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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Vigilance raids premises of retired ARTO Lalit Kumar ill-gotten wealth worth ₹35 crore unearthed in lucknow

UP: 22KG सोने-चांदी के बिस्किट, घर के हर कोन में नोट, 1.62 करोड़ नगद, निरीक्षक से ARTO बने 'धनकुबेर' की कहानी

Thu, 09 Jul 2026 09:08 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 09 Jul 2026 09:08 AM IST
सार

आय से अधिक संपत्ति के मामले में रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के घर आकूत दौलत का खजाना मिला है। रिटायर्ड ARTO के घर के हर कोने में नोटों के पैकेट छिपाकर रखे थे। विजिलेंस के छापे में 1.62 करोड़ नकद और 35 करोड़ की काली कमाई मिली है। 20 करोड़ के सोने-चांदी के बिस्किट और जेवर व संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं।

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Vigilance raids premises of retired ARTO Lalit Kumar ill-gotten wealth worth ₹35 crore unearthed in lucknow
vigilance raid in lucknow - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

आय से अधिक संपत्ति के मामले में रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ के अलीगंज स्थित आवास पर विजिलेंस छापे में काली कमाई का खुलासा हुआ है।
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छापे में पैकेट में छिपाकर रखे 1.62 करोड़ रुपये नकद, करीब 20 करोड़ के सोने चांदी के 22 किलो बिस्किट व आभूषण, 13 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों के दस्तावेज और करोड़ों के अन्य निवेश के साक्ष्य मिले। शुरुआती आकलन में बरामद संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये है।
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मूलरूप से रायबरेली के नूर मार्केट के रहने वाले आगरा के तत्कालीन एआरटीओ ललित वर्तमान में लखनऊ में रहते हैं। आईजी विजिलेंस मंजिल सैनी ने बताया कि ललित के खिलाफ परिवहन आयुक्त द्वारा वर्ष 2020 में की गई शिकायत के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) के कानपुर सेक्टर ने जांच की थी। 
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जांच में ललित की आय सभी वैध स्रोतों से करीब 93 लाख रुपये की मिली थी जबकि संपत्तियों को खरीदने एवं भरण पोषण में 1.62 करोड़ रुपये खर्च करने की पुष्टि हुई थी। एसीओ ने 11 जून 2024 को कानपुर सेक्टर के थाने में ललित पर एफआईआर दर्ज की थी जिसकी विवेचना शासन ने विजिलेंस को सौंपी थी।

विजिलेंस ने अदालत से सर्च वारंट लेकर मंगलवार को उनके अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी के आवास पर पुलिस बल की मौजूदगी में छानबीन की। छापे की कार्रवाई बुधवार सुबह पूरी हुई। डीजीपी राजीव कृष्ण ने टीम में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों को एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। 

दो तिजोरियों में मिले जेवरात
छापे में ललित के घर पर कई लॉकर व ज्वैलर्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो तिजोरियां मिली हैं जिसमें नकदी, सोने-चांदी के बिस्किट और जेवरात बरामद हुए। इसके अलावा टोयोटा इनोवा, हुंडई आई-20 कार, रिवॉल्वर, विभिन्न बैंकों, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड, फिक्स डिपॉजिट आदि में करीब एक करोड़ से भी अधिक के निवेश के सुबूत मिले।
 

तीन साल पहले भी हुई थी जांच, दब गया था मामला
एआरटीओ रहे ललित कुमार के यहा विजिलेंस की कार्रवाई का मामला, विभाग में हड़कंप

आगरा में तैनात रहे पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस की टीम ने तीन साल पहले भी छापा मारा था। सूत्र बताते हैं कि मामले को दबा दिया गया था। वहीं बुधवार को विजिलेंस की कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। भ्रष्ट अफसर सकते में आ गए हैं।
 

इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में हलचल तेज हो गई है। विभाग के भीतर यह चर्चा है कि इस कार्रवाई का असर उन अधिकारियों पर भी पड़ सकता है, जिनके खिलाफ लंबे समय से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही हैं। 

सूत्रों का दावा है कि कई अधिकारी अपनी कथित बेनामी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन को लेकर सतर्क हो गए हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी व्यापक जांच की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार, ललित कुमार के कार्यकाल को लेकर पहले भी कई तरह की शिकायतें सामने आती रही थीं। 

 

विभागीय सूत्रों का कहना है कि वाहन फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य परिवहन संबंधी सेवाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतें लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। यह भी कहा जा रहा है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां अर्जित किए जाने को लेकर जांच एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
इधर, ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी एजेंसियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विभागीय संरक्षण के कारण कुछ एजेंसियां आम लोगों से मनमानी वसूली कर रही हैं और शिकायतों के बावजूद उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। 

