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जब विनोद खन्ना ने लखनऊ में दौड़ाई कार, साथ वालों को पढ़ना पड़ा था हनुमान चालीसा
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Fri, 28 Apr 2017 04:34 PM IST
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विनोद खन्ना
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फिल्म ‘सरकारी मेहमान’ में अभिनेता विनोद खन्ना पर फिल्माया गया एक गीत है-‘लखनऊ छूटा तो दिल्ली ने लूटा..’। लेकिन उनसे मिलने वाले लखनऊ के लोग मानते हैं कि लखनऊ उनसे कभी छूटा नहीं, वह हमेशा उनके साथ रहा।
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प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और भाजपा के सांसद रहे विनोद खन्ना का लखनऊ से कोई गहरा रिश्ता नहीं रहा लेकिन इस नगर और यहां की संस्कृति को लेकर उनके मन में श्रद्धा थी जिसको वह मिलने आने वाले यहां के लोगों से अक्सर व्यक्त करते थे।
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माना ये भी जाता है कि ‘सरकारी मेहमान’ फिल्म में ‘लखनऊ छूटा तो दिल्ली ने लूटा..’ में लखनऊ को जोड़ने की पहल के पीछे भी वे ही थे। यह गाना कोठे पर फिल्माया गया है जिसमें विनोद खन्ना भी शरीक हैं।
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1978 में आई इस फिल्म में विनोद खन्ना के अतिरिक्त जस्मीन, अमजद खान, रंजीत, ओम शिवपुरी सहित कई कलाकार थे। इस गीत को हसरत जयपुरी ने लिखा था, संगीतबद्ध रवीन्द्र जैन ने किया था जबकि गाया आशा भोसले ने था।
वेबसाइट लॉन्च करते विनोद खन्ना
दिल्ली में जनवरी 2015 में उनसे हुई मुलाकात हुई। उन्होंने लखनऊ के बारे में खूब बातें कीं। वह अटल बिहारी वाजपेयी जी के समय लखनऊ आए थे।
लखनऊ के राजनीतिक परिदृश्य पर भी बातचीत की थी। जब उनसे लखनऊ आने के बारे में पूछा तो कहा कि जब भी बुलाएंगे, चला आऊंगा। लखनऊ आना अच्छा लगता है। अपने प्रकाशन से 12 खंडों में प्रकाशित ओशो के प्रवचनों का संकलन भी उन्हें भेंट किया था। -नीरज अरोड़ा, प्रकाशक
विनोद खन्ना के लखनऊ आगमन की यादें कई लोगों को हैं। ये 1998 का दौर था जब वे राजनीतिक प्रचार के लिए लखनऊ आए थे। गोमतीनगर स्थित एक पांच सितारा होटल के मुख्य प्रवक्ता शबाहत हुसैन कहते हैं कि वे चार-पांच दिनों तक लखनऊ में थे। उनसे कई बार बातें हुईं। वे बहुत ही हंसमुख इंसान थे। आम आदमी के जीवन से जुड़ी हुई बातें करते थे। उनकी बातें दिल को छू जाती थीं। हुसैन कहते हैं कि वे खाना बहुत कम खाते थे। नाश्ते में फल लेकर निकल जाते थे।
मेरा उनसे कोई परिचय नहीं था लेकिन अटल जी के चुनाव के समय 1999 लखनऊ आए थे और मैंने उनसे वोट फार अटल वेबसाइट के लोकार्पण का अनुरोध किया तो वे तुरंत तैयार हो गए।
27 जुलाई 1999 को इसका लोकार्पण कर हम युवाओं का खूब उत्साहवर्धन किया। उस समय ऐसी वेबसाइटेें बहुत कम बनती थीं और उन्होंने इस बात के लिए हमारी प्रशंसा भी की थी। -मनीष खेमका, अध्यक्ष ग्लोबल टैक्सपेयर्स ट्रस्ट
