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स्कूल की लंबी दूरी भी नहीं डिगा सकी इनका लक्ष्य, सफलता के लिए मां-पिता से भी रहे दूर

Tue, 01 May 2018 02:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 01 May 2018 02:03 AM IST
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vinay of sitapur and shani of gonda ranked third in UP board highschool exam
विनय वर्मा को मिठाई खिलातीं उनकी मां। - फोटो : amar ujala
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में प्रदेश में संयुक्त रूप से तीसरा स्थान पाने वाले दो छात्र अवध क्षेत्र के हैं। सीतापुर जिले के विनय वर्मा और गोंडा के शनि वर्मा ने सफलता पाने के लिए कड़ा संघर्ष किया। इनकी मेहनत के आगे संसाधनों की कमी और तमाम परेशानियां डिग नहीं सकीं।
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स्कूल जाने के लिए रोजाना 30 किमी. चलाई साइकिल
सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र के मनिकापुर में रहने वाले साधारण किसान धनीराम वर्मा, बेटे विनय वर्मा की सफलता से फूले नहीं समा रहे हैं। 94.17 फीसदी अंकों के साथ उनके बेटे ने जिला टॉप और प्रदेश में तीसरा स्थान जो प्राप्त किया है। खुशी के आंसू पोछते हुए धनीराम ने बताया कि हमारे गांव से महमूदाबाद का सीता बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज करीब 15 किलोमीटर दूर है। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाला विनय रोजाना साइकिल से कॉलेज आता-जाता है। ट्यूशन का खर्च वहन करने में सक्षम नही होने से कॉलेज के बाद घर में उसने स्वअध्याय किया। रोजाना 30 किमी. साइकिल चलाने के बाद भी विनय आठ घंटे पढ़ाई करता रहा। इस दौरान संसाधनों की कमी खली जरूर, लेकिन उसके ठोस इरादों के आगे टिक नहीं सकी।
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मां-पिता से दूर रहकर भी किया नाम रोशन

vinay of sitapur and shani of gonda ranked third in UP board highschool exam
परिवारीजनों के साथ शनि। - फोटो : amar ujala
गोंडा के खोंडारे थाना क्षेत्र के निवासी किसान केशवराम वर्मा के बेटे शनि वर्मा ने भी 94.17 प्रतिशत अंकों के साथ जिले में पहला और प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बेहद सामान्य परिवार के शनि वर्मा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने मामा को दिया है। शनि वर्मा के मामा संदीप वर्मा बस्ती जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बभनान में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वह मामा के साथ ही रहकर पढ़ाई कर रहा है। संदीप वर्मा के मुताबिक शनि पढ़ने में शुरू से ही मेधावी रहा है। यही देखकर वह शनि को अपने पास ले आए और उसका प्रवेश एमपीएस किसान इंटर कॉलेज में करा दिया। संदीप ने बताया कि आगे चलकर वह आईआईटी के जरिए इंजीनियर बनना चाहता है। शनि मूलतः अंबेडकरनगर जिले के टांडा तहसील के चौथइया (चिंतौरा) गांव के रहने वाले हैं।
 
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