वाराणसी उत्तर : भाजपा-सपा में कांटे की टक्कर, आमने-सामने की लड़ाई में मुद्दों की धार हुई कुंद
भाजपा हो या सपा, कांग्रेस हो या बसपा, सभी की नजरें शहर उत्तरी सीट पर गड़ी हुई हैं। यहां सभी का जोर ध्रुवीकरण पर है। यहां चार प्रमुख दलों में दो दलों ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं।
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भाजपा हो या सपा, कांग्रेस हो या बसपा, सभी की नजरें शहर उत्तरी सीट पर गड़ी हुई हैं। यहां सभी का जोर ध्रुवीकरण पर है। यहां चार प्रमुख दलों में दो दलों ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। भाजपा ने दो बार से जीत दर्ज करने वाले वर्तमान में राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल पर भरोसा जताया है। सपा से अशफाक अहमद डबलू तो कांग्रेस से गुलेराना तबस्सुम किस्मत आजमा रही हैं।
यहां भाजपा और सपा के बीच सीधी लड़ाई मानी जा रही है। रविंद्र जायसवाल दो बार से लगातार जीत दर्ज कर चुके हैं। वे प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री हैं। वहीं, सपा प्रत्याशी अशफाक अहमद भी पहले विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर सपा ने भी मुस्लिम मतदाताओं का वोट सहेजने का दांव चला है।
शहर उत्तरी विधानसभा सीट पर 1980 के बाद कांग्रेस सूखा झेल रही है। इस सीट के सियासी मिजाज की बात करें तो तीन बार भारतीय जनसंघ और पांच बार भाजपा ने कब्जा जमाया है। पांच बार कांग्रेस और 1996 से 2007 तक चार बार समाजवादी पार्टी ने भी जीत दर्ज की। सपा के काबिज होने की वजह से यह सपा की पक्की सीट मानी जाती रही है। मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता इसके पीछे एक प्रमुख वजह रही है। पर, 2012 में यहां के सियासी मिजाज में एक बार फिर बदलाव आया और सपा की लहर के दौरान यहां रविंद्र जायसवाल ने भगवा परचम फहरा दिया। 2017 में भी जायसवाल यहां कमल खिलाने में कामयाब रहे। हालांकि, अब बदले माहौल में रविंद्र को सपा से कड़ी चुनौती मिल रही है।
वैश्य 1 लाख
क्षत्रिय 40 हजार
मुस्लिम 70 हजार
ब्राह्मण 60 हजार
2017 का चुनाव परिणाम
रविंद्र जायसवाल, भाजपा 1,16,017
अब्दुल समद अंसारी, कांग्रेस 70,515
सुजीत कुमार, बसपा 32,574