लखनऊ के राजनीतिक परिदृश्य पर भी बातचीत की थी। जब उनसे लखनऊ आने के बारे में पूछा तो कहा कि जब भी बुलाएंगे, चला आऊंगा। लखनऊ आना अच्छा लगता है। अपने प्रकाशन से 12 खंडों में प्रकाशित ओशो के प्रवचनों का संकलन भी उन्हें भेंट किया था। -नीरज अरोड़ा, प्रकाशक
विनोद खन्ना के लखनऊ आगमन की यादें कई लोगों को हैं। ये 1998 का दौर था जब वे राजनीतिक प्रचार के लिए लखनऊ आए थे। गोमतीनगर स्थित एक पांच सितारा होटल के मुख्य प्रवक्ता शबाहत हुसैन कहते हैं कि वे चार-पांच दिनों तक लखनऊ में थे। उनसे कई बार बातें हुईं। वे बहुत ही हंसमुख इंसान थे। आम आदमी के जीवन से जुड़ी हुई बातें करते थे। उनकी बातें दिल को छू जाती थीं। हुसैन कहते हैं कि वे खाना बहुत कम खाते थे। नाश्ते में फल लेकर निकल जाते थे।
मेरा उनसे कोई परिचय नहीं था लेकिन अटल जी के चुनाव के समय 1999 लखनऊ आए थे और मैंने उनसे वोट फार अटल वेबसाइट के लोकार्पण का अनुरोध किया तो वे तुरंत तैयार हो गए।
27 जुलाई 1999 को इसका लोकार्पण कर हम युवाओं का खूब उत्साहवर्धन किया। उस समय ऐसी वेबसाइटेें बहुत कम बनती थीं और उन्होंने इस बात के लिए हमारी प्रशंसा भी की थी। -मनीष खेमका, अध्यक्ष ग्लोबल टैक्सपेयर्स ट्रस्ट
योगी के लिए की थीं रैलियां
रैली के दौरान विनोद और सीएम योगी
विनोद खन्ना ने प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए 1998 में कई चुनावी रैलियां की थीं। योगी को सांसद बनवाने के लिए उन्होंने कई जगह सभाएं कीं। पिछले दिनों जब विनोद खन्ना की बीमारी की खबरें आईं तो योगी के साथ मंच पर उनके चित्र भी सोशल मीडिया में खूब छाए।
मुख्यमंत्री ने विनोद खन्ना के निधन पर ट्विट कर शोक भी व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है-अभिनेता और भाजपा सांसद श्री विनोद खन्ना के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायी है। ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे। इस दुखद घड़ी में मेरी संवेदनाएं विनोद खन्ना जी के परिवार के साथ हैं।
मुख्यमंत्री ने विनोद खन्ना के निधन पर ट्विट कर शोक भी व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है-अभिनेता और भाजपा सांसद श्री विनोद खन्ना के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायी है। ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे। इस दुखद घड़ी में मेरी संवेदनाएं विनोद खन्ना जी के परिवार के साथ हैं।
विनोद खन्ना की वह ड्राइविंग...
विनोद खन्ना (फाइल फोटो)
प्रसंग 2002 विधानसभा चुनाव का है। विनोद खन्ना की मलिहाबाद के पास माल में भाजपा प्रत्याशी दिवाकर सेठ के समर्थन में सभा थी। प्रचार का अंतिम दिन था। भाजपा नेता हीरो वाजपेयी को विनोद खन्ना को लेकर सभा में जाना था।
हम लोगों की गाड़ी भी साथ में थी। खन्ना की उड़ान लेट हो गई। वे शाम लगभग 4 बजे अमौसी हवाई अड्डे पर उतरे। वाजपेयी ने उनसे कहा, ‘भाई साहब! लेट हो गए हैं। पांच बजे प्रचार समाप्त हो जाएगा।’ खन्ना ने घड़ी देखी और फिर बोलेे, ‘आओ बैठो। नहीं पहुंचेंगे तो अपने उम्मीदवार की स्थिति खराब हो जाएगी।’