पीड़ितों की ओर से लगातार शिकायतें किए जाने के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा है। हाल ही में प्रभावित लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

निरीक्षक से बने थे एआरटीओ
एआरटीओ ललित कुमार पहले संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) के पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ एंटी करप्शन ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन प्रोन्नति के बाद राजपत्रित अधिकारी बनने की वजह से इसकी विवेचना का जिम्मा विजिलेंस को सौंप दिया गया। वह बीते वर्ष आगरा में तैनात रहने के दौरान सेवानिवृत्त हो गए थे।

डेढ़ वर्ष तक एआरटीओ रायबरेली में किया कार्य
आगरा के तत्कालीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ललित कुमार का रायबरेली के नूर मार्केट मिलन सिनेमा गली में मकान है। ललित कुमार ने शहर के जीआईसी में पढ़ाई की थी। साथ ही रायबरेली के जिस मकान में वह परिवार के साथ रहते थे। उनको पाटीदार के रूप में मिला था। 

वर्ष 2010-11 में ललित कुमार रायबरेली एआरटीओ कार्यालय में आरआई के पद पर भी कार्यरत रहे थे। करीब डेढ़ साल तक वह आरआई के पद पर रायबरेली में काम करते रहे। इसके बाद स्थानांतरण हुआ था। आरआई बनने से पहले वह रोडवेज में फोरमैन थे। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि तीन माह पहले ललित कुमार रायबरेली आए थे।

इन संपत्तियों के मिले दस्तावेज
  • सी-143, सेक्टर-ई, अलीगंज, लखनऊ (आवासीय भवन)
  • सी-145, सेक्टर-ई, अलीगंज, लखनऊ (आवासीय भूखण्ड)
  • खसरा नं-1321, मोहल्ला भरावन कला, बालकगंज, लखनऊ (आवासीय भूखण्ड)
  • 532/491 बनारसी टोला, अलीगंज, लखनऊ (आवासीय भवन)
  • 1631, कल्ली पश्चिम, मोहनलालगंज, लखनऊ (आवासीय भूखण्ड)
  • मोहनलालगंज चौरहिया, लखनऊ में कृषि भूमि
  • ग्राम बेगरिया मोहनलालगंज में कृषि भूमि

  • इस्माइलगंज, लखनऊ में आवासीय भूखण्ड
  • 10 सी/40 वृंदावन योजना लखनऊ में आवासीय भूखण्ड
  • फ्लैट संख्या-3002 अंसल एपीआई, लखनऊ में बुकिंग
  • माहेश्वरी इन्फ्राटेक नोएडा में फ्लैट बुकिंग
  • आम्रमाली स्प्रिंग मीडो, नोएडा में फ्लैट बुकिंग
  • ग्राम जीतपुरवा जनपद बाराबंकी में कृषि भूमि
  • एक अन्य-ग्राम जीतपुरवा जनपद बाराबंकी में कृषि भूमि
  • ग्राम सहगो कोठी नूर मार्केट रायबरेली में कृषि भूमि

आगरा में पांच साल रही पोस्टिंग
आगरा में पांच वर्ष तक सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रवर्तन के पद पर तैनात रहे ललित कुमार का कार्यकाल विवादों के कारण चर्चा में रहा। चालकों से कथित वसूली, वाहन चेकिंग के दौरान झगड़े और सैयां टोल प्लाजा पर हुए विवाद समेत कई मामलों में उनके खिलाफ शिकायतें सामने आती रहीं लेकिन किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सेवानिवृत्त होने के बाद बुधवार को विजिलेंस की टीम की छापेमारी में लखनऊ स्थित आवास से सोने-चांदी के जेवर और करोड़ों की नकदी बरामद होने से ललित कुमार एक बार फिर चर्चा में आ गए।

 
 

ललित कुमार अक्तूबर 2020 में कानपुर से स्थानांतरित होकर आगरा आए थे। इससे पहले वह कानपुर में आरआई (संभागीय परिवहन निरीक्षक) के पद पर तैनात थे। आगरा में उन्होंने अक्तूबर 2020 से अक्तूबर 2025 तक एआरटीओ प्रवर्तन के रूप में कार्य किया।

आगरा से ही वह सेवानिवृत्त हुए थे। इस दौरान उनका नाता विवादों से बना रहा। वाहन चेकिंग अभियानों के दौरान चालकों से विवाद, कथित अवैध वसूली के आरोप और टोल प्लाजा पर हुए विवाद जैसे मामले समय-समय पर सुर्खियों में रहे। परिवहन विभाग को उनके खिलाफ कई शिकायतें भी मिलीं।

 

कार्यालय स्तर पर भी विभिन्न मामलों में शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आगरा में तैनाती के दौरान लंबी छुट्टियां लेने के कारण भी उनका तत्कालीन आरटीओ से विवाद हुआ था।
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