{"_id":"61897801582ff56cbe460a33","slug":"very-tough-language-in-form-6-to-become-a-voter-lucknow-news-lko603557651","type":"story","status":"publish","title_hn":"मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 की कठिन भाषा और अशुद्ध शब्दों के चक्कर में भ्रमित हो रहे आवेदक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 की कठिन भाषा और अशुद्ध शब्दों के चक्कर में भ्रमित हो रहे आवेदक
विज्ञापन
फार्म-6 की जटिल भाषा से परेशान हैं मतदाता बनने के लिए आवेदन करने वाले। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नए मतदाता बनने के लिए या फिर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, कटवाने या संशोधन के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से खूब प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
इसे लेकर खासकर नए मतदाता बनने के लिए युवाआें में भी जोश है। ...लेकिन जब ये युवा आवेदन करने के लिए फॉर्म-6 अपने हाथ में लेते हैं तो इसे पढ़कर सिर चकरा रहा है।
बेहद कठिन हिंदी भाषा के साथ कई बेमेल और अटपटे शब्दों से आमजन भी परेशान हो रहे हैं।
निर्वाचन आयोग ने 18 के हो चुके हरेक व्यक्ति को वोटर बनाने के लिए मतदान केंद्रों पर नवंबरभर आवेदन फॉर्म भरकर जमा कराने की व्यवस्था कराई है।
विशेष कैंप हो रहे हैं, लेकिन आवेदन फॉर्म की भाषा बाधा बन रही है। माता, पिता या पति, पत्नी का नाम नातेदार के रूप में पूछा गया है।
आवेदक जब नातेदार का मतलब नहीं समझ पाता तो बीएलओ बताते हैं कि इसका आशय अभिभावक से है।
यही नहीं, आवेदक से वर्तमान पता जानने के लिए पूछा जाता है कि ‘जिसका आवेदक मामूली तौर पर निवासी है।’ आवेदक के पूछने पर बीएलओ बताता है कि इसका मतलब है अस्थायी पता है।
घोषणापत्र पढ़कर चकरा रहे आवेदक
‘मैं इस बात से भिज्ञ हूं कि ऐसा कथन या घोषणा करना, जो मिथ्या है, जिसके प्रति मैं यह जानता हूं या विश्वास करता हूं कि वह मिथ्या है या उसके सत्य होने का मुझे विश्वास नहीं है, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की धारा 31 के अधीन दंडनीय है।’ यह घोषणा नए मतदाता बनने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-6 की है। इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल अन्य आवेदन पत्रों में भी है। फॉर्म-6 के साथ आयु का प्रमाण पत्र न होने पर भराए जाने वाले अनुबंध पत्र पर मोटे काले अक्षरों में शीर्षक है - ‘शपथ या प्रतिज्ञान का प्रारूप’।
विज्ञापन
बीएलओ ने कराए हस्ताक्षर और खुद ही भरा फॉर्म
एक केंद्र पर नए आवेदन करने आए 12वीं के छात्र आर्यन सिंह ने कहा कि आवेदन पत्र बड़ा व जटिल भाषा में है। इसे सरल व छोटा किया जाना चाहिए। आवेदन पत्र में कई कॉलम समझ नहीं आ रहे थे। बीएलओ ने जरूरी कागज लिए और हस्ताक्षर करा खुद फॉर्म भर लिया।
सरल होनी चाहिए आवेदन पत्र की भाषा
