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कुलपतियों का कार्यकाल भी होगा पांच साल का: राज्यपाल

Tue, 15 Dec 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 15 Dec 2015 01:52 AM IST
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Vice president tenure to be for five years.

सरकार राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का भी कार्यकाल पांच वर्ष करने जा रही है। इसके लिए सरकार शीघ्र ही उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 में संशोधन करने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी फाइल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास भेज दी है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद सूबे में भी कुलपतियों का कार्यकाल पांच साल हो जाएगा।

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इससे पहले सोमवार को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे कुलाधिपति राज्यपाल राम नाईक ने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासन में प्रस्ताव भेजा जा चुका है। नाईक ने कहा कि तीन साल का कार्यकाल कुलपति के लिए पर्याप्त नहीं।
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इसमें से शुरू के छह महीने चीजों को समझने और आखिरी के छह महीने तो फेयरवेल के दौर में ही गुजर जाते हैं। इस तरह से कुलपति को ठीक से काम करने के लिए मात्र दो साल का ही समय मिल पाता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपति का कार्यकाल पांच साल होता है। इसमें वह सही से योजनाओं को अमल करवा पाते हैं।
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दरअसल, सूबे में 15 राज्य विश्वविद्यालय हैं। इनमें से डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय का अपना अलग अधिनियम है। यहां पर कुलपति का कार्यकाल पहले से ही पांच वर्ष का है। लेकिन बचे 14 विश्वविद्यालय उप्र राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 से संचालित होते हैं। इन सभी में कुलपति का कार्यकाल तीन वर्ष या अधिकतम आयु 68 वर्ष ही है।

इस राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यकाल पांच साल

Vice president tenure to be for five years.

जबकि डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय का संचालन विकलांग कल्याण विभाग करता है। इस विश्वविद्यालय का अधिनियम भी अलग है। इसमें भी कुलपति का कार्यकाल पांच वर्ष का है। इसी प्रकार केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी कुलपति का कार्यकाल पांच वर्ष या अधिकतम आयु 70 वर्ष है।

इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने भी अपने राज्य के 14 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कार्यकाल बढ़ाने का मन बना लिया है। शीघ्र ही इस पर निर्णय होने की उम्मीद है। इसकी फाइल मुख्यमंत्री के पास अनुमोदन के लिए भेजी गई है। वहां से निर्णय होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।

कार्यकाल बढ़ने से विश्वविद्यालयों में आएगा स्थायित्व
राज्यपाल ने बताया कि जुलाई में राजभवन में हुई प्रदेश के कुलपतियों व कुलसचिवों की बैठक में कुलपतियों का कार्यकाल बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। उसमें सभी ने इस पर सहमति जताई। उसी बैठक में सबके विचार लेने के बाद केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तर्ज पर राज्य विश्वविद्यालयों में भी कुलपति का कार्यकाल पांच साल करने का प्रस्ताव शासन में भेजा गया है। ऐसा होने से विश्वविद्यालयों में स्थायित्व आएगा और स्थितियां बेहतर होंगी।

शिक्षा को लेकर आती हैं दो तरह की दिक्कतें

Vice president tenure to be for five years.

मीडिया से मुखातिब राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो तरह की शिकायतें आती हैं।

पहली कि छात्र कक्षाओं में नहीं आते और दूसरा कि शिक्षक पढ़ाने में लापरवाही करते हैं। राज्यपाल ने कहा कि इन दोनों ही समस्याओं का बड़ा कारण शिक्षकों के पद रिक्त होना है।

कॉन्ट्रेक्ट के शिक्षकों से वह उम्मीद नहीं की जा सकती जो स्थायी शिक्षकों से। असल में कॉन्ट्रेक्ट पर कार्यरत शिक्षकों को लगता है कि वह कुछ समय के लिए हैं इसलिए बहुत गंभीर नहीं हो पाते।

उनको देखकर छात्रों को लगता है कि जब शिक्षक पढ़ा ही नहीं रहे तो वह कक्षाओं में क्यों आएं। राज्यपाल ने कहा कि इस समस्या का समाधान हो रहा है। विश्वविद्यालयों में जल्द रिक्त पदों को भरने का प्रयास हो रहा है, जिसके बाद स्थितियां बेहतर होंगी।

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