फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Uttar Pradesh government presents 2014-15 budget

जानिए, सबसे बडे़ राज्य में कैसे बनता है बजट

Mon, 10 Feb 2014 02:33 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 10 Feb 2014 02:33 PM IST
विज्ञापन
Uttar Pradesh government presents 2014-15 budget

आप अंदाजा लगाइए, यदि किसी सरकार का बजट सदन में पेश होने से पहले ही ‘लीक’ हो जाए तो उस सरकार की क्या हालत होगी? अगर सरकार की नई लोकप्रिय योजनाएं पहले ही पता चल जाएं तो बजट का आकर्षण ही क्या रह जाएगा?

विज्ञापन


ऐसे हालात में सदन के नजारे और विपक्ष के तेवर की कल्पना भर की जा सकती है। मगर यह जानकर सुकून महसूस किया जा सकता है कि जिस बजट की गोपनीयता के लिए केंद्र सरकार अपने बजट स्टाफ को 10 दिन तक ‘कैद’ (बजट छपाई से पेश होने तक एक भवन में रहना अनिवार्य) कर देती है, यूपी की पूरी बजट तैयारी यहां के स्टाफ की सत्यनिष्ठा पर परवान चढ़ रही है।