राम विवाह यात्रा: नेपाल तक हिंदुओं को लामबंध करना है मकसद
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विश्व हिंदू परिषद अब राम विवाह यात्रा के बहाने अवध की धरती से नेपाल के बीच फैले इलाके के हिंदुओं को लामबंद करेगी। इसके लिए अयोध्या के कारसेवकपुरम से 17 नवंबर को राम विवाह यात्रा निकाली जाएगी, जो आजमगढ़, बक्सर, पटना, सीतामढ़ी होते हुए 24 नवंबर को जनकपुर (नेपाल) पहुंचेगी।
भगवान राम अयोध्यावासियों के साथ पांच दिन ससुराल में बिताएंगे। जनकपुर से 29 नवंबर को वापसी की यात्रा शुरू होगी, जो वीरगंज, मोतिहारी, कुशीनगर, गोरखपुर से बस्ती होते हुए अयोध्या वापस आएगी। यात्रा में बड़ी संख्या में संत-महात्मा व श्रद्धालु शामिल होंगे।
जगह-जगह होंगे प्रवचन व सभाएं: विहिप ने जिस तरह का कार्यक्रम तय किया है, उससे साफ पता चल जाता है कि उसकी कोशिश राम विवाह यात्रा के सहारे अयोध्या से नेपाल के बीच स्थित इलाके के हिंदुओं को लामबंद करना है। इसीलिए जगह-जगह सभाएं व प्रवचन के कार्यक्रम तय किए गए हैं।
इनमें भारत व नेपाल के बीच सांस्कृतिक एकता और उसके सामने खड़ी चुनौतियों से लोगों को अवगत कराया जाएगा। साथ ही आह्वान होगा कि वे मतभेद भुलाकर एकजुट हों।
ये तर्क है विहिप का
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि यात्रा का उद्देश्य भारत व नेपाल की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत बनाना है। साथ ही यह संदेश देना है कि कुछ ताकतें हिंदुओं की इस साझी सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करना चाहती हैं।
ये ताकतें अगर अपने मकसद में कामयाब हो गईं तो हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा खड़ा उत्पन्न हो जाएगा।
चीन सहित कई देशों के लिए देश की सुरक्षा को चुनौती देना आसान हो जाएगा। इसीलिए प्रत्येक पांच साल पर यह यात्रा निकालकर लोगों को सचेत करने के साथ ही उन्हें बताया जाता है कि भारत व नेपाल अलग-अलग नहीं हैं।