यूपी में 'केजी टू पीजी स्कीम' लागू करने की तैयारी में सरकार, छात्रों को मिलेगी निशुल्क शिक्षा
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योगी सरकार उत्तर प्रदेश में ग्रामीण छात्रों को केजी से लेकर पीजी (स्नातकोत्तर) तक निशुल्क शिक्षा देने की तैयारी कर रही है। उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने इसका ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बृहस्पतिवार को शिक्षाविदों की कमेटी बनाई है।
यह कमेटी एक-दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट पर सरकार में विचार-विमर्श के बाद इसे संभवत: अगले वर्ष से लागू किया जा सकता है। प्रदेश में अभी 12वीं तक की शिक्षा नि:शुल्क है। यानी उनसे स्कूल फीस नहीं ली जाती है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि सरकार का मानना है कि गांवों में भी कमजोर वर्ग का बच्चा केजी से सरकारी स्कूल में दाखिला ले। सरकारी स्कूलों में उसे निजी स्कूलों की तरह बेहतर माहौल और गुणवत्तापरक शिक्षा मिले ताकि वह सरकारी कॉलेज से पीजी करके ही निकले।
उन्होंने कहा कि केजी टू पीजी स्कीम के तहत राजकीय महाविद्यालयों में कमजोर वर्ग के ग्रामीण छात्रों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। प्रदेश में बेसिक शिक्षा से लेकर स्नातकोत्तर तक एजुकेशनल हब बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
सभी विश्वविद्यालयों में एक समान शैक्षिक कैलेंडर लागू
उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश में सभी राजकीय विश्वविद्यालयों में एक शैक्षिक कैलेंडर लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालयों में 10 जुलाई से नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। उच्च शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों में 5 मार्च से 30 अप्रैल तक परीक्षाएं आयोजित करा 5 जून तक परिणाम जारी किया जाएगा।
वहीं, सेमेस्टर आधारित पाठ्यक्रम में नवंबर के चौथे हफ्ते से ऑड सेमेस्टर और 10 मई तक इवेन सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू की जाएंगी। सभी विश्वविद्यालयों में 15 मई से ग्रीष्मावकाश शुरू होगा। सभी विश्वविद्यालयों में सितंबर-अक्तूबर में दीक्षांत समारोह आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालयों में पीएचडी के लिए कॉमन ऑर्डिनेंस तैयार करने को लखनऊ, फैजाबाद, कानपुर, आगरा और एकेटीयू के कुलपति की कमेटी गठित की गई है।
छात्रों और शिक्षकों का डाटा बैंक तैयार होगा
उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों और शिक्षकों का डाटा बैंक तैयार कर उसे आधार से लिंक किया जाएगा।
सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेजों पर भी लगाम कसेंगे : स्कूलों में फीस नियंत्रण कानून की तर्ज पर अब सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेजों में भी फीस वसूली पर लगाम लगाई जाएगी। साथ ही उन्होंने महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव पर कुलपतियों से मौखिक रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही छात्रसंघ चुनाव पर निर्णय लिया जाएगा।