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जोखिम उठाकर गुजर रहे राहगीर
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भीटी (अंबेडकरनगर)। भीटी तहसील क्षेत्र के नगऊपुर स्थित विसुही नदी पर ह्यूम पाइप से बने पुल से यात्री जान जोखिम में डाल आवागमन करने को विवश हैं। कई बार ग्रामीणों ने यहां पक्के पुल निर्माण की आवाज उठाई, लेकिन न तो जनप्रतिनिधियों ने और न ही अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान दिया। ऐसे में हजारों की आबादी इस ह्यूम पाइप से बने पुल से जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को विवश है।
ग्रामीणों के अनुसार बीते दिनों बारिश के दौरान इस पुल से गुजर रहा एक मजदूर साइकिल समेत नदी की धारा में बह गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों को यहां पक्के पुल निर्माण की जरूरत महसूस नहीं हो रही। भीटी तहसील क्षेत्र के नगऊपुर स्थित विसुही नदी पर ग्रामीणों की मदद से करीब डेढ़ दशक पहले ह्यूम पाइप से पुल का निर्माण हुआ था।
ग्रामीण हर साल बाढ़ के बाद इस पुल के दोनों तरफ मिट्टी आदि डालकर समतलीकरण करते हैं। इसके बाद यह पुल आवागमन के लिए उपयुक्त हो पाता है। इस पुल से रुदऊपुर, अत्ताउल्लाहपुर, समंथा, पकड़ी नगऊपुर, बस्तीपुर व महमदपुर आदि गांवों की करीब तीन हजार की आबादी प्रतिदिन यहां से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचती है। पुल पार करने के दौरान यात्रियों के लिए जान का जोखिम बना रहता है। यात्रियों की जरा सी भी चूक उनके लिए कभी भी अनहोनी को अंजाम दे सकती है।
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भीटी तहसील पहुंचने के लिए शार्टकट के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले इस मार्ग से ज्यादातर यात्री आवागमन करते हैं। इस मार्ग से जाने पर जनपद मुख्यालय की भी दूरी काफी कम हो जाती है। इसके बावजूद ग्रामीणों की पक्के पुल निर्माण की आस पूरी नहीं हो पा रही। कई बार ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से यहां पक्का पुल निर्माण कराए जाने की मांग की, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।
स्थानीय राम नयन, शिव कुमार, रामबचन, रामजियावन, हरिराम, मनोहर सिंह, अरविंद सिंह, शत्रुघ्न सिंह, दिलीप तिवारी व राजेश मिश्र आदि का कहना है कि यहां पक्का पुल निर्माण होने से सबसे ज्यादा फायदा किसानों को होगा। मौजूदा समय में किसानों को मिझौड़ा स्थित चीनी मिल गन्ना लेकर जाने में लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। लेकिन यहां पुल बन जाने के बाद चीनी मिल की दूरी मात्र 5 किलोमीटर में सिमट जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि इसके बावजूद जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की इस समस्या को हल कराने की तरफ ध्यान नहीं दे रहे।
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माइनर का टूटा ब्रेकर दुरुस्त कराने की मांग
टांडा विकासखंड के उतरेथू बरुआ जलाकी मार्ग स्थित जयपालपुर के निकट चकवापुर माइनर की पुलिया का ब्रेकर टूट जाने से यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग का प्रयोग उतरेथू, बरुआ जलाकी, जयपालपुर, चकवापुुर समेत दो दर्जन से ज्यादा गांव के ग्रामीण आवागमन के लिए करते हैं। सड़क के किनारे माइनर भी है। इसका ब्रेकर टूट जाने से यात्रियों व ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय जगदीश पाठक, अमरेंद्र तिवारी, शैलेंद्र वर्मा, भक्त राम वर्मा व राकेश जायसवाल आदि का कहना है कि पुलिया का ब्रेकर लंबे समय से टूटा पड़ा है, लेकिन इसकी मरम्मत की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ब्रेकर दुरुस्त नहीं कराया गया तो कभी भी यहां अनहोनी हो सकती है। ग्रामीणों ने जिम्मेदारों से अविलंब ब्रेकर को सही कराए जाने की मांग की।
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ग्रामीणों के अनुसार बीते दिनों बारिश के दौरान इस पुल से गुजर रहा एक मजदूर साइकिल समेत नदी की धारा में बह गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों को यहां पक्के पुल निर्माण की जरूरत महसूस नहीं हो रही। भीटी तहसील क्षेत्र के नगऊपुर स्थित विसुही नदी पर ग्रामीणों की मदद से करीब डेढ़ दशक पहले ह्यूम पाइप से पुल का निर्माण हुआ था।
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ग्रामीण हर साल बाढ़ के बाद इस पुल के दोनों तरफ मिट्टी आदि डालकर समतलीकरण करते हैं। इसके बाद यह पुल आवागमन के लिए उपयुक्त हो पाता है। इस पुल से रुदऊपुर, अत्ताउल्लाहपुर, समंथा, पकड़ी नगऊपुर, बस्तीपुर व महमदपुर आदि गांवों की करीब तीन हजार की आबादी प्रतिदिन यहां से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचती है। पुल पार करने के दौरान यात्रियों के लिए जान का जोखिम बना रहता है। यात्रियों की जरा सी भी चूक उनके लिए कभी भी अनहोनी को अंजाम दे सकती है।
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भीटी तहसील पहुंचने के लिए शार्टकट के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले इस मार्ग से ज्यादातर यात्री आवागमन करते हैं। इस मार्ग से जाने पर जनपद मुख्यालय की भी दूरी काफी कम हो जाती है। इसके बावजूद ग्रामीणों की पक्के पुल निर्माण की आस पूरी नहीं हो पा रही। कई बार ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से यहां पक्का पुल निर्माण कराए जाने की मांग की, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।
स्थानीय राम नयन, शिव कुमार, रामबचन, रामजियावन, हरिराम, मनोहर सिंह, अरविंद सिंह, शत्रुघ्न सिंह, दिलीप तिवारी व राजेश मिश्र आदि का कहना है कि यहां पक्का पुल निर्माण होने से सबसे ज्यादा फायदा किसानों को होगा। मौजूदा समय में किसानों को मिझौड़ा स्थित चीनी मिल गन्ना लेकर जाने में लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। लेकिन यहां पुल बन जाने के बाद चीनी मिल की दूरी मात्र 5 किलोमीटर में सिमट जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि इसके बावजूद जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की इस समस्या को हल कराने की तरफ ध्यान नहीं दे रहे।
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माइनर का टूटा ब्रेकर दुरुस्त कराने की मांग
टांडा विकासखंड के उतरेथू बरुआ जलाकी मार्ग स्थित जयपालपुर के निकट चकवापुर माइनर की पुलिया का ब्रेकर टूट जाने से यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग का प्रयोग उतरेथू, बरुआ जलाकी, जयपालपुर, चकवापुुर समेत दो दर्जन से ज्यादा गांव के ग्रामीण आवागमन के लिए करते हैं। सड़क के किनारे माइनर भी है। इसका ब्रेकर टूट जाने से यात्रियों व ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय जगदीश पाठक, अमरेंद्र तिवारी, शैलेंद्र वर्मा, भक्त राम वर्मा व राकेश जायसवाल आदि का कहना है कि पुलिया का ब्रेकर लंबे समय से टूटा पड़ा है, लेकिन इसकी मरम्मत की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ब्रेकर दुरुस्त नहीं कराया गया तो कभी भी यहां अनहोनी हो सकती है। ग्रामीणों ने जिम्मेदारों से अविलंब ब्रेकर को सही कराए जाने की मांग की।