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जिला स्तरीय अस्पतालों में भी मिलेगी वेंटिलेटर सुविधा, एसजीपीजीआई तैयार करेगा क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ
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जिला स्तरीय अस्पतालों में भी मिलेगी वेंटिलेटर सुविधा, एसजीपीजीआई तैयार करेगा क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ
राजधानी के तीन अस्पतालों सहित 35 मंडलीय अस्पतालों में जल्द ही वेंटिलेटर सुविधा शुरू हो जाएगी। इन अस्पतालों में कोविड काल में वेंटिलेटर भेजे जा चुके हैं। अब क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तैयार किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ तैयार करने की जिम्मेदारी एसजीपीजीआई को सौंपी गई है। इन अस्पतालों में कहीं पांच तो कहीं सात वेंटिलेटर हैं जो कोरोना काल में भेजे गए हैं। इससे करीब 200 वेंटिलेटर की सुविधा बढ़ जाएगी।
सिविल अस्पताल, बलरामपुर और लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय सहित अन्य चिकित्सालयों में कोरोना काल के दौरान वेंटिलेटर भेजे गए थे। कुल करीब 427 वेंटिलेटर भेजे गए हैं। लेकिन क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से वेंटिलेटरों का संचालन सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। पहले योजना थी कि हर अस्पताल में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ अलग से नियुक्त किए जाएंगे। लेकिन विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए तय किया गया है कि अस्पातलों में मौजूद एनेस्थेसिस्ट को क्रिटिकल केयर का प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा सकता है। पहले चरण में करीब 200 वेंटिलेटर चलाने की योजना बनाई गई है। इसमें राजधानी के तीनों अस्पतालों के साथ ही अन्य मंडल स्तरीय 32 अस्पताल शामिल किए गए हैं। चिकित्सा महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मंडलीय अस्पतालों में वेंटिलेटर सुविधा हो जाएगी। इससे राजधानी के अस्पतालों पर गंभीर मरीजों का दबाव कम होगा।
वेंटिलेटर के लिए रहती है मारामारी
अभी तक जिला स्तरीय अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। कुछ मंडलीय अस्पतालों में वेंटिलेटर हैं, लेकिन उसे चलाने के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में मरीजों की स्थिति गंभीर होते ही वेंटिलेटर की जरूरत बताकर रेफर कर दिया जाता है। विभिन्न जिलों से आने वाले मरीज राजधानी के चिकित्सा संस्थानों में वेंटिलेटर के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं। फिलहाल केजीएमयू में करीब 300, एसजीपीजीआई में 200, लोहिया संस्थान में करीब 50 वेंटिलेटर हैं। इसके अलावा कोविड काल में करीब 200 पोर्टेबल वेंटिलेटर भी अस्पतालों को दिए गए हैं।
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राजधानी के तीन अस्पतालों सहित 35 मंडलीय अस्पतालों में जल्द ही वेंटिलेटर सुविधा शुरू हो जाएगी। इन अस्पतालों में कोविड काल में वेंटिलेटर भेजे जा चुके हैं। अब क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तैयार किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ तैयार करने की जिम्मेदारी एसजीपीजीआई को सौंपी गई है। इन अस्पतालों में कहीं पांच तो कहीं सात वेंटिलेटर हैं जो कोरोना काल में भेजे गए हैं। इससे करीब 200 वेंटिलेटर की सुविधा बढ़ जाएगी।
सिविल अस्पताल, बलरामपुर और लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय सहित अन्य चिकित्सालयों में कोरोना काल के दौरान वेंटिलेटर भेजे गए थे। कुल करीब 427 वेंटिलेटर भेजे गए हैं। लेकिन क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से वेंटिलेटरों का संचालन सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। पहले योजना थी कि हर अस्पताल में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ अलग से नियुक्त किए जाएंगे। लेकिन विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए तय किया गया है कि अस्पातलों में मौजूद एनेस्थेसिस्ट को क्रिटिकल केयर का प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा सकता है। पहले चरण में करीब 200 वेंटिलेटर चलाने की योजना बनाई गई है। इसमें राजधानी के तीनों अस्पतालों के साथ ही अन्य मंडल स्तरीय 32 अस्पताल शामिल किए गए हैं। चिकित्सा महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मंडलीय अस्पतालों में वेंटिलेटर सुविधा हो जाएगी। इससे राजधानी के अस्पतालों पर गंभीर मरीजों का दबाव कम होगा।
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वेंटिलेटर के लिए रहती है मारामारी
अभी तक जिला स्तरीय अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। कुछ मंडलीय अस्पतालों में वेंटिलेटर हैं, लेकिन उसे चलाने के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में मरीजों की स्थिति गंभीर होते ही वेंटिलेटर की जरूरत बताकर रेफर कर दिया जाता है। विभिन्न जिलों से आने वाले मरीज राजधानी के चिकित्सा संस्थानों में वेंटिलेटर के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं। फिलहाल केजीएमयू में करीब 300, एसजीपीजीआई में 200, लोहिया संस्थान में करीब 50 वेंटिलेटर हैं। इसके अलावा कोविड काल में करीब 200 पोर्टेबल वेंटिलेटर भी अस्पतालों को दिए गए हैं।
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