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UP News: वीआईपी नंबर मिला नहीं अब रिफंड भी फंस गया, आवेदकों के नौ करोड़ रुपये फंसे

Thu, 11 Sep 2025 10:46 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 11 Sep 2025 10:46 AM IST
सार

वीआईपी नंबरों के लिए रकम देने वाले अब मायूस हैं। उन्हें नंबर तो मिला नहीं साथ ही उनके पैसे भी फंस गए हैं। वीआईपी नंबर लेने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और सर्वाधिक बोली लगाने वालों को नंबर दिया जाता है।

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VIP number not received and now refund is also stuck.
वीआईपी नंबर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

वाहनों के लिए वीआईपी नंबर की चाह रखने वाले मायूस हैं। उन्हें वीआईपी नंबर तो मिला नहीं लेकिन इसके एवज में अदा की गई मोटी रकम जरूर फंस गई। अब वे रिफंड के लिए परेशान हैं। लखनऊ सहित पूरे प्रदेश के 3200 से अधिक आवेदकों के 9 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इनमें ज्यादातर आवेदक ऐसे हैं जिन्होंने दलालों के खातों से फीस का भुगतान करवाया था। इनमें लखनऊ के 400 से अधिक आवेदक हैं।

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दरअसल, 450 से अधिक ऐसे वीआईपी नंबर हैं जिनके लिए आवेदन के लिए वाहन स्वामियों को बोली लगानी पड़ती है। इसमें 0001, 0007, 0786 जैसे नंबर मुख्य हैं। इन वीआईपी नंबरों के लिए वाहन स्वामियों को नीलामी में हिस्सा लेना पड़ता है।
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सर्वाधिक बोली लगाने वाले को नंबर आवंटित कर दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। जिन्हें नंबर आवंटित नहीं होते उनका रिफंड उनके खातों में वापस आ जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार 15 से 20 दिन लग जाते हैं। लेकिन वर्तमान में परिवहन विभाग में 3200 से अधिक ऐसे आवेदक हैं जिन्हें रिफंड नहीं मिला है। दूसरों के खाते से भुगतान किए जाने से उनके रिफंड में तकनीकी पेच फंस गया है।

इसलिए हुईं दिक्कतें: वीआईपी नंबरों की नीलामी की व्यवस्था ऑनलाइन है। आवेदक साइबर कैफे से आवेदन करते हैं। उन्हें कैश भुगतान कर उनके खातों से फीस जमा करवाते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब नंबर आवंटित नहीं होता तो पैसा साइबर कैफे वाले के खाते में नियमतः जाएगा। ऐसे में वाहन मालिक चाहते हैं कि रिफंड उनके खातों में हो जो संभव नहीं इसलिए रिफंड फंस रहा है। वाहन मालिक यह नहीं पता लगा पा रहे हैं कि उनका पैसा रिफंड हुआ है या नहीं। ऐसी शिकायतें लेकर लोग आरटीओ दफ्तर पहुंच रहे हैं। साइबर कैफे संचालक रिफंड से इन्कार कर रहे हैं। सरोजनीनगर के मो. आमिर ने बताया उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने साइबर कैफे वाले को कैश दिया था।

ऐसे होती है फीस: अधिकारियों के मुताबिक आवेदकों को दो पहिया वाहनों के वीआईपी नंबरों के लिए 8000 रुपये, चार पहिया वाहनों के लिए 33000 रुपये फीस देनी होती है। नीलामी में नंबर मिलने पर बोली का अमाउंट अलग से देना होता है। नंबर आवंटित न होने पर फीस वापस कर दी जाती है। बोली के बाद नंबर आवंटित होने के एक महीने में वाहन लेना अनिवार्य होता है। अन्यथा नंबर निरस्त कर दिया जाता है।

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