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क्या उत्तराखंड का फार्मूला यूपी में हिट होगा?
महेंद्र तिवारी/ अमर उजाला,लखनऊ
Updated Tue, 11 Feb 2014 09:22 AM IST
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प्रदेश सरकार सीजनल संग्रह अमीनों को संग्रह अमीनों के रिक्त पद पर समायोजित करने के लिए उत्तराखंड फार्मूला अपना सकती है।
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राजस्व विभाग इसमें काफी हद तक सहमत भी नजर आ रहा है। पर वित्त विभाग के अड़ियल रुख की वजह से सीजनल संग्रह अमीनों का भविष्य अधर में है।
प्रदेश सरकार संग्रह अमीनों के रिक्त पदों पर सीजनल संग्रह अमीनों से राजस्व वसूली का काम करवा रही है।
इनकी नियुक्ति 89-89 दिनों के लिए करते हुए बढ़ाई जाती रहती है। इस समय राजस्व विभाग में संग्रह अमीनों के करीब 3257 पद खाली हैं।
करीब इतने ही सीजनल संग्रह अमीन कई साल से वसूली से कर रहे हैं। सीजनल संग्रह अमीन इन रिक्त पदों पर समायोजन की मांग को लेकर कई बार आंदोलन कर चुके हैं।
मामला मुख्य सचिव से होते हुए मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने दूसरे प्रदेशों की वसूली व्यवस्था का अध्ययन कर समायोजन प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
विभाग ने राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा व उत्तराखंड की वसूली व्यवस्था का अध्ययन कराया। पता चला कि उत्तराखंड में भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी।
वहां की सरकार ने सीजनल संग्रह अमीनों के समायोजन के लिए एक बार के लिए संग्रह अमीन के समस्त रिक्त पद उपलब्ध कराने का आदेश दे दिया। साथ ही आवश्यक पदों की संख्या बढ़ा भी दी।
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अगस्त 2013 में यह फार्मूला सामने आने के बाद राजस्व विभाग ने नियमावली में संशोधन करने के लिए कुल पदों का 85 प्रतिशत पद सीजनल संग्रह अमीनों से भरने का प्रस्ताव किया।
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पहले 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती, 35 प्रतिशत सामयिक संग्रह अमीन व 15 प्रतिशत संग्रह अनुसेवकों से भरने की व्यवस्था थी। मगर प्रमुख सचिव वित्त ने नियमावली में इस तरह के बदलाव के प्रस्ताव पर आपत्ति लगा दी।
मामला मुख्य सचिव के पास गया तो उन्होंने इस पर पुनर्विचार का निर्देश दिया। प्रमुख सचिव वित्त ने इस बार समस्त कैडर से इस तरह की आने वाली मांगों का हवाला देकर फिर से असहमति दर्ज कर दी। अब मामला उलझ गया है।