आवेदन पत्र में सरल भाषा हो तो आमजन अच्छे से समझ सकेंगे। नातेदार के स्थान पर अभिभावक/संरक्षक लिखा जाए। इसी तरह निर्वाचक नामावली के स्थान पर वोटर लिस्ट लिखा जा सकता है। आवेदन पत्र पर प्ररूप भी गलत शब्द दर्ज है, उसे प्रारूप लिखा जाना चाहिए। इसी तरह ‘शपथ या प्रतिज्ञान का प्ररूप’ में प्ररूप के अलावा प्रतिज्ञान भी गलत है। प्रतिज्ञान का मतलब होता है ‘किसी के संबंध में जानकारी होना’। यहां चूंकि शपथ पत्र की बात है, इसलिए इसमें प्रतिज्ञान शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
- प्रेमशंकर शास्त्री, प्रवक्ता हिंदी, महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज, मोतीनगर
विज्ञापन
इसे लेकर खासकर नए मतदाता बनने के लिए युवाआें में भी जोश है। ...लेकिन जब ये युवा आवेदन करने के लिए फॉर्म-6 अपने हाथ में लेते हैं तो इसे पढ़कर सिर चकरा रहा है।
बेहद कठिन हिंदी भाषा के साथ कई बेमेल और अटपटे शब्दों से आमजन भी परेशान हो रहे हैं।
निर्वाचन आयोग ने 18 के हो चुके हरेक व्यक्ति को वोटर बनाने के लिए मतदान केंद्रों पर नवंबरभर आवेदन फॉर्म भरकर जमा कराने की व्यवस्था कराई है।
विशेष कैंप हो रहे हैं, लेकिन आवेदन फॉर्म की भाषा बाधा बन रही है। माता, पिता या पति, पत्नी का नाम नातेदार के रूप में पूछा गया है।
आवेदक जब नातेदार का मतलब नहीं समझ पाता तो बीएलओ बताते हैं कि इसका आशय अभिभावक से है।
यही नहीं, आवेदक से वर्तमान पता जानने के लिए पूछा जाता है कि ‘जिसका आवेदक मामूली तौर पर निवासी है।’ आवेदक के पूछने पर बीएलओ बताता है कि इसका मतलब है अस्थायी पता है।
विज्ञापन
घोषणापत्र पढ़कर चकरा रहे आवेदक
‘मैं इस बात से भिज्ञ हूं कि ऐसा कथन या घोषणा करना, जो मिथ्या है, जिसके प्रति मैं यह जानता हूं या विश्वास करता हूं कि वह मिथ्या है या उसके सत्य होने का मुझे विश्वास नहीं है, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (1950 का 43) की धारा 31 के अधीन दंडनीय है।’ यह घोषणा नए मतदाता बनने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-6 की है। इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल अन्य आवेदन पत्रों में भी है। फॉर्म-6 के साथ आयु का प्रमाण पत्र न होने पर भराए जाने वाले अनुबंध पत्र पर मोटे काले अक्षरों में शीर्षक है - ‘शपथ या प्रतिज्ञान का प्रारूप’।
विज्ञापन
बीएलओ ने कराए हस्ताक्षर और खुद ही भरा फॉर्म
एक केंद्र पर नए आवेदन करने आए 12वीं के छात्र आर्यन सिंह ने कहा कि आवेदन पत्र बड़ा व जटिल भाषा में है। इसे सरल व छोटा किया जाना चाहिए। आवेदन पत्र में कई कॉलम समझ नहीं आ रहे थे। बीएलओ ने जरूरी कागज लिए और हस्ताक्षर करा खुद फॉर्म भर लिया।
सरल होनी चाहिए आवेदन पत्र की भाषा
आवेदन पत्र में सरल भाषा हो तो आमजन अच्छे से समझ सकेंगे। नातेदार के स्थान पर अभिभावक/संरक्षक लिखा जाए। इसी तरह निर्वाचक नामावली के स्थान पर वोटर लिस्ट लिखा जा सकता है। आवेदन पत्र पर प्ररूप भी गलत शब्द दर्ज है, उसे प्रारूप लिखा जाना चाहिए। इसी तरह ‘शपथ या प्रतिज्ञान का प्ररूप’ में प्ररूप के अलावा प्रतिज्ञान भी गलत है। प्रतिज्ञान का मतलब होता है ‘किसी के संबंध में जानकारी होना’। यहां चूंकि शपथ पत्र की बात है, इसलिए इसमें प्रतिज्ञान शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
- प्रेमशंकर शास्त्री, प्रवक्ता हिंदी, महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज, मोतीनगर