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84 कोसी से नहीं भरा मन, अब पंच कोसी
अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ
Updated Sun, 15 Sep 2013 02:46 PM IST
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चौरासी कोसी परिक्रमा का पटाक्षेप हुआ नहीं कि विहिप ने दूसरी परिक्रमा का ऐलान कर दिया है।
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फर्क सिर्फ यह होगा कि विहिप का ऐलान इस बार 84 नहीं, बल्कि पंचकोसी परिक्रमा का है।
विहिप के महामंत्री चंपत राय ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में बताया कि यह परिक्रमा भी 84 कोसी की तर्ज पर 22 सितंबर से 13 अक्टूबर 20 दिन चलेगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपने वचनों का ध्यान रखते हुए अयोध्या के स्थल को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समाज को सौंपने का फैसला करना चाहिए। अगर उसे लगता है कि इसके लिए कानून बनाना जरूरी है तो उसे कानून बनाना चाहिए।
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चंपत राय ने बताया कि यह पंचकोसी परिक्रमा दक्षिण के संत करेंगे। जिसमें हैदराबाद के संत प्रमुख होंगे। प्रतिदिन पांच संत परिक्रमा करेंगे। जिनके साथ 70-80 स्थानीय लोग होंगे। परिक्रमा की पूरी अवधि 20 दिन तक अयोध्या स्थित कारसेवकपुरम में यज्ञ भी चलेगा।
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आंध्र के पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व संत शंकर देव जी महराज करेंगे। राय ने दावा किया कि संतों की 84 कोसी परिक्रमा सफल रही। सरकार की तमाम चौकसी के बावजूद ऋषिकेश के संत डॉ. रामेश्वर दास वैष्णव मखौड़ा पहुंच गए और उन्होंने हवन-पूजन कर परिक्रमा को पूर्ण किया।
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने तर्क दिया कि जिस समय कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी पर अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा होती है। उस समय दक्षिण में भी कुछ धार्मिक यात्राएं होती हैं। इस कारण दक्षिण खासतौर से आंध्र के संत अयोध्या नहीं आ पाते। उन्होंने इसका विकल्प निकालने का अनुरोध किया था, जिस पर यह परिक्रमा तय की गई है।