विनोद खन्ना ने वाजपेयी की कार की चाबी लेकर खुद ड्राइविंग सीट संभाली। ड्राइवर को पीछे बैठा दिया। हीरो को बगल में बैठाया और गाड़ी आगे बढ़ाई। कुछ दूर तो हम लोगों की गाड़ी साथ चल पाई। फिर गाड़ी नहीं सिर्फ धूल दिखाई दे रही थी।
बहरहाल हम लोग जब माल पहुंचे तो देखा, विनोद खन्ना लोगों को फिल्मों डायलॉग सुना रहे हैं। वाजेपयी से पूछा कि क्या बोले? बताया, ‘हम लोग पहुंचे तो प्रचार का समय समाप्त होने में दो मिनट ही बचे थे। खन्ना ने सिर्फ यह कहा, ‘अब भाषण तो दे नहीं सकता। पर, आप सबको पता ही है कि मैं यहां आया किसलिए हूं।’
हम लोगों की गाड़ी भी साथ में थी। खन्ना की उड़ान लेट हो गई। वे शाम लगभग 4 बजे अमौसी हवाई अड्डे पर उतरे। वाजपेयी ने उनसे कहा, ‘भाई साहब! लेट हो गए हैं। पांच बजे प्रचार समाप्त हो जाएगा।’ खन्ना ने घड़ी देखी और फिर बोलेे, ‘आओ बैठो। नहीं पहुंचेंगे तो अपने उम्मीदवार की स्थिति खराब हो जाएगी।’
विनोद खन्ना ने वाजपेयी की कार की चाबी लेकर खुद ड्राइविंग सीट संभाली। ड्राइवर को पीछे बैठा दिया। हीरो को बगल में बैठाया और गाड़ी आगे बढ़ाई। कुछ दूर तो हम लोगों की गाड़ी साथ चल पाई। फिर गाड़ी नहीं सिर्फ धूल दिखाई दे रही थी।
बहरहाल हम लोग जब माल पहुंचे तो देखा, विनोद खन्ना लोगों को फिल्मों डायलॉग सुना रहे हैं। वाजेपयी से पूछा कि क्या बोले? बताया, ‘हम लोग पहुंचे तो प्रचार का समय समाप्त होने में दो मिनट ही बचे थे। खन्ना ने सिर्फ यह कहा, ‘अब भाषण तो दे नहीं सकता। पर, आप सबको पता ही है कि मैं यहां आया किसलिए हूं।’
रास्ते भर हनुमान चालीसा पढ़ता आया...
विनोद खन्ना
बहरहाल लोगों को डायलॉग सुनाने के बाद विनोद खन्ना ने माल के राजा व भाजपा नेता भूपेन्द्र सिंह के यहां चाय पी। चलने लगे तो हीरो से कहा आओ बैठो। हीरो बोले, ‘भाई साहब! आप चलिए, मैं आ रहा हूं।’
वाजपेयी वापसी में हम लोगों के साथ गाड़ी में बैठ गए। पूछा कि आप विनोद खन्ना के साथ क्यों नहीं लौटे? बोले,‘ रास्ते भर हनुमान चालीसा पढ़ता हुआ आया हूं। इतनी तेज गाड़ी चलाई कि लगा कि अब गए कि तब गए।
कई जगह टोकना पड़ा कि यह शूटिंग वाली सड़क नहीं है। पर, जनाब (विनोद खन्ना) का जवाब, ‘सिर्फ फिल्मों में ही तेज गाड़ी नहीं चलाता। असल जिंदगी में भी मैं गाड़ी चलाने में मास्टर हूं।’ उधर से तो जैसे-तैसे चला आया। पर, इधर से इतनी हिम्मत नहीं कर सकता था।
वाजपेयी वापसी में हम लोगों के साथ गाड़ी में बैठ गए। पूछा कि आप विनोद खन्ना के साथ क्यों नहीं लौटे? बोले,‘ रास्ते भर हनुमान चालीसा पढ़ता हुआ आया हूं। इतनी तेज गाड़ी चलाई कि लगा कि अब गए कि तब गए।
कई जगह टोकना पड़ा कि यह शूटिंग वाली सड़क नहीं है। पर, जनाब (विनोद खन्ना) का जवाब, ‘सिर्फ फिल्मों में ही तेज गाड़ी नहीं चलाता। असल जिंदगी में भी मैं गाड़ी चलाने में मास्टर हूं।’ उधर से तो जैसे-तैसे चला आया। पर, इधर से इतनी हिम्मत नहीं कर सकता था।