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विनय पाठक प्रकरण : एकेटीयू की हर फाइल में भ्रष्टाचार के सुबूत, घास लगाने-उखाड़ने के नाम पर लाखों का खेल
Mon, 28 Nov 2022 10:46 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 28 Nov 2022 10:46 PM IST
सार
एसटीएफ द्वारा की जा रही एकेटीयू की फाइलों की छानबीन में हर फाइल में भ्रष्टाचार के सुबूत मिल रहे हैं। सुबूत भी कुछ ऐसे कि नौसिखिया जांच अधिकारी भी बता दे कि किस फाइल में क्या गड़बड़ी की गई।
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प्रो. विनय पाठक
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कमीशनखोरी के मामले में फंसे छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक के खिलाफ उनसे जुड़ी हर फाइल में सुबूत मिल रहे हैं। एसटीएफ द्वारा की जा रही एकेटीयू की फाइलों की छानबीन में हर फाइल में भ्रष्टाचार के सुबूत मिल रहे हैं। सुबूत भी कुछ ऐसे कि नौसिखिया जांच अधिकारी भी बता दे कि किस फाइल में क्या गड़बड़ी की गई।
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सूत्रों ने बताया कि एकेटीयू की फाइलों की पड़ताल में ऐसे-ऐसे भ्रष्टाचार के सुबूत और तथ्य सामने आए हैं जिसे देख कर एसटीएफ के अधिकारी भी आश्चर्यचकित हैं। जांच एजेंसी को ऐसे भी दस्तावेज हाथ लगे हैं जिसमें प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए रातों रात सारी प्रक्रियाएं पूरी की गई और अगले ही दिन नियुक्ति कर दी गईं। इसके अलावा एसटीएफ जिस फाइल को खोल रही है और उसकी बारीकी से पड़ताल शुरू कर रही उसमें खामियां ही खामियां नजर आ रही हैं। प्रोफेसर पाठक ने एक्जीक्यूटिव काउंसिल की आड़ में जमकर मनमानी की। पाठक को अपने रसूख पर पूरा भरोसा था। उन्हें गुरुर था कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
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बिना लगे उखाड़ दी गई घास, हो गया लाखों का खेल
एसटीएफ को एक शिकायत यह भी मिली है कि युनिवर्सिटी कैंपस में घास लगाने केलिए टेंडर हुआ। चहेती कंपनी को काम सौंपा गया। घास के नाम पर लाखों का भुगतान हुआ। फिर घास को खराब बता कर उसे उखाड़ने केलिए टेंडर निकाला गया। यह काम दूसरी चहेती कंपनी को दिया गया। इसके लिए भी लाखों का भुगतान कर दिया गया। जबकि वास्तव न घास लगाई गई और न उखाड़ी गई। अब एसटीएफ इस तथ्य की सच्चाई पता लगा रही है।
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एकेटीयू के कई अधिकारी एसटीएफ के रडार पर
एकेटीयू के कई अधिकारी भी एसटीएफ के रडार पर हैं। निर्माण कार्यों में हुई गड़बड़ी से लेकर एकेटीयू में हुई नियुक्तियों तक में खेल करने वालों की शिनाख्त की जा रही है। विनय पाठक केलिए और किन-किन लोगों ने मदद की, किसकी क्या भूमिका थी, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। सारे सुबूत इकट्ठा करने केबाद नई एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।