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यूपी :फर्जी डॉक्टरों पर बोर्ड से लेकर जिला मुख्यालय तक ने दिखाई दरियादिली, इन 41 डॉक्टरों का निरस्त हुआ पंजीयन

Mon, 24 Aug 2026 09:46 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Mon, 24 Aug 2026 09:46 PM IST
सार

रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश वर्मा का कहना है कि फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे पंजीयन कराने वालों का नाम बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह के समक्ष रखा गया था। उनके निर्देश के बाद संबंधित जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एव यूनानी अधिकारियों को सूची भेजी गई थी। नीचे देखें, पंजीयन निरस्त किए गए डॉक्टरों की सूची: 
 

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UP: From the board to district headquarters, leniency shown towards fake doctors.
- फोटो : संवाद

विस्तार

फर्जी प्रमाण पत्र से डॉक्टर बनने वालों पर आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड से लेकर जिला मुख्यालयों तक में दरियादिली दिखाई गई। बोर्ड ने पंजीयन निरस्त किया तो कुछ क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय ने अस्पताल चलाने का लाइसेंस रद्द कर दिया। इसके बाद सभी ने चुप्पी साध ली। बोर्ड को लेकर विवाद हाईकोर्ट में पहुंचा तो पूरे खेल का खुलासा हुआ।

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आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड ने डॉक्टर होने का पंजीयन कराने के बाद विभिन्न स्थानों पर आयुर्वेदिक अस्पताल चल रहे हैं। पांच लोगों की शिकायत के बाद भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग ने जांच की। इस जांच में पांच के अलावा 36 अन्य की भी डिग्री फर्जी मिली। इन सभी 41 के डॉक्टर होने का पंजीयन रद्द कर दिया गया। पंजीयन कराने वालों के साथ संबंधित जिले के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी को भी अवगत कराया गया। इसके बाद बोर्ड ने जिलेवार सूची संबंधित क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों को भेजा। निर्देश दिया कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। सीतापुर, गाजियाबाद, जौनपुर सहित कई जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारियों ने जिनका पंजीयन रद्द हुआ था, उनकी अपने जिले में डिस्पेंसरी चलाने का लाइसेंस रद्द कर दिया। जबकि कुछ जिलों के अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखी।
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अगस्त 2026 में यह मामला फिर उठा तो बोर्ड ने विभिन्न जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों को पत्र भेजना शुरू किया, जिसमें कहा कि संबंधित लोगों के खिलाफ अभी तक रिपोर्ट क्यों दर्ज नहीं कराई गई? इस पत्र के बाद पूरे मामले में मुख्यमंत्री से शिकायत की गई। विधिक जानकारों का कहना है कि जिस स्थान पर फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है, वहीं रिपोर्ट दर्ज कराई जानी चाहिए थी।
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बोर्ड बैठक में रखा गया था सभी के नाम
रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश वर्मा का कहना है कि फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे पंजीयन कराने वालों का नाम बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह के समक्ष रखा गया था। उनके निर्देश के बाद संबंधित जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एव यूनानी अधिकारियों को सूची भेजी गई थी। यह भी निर्देश दिया गया था कि वे अपने- अपने जिले में संबंधित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएं।

बोर्ड के संचालन को लेकर चल रहा विवाद

बोर्ड के संचालन को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। बोर्ड का कार्यकाल 28 अप्रैल 2025 को खत्म हो गया था। कार्यकाल बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई। हाईकोर्ट ने चार सप्ताह का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश दिया। छह मार्च को आईएएस चैत्रा वी को प्रशासक बनाया गया। 20 मई को कोर्ट ने यह नियुक्ति रद्द कर दी। फिर 10 अगस्त को नए सिरे से कंट्रोलर की नियुक्ति की गई है। बोर्ड के विवाद के बीच ही फर्जी पंजीयन का मामला सामने आया है। हालांकि अब नए सिरे से बोर्ड का चुनाव कराने की तैयारी भी है।

रजिस्ट्रार को हटाने की मांग
बोर्ड के उपाध्यक्ष डा. शैलेश कुमार राय ने सोमवार को आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार को पत्र भेजा है। इसमें मांग की है कि पंजीयन फर्जीवाड़े मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके लिए रजिस्ट्रार डा. अखिलेश कुमार वर्मा, कर्मचारी प्रवीण कुमार प्रजापति, प्रवीण, रमाकंत, डा. नरेंद्र को हटाया जाए। उन्होंने तर्क दिया है कि पूरा घटनाक्रम इन्हीं के कार्यकाल है। ऐसे में इनके हटाए बिना निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि पदोन्नति के बाद भी डा. अखिलेश वर्मा रजिस्ट्रार के पद पर बने हुए हैं, यह नियम विरुद्ध है।

इनका निरस्त हुआ है पंजीयन
फर्जीवाड़े के आरोप में जिनका पंजीयन निरस्त हुआ है, उसमें लखनऊ के डा. विजय बहादुर सिंह, सीतापुर के डा. मुजीर्बुरहमान, अयोध्या के डा. सुनील कुमार, रायबरेली के डा. आशीष यादव, सुल्तानपुर के डा. पंकज कुमार सहित 41 लोग शामिल हैं।







सोमवार को दर्ज नहीं हुई रिपोर्ट
फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे डॉक्टर बनने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए बोर्ड की ओर से शनिवार को ही तहरीर भेज दी गई है। इसके बाद भी सोमवार शाम तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। एसीपी हजरतगंज रजनीश वर्मा ने बताया कि अभी तक इस मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।

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