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UP: भ्रष्ट नौकरशाहों को सरकार की शह!

Sat, 29 Nov 2014 01:40 PM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 29 Nov 2014 01:40 PM IST
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vigilance will want permission for start case on 15 corrupted officers.

भ्रष्टाचार, धांधली और आय से अधिक संपत्ति के दाग एक-दो नहीं बल्कि कई आला अफसरों पर हैं। ऐसे 60 से ज्यादा अफसरों की जांच अकेले विजिलेंस कर रही है।

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इनमें से 15 तो ऐसे हैं जिनके खिलाफ जांच पूरी भी हो चुकी है लेकिन उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी अटकी पड़ी है। इनमें से आईएएस तुलसी गौड़ और केके त्रिपाठी तो रिटायर भी हो गए।
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अफसरों के भ्रष्टाचार पर काबू नहीं लग पा रहा है तो इसके पीछे यह प्रमुख कारण है। भ्रष्टाचार व आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जिन अफसरों के खिलाफ शासन में अब तक मुकदमा चलाने की मंजूरी की फाइल अटकी पड़ी है उनमें आईएएस तुलसी गौड़, केके त्रिपाठी के अलावा खीरी में डीएफओ रहे आईएफएस नीरज कुमार और अलीगढ़ में इसी पद पर तैनात रहे डीपी गुप्ता, पीपीएस श्याम लाल (सीओ बस्ती) और राहुल मिठास (सीओ मेरठ) के अलावा पीसीएस अफसरों के नाम शामिल हैं।

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इन अफसरों के नाम भी शामिल

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पीसीएस अफसरों में गोरखपुर के मुख्य नगर अधिकारी रहे शंकर लाल पांडे, एसडीएम हाथरस रहे आरएम दयाल, एसडीएम बुलंदशहर रहे लालमणि पांडे और एडीएम मुरादाबाद रहे सुरेश चंद्र गुप्त के नाम शामिल हैं।

सुरेश चंद्र के खिलाफ विजिलेंस ने उनके मुरादाबाद में तैनात रहने के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा दर्ज कराया था।

फिलहाल वह इलाहाबाद में राजकीय मुद्रणालय में संयुक्त निदेशक हैं। निदेशक सतर्कता भानु प्रताप सिंह ने बताया कि सतर्कता अधिष्ठान इस समय 40 से ज्यादा अफसरों के खिलाफ जांच कर रहा है। इसके अलावा तकरीबन 15 के खिलाफ अधिष्ठान ने जांच पूरी कर अभियोजन की स्वीकृति मांगी हुई है। 1980 बैच के आईएएस अफसर रहे तुलसी गौड़ के खिलाफ निर्यात निगम में तैनाती के दौरान भारी गड़बड़ी के आरोप लगे।

कई अफसर तो हो गए रिटायर

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विजिलेंस ने जांच में पाया कि गौड़ ने अपनी पत्नी के नाम से फर्म बनाकर उसे काम दिलाकर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किए थे। लंबी चली जांच के बाद गौड़ के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी गई लेकिन इस दौरान वे रिटायर हो गए।

स्मारक घोटाले में भी फंस रहे तीन आईएएस स्मारक घोटाले में भी आईएएस अफसर हरभजन सिंह, रवींद्र सिंह और मोहिंदर सिंह विजिलेंस जांच के दायरे में हैं। इनमें से हरभजन व मोहिंदर सिंह रिटायर हो चुके हैं।

विजिलेंस को इनके गड़बड़ी में शामिल होने के कुछ साक्ष्य मिले हैं। बहरहाल जांच जारी है। ऐसे ही राजकीय निर्माण निगम, मध्यांचल विद्युत में एलटी कॉम को काम दिए जाने और भुगतान न किए जाने के मामले की जांच में कई अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं।

आवास-विकास परिषद में पूर्व में भू-उपयोग को लेकर की गई अनियमितता में भी कई आईएएस व पीसीएस अफसरों के नाम सामने आ चुके हैं।

ठंडे बस्ते में पड़ी हैं विजिलेंस की कई रिपोर्ट

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पूर्व में भी विजिलेंस कई अफसरों के खिलाफ जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट भेज चुकी है।

इनमें आईएएस आरए प्रसाद, पीएन मिश्रा, सीएन दुबे, गुरुदीप सिंह, एमके गुप्ता, सत्यजीत ठाकुर, गिरिराज वर्मा, आरके सिंह, बृजेंद्र यादव, सुनंदा प्रसाद, वीके वार्ष्णेय, ललित वर्मा, डीएस यादव, एके उपाध्याय, आरके भटनागर, एके टंडन के नाम शामिल हैं।

वैसे तो तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ भी विजिलेंस जांच की संस्तुति की गई पर बाद में उससे जांच वापस ले ली गई।

विजिलेंस की जांचों को लेकर यह धारणा बन चुकी है कि उसे जांच भेजने का मतलब ठंडे बस्ते में डालना है। यह धारणा यूं ही नहीं बनी। एक-एक जांच में वर्षों बीत जाते हैं।
 
ऐसे कई मामले हैं जांच जब तक पूरी हुई आरोपी अफसर रिटायर हो गए। मुकदमे की मंजूरी नहीं मिलना भी बड़ा पेच बन गया है।  शासन के पास मुकदमा चलाने की मंजूरी देने की सिफारिश लटकी पड़ी रहती है। ऐसे कई मामले शासन में लंबित हैं।

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