन्यथा नंबर निरस्त कर दिया जाता है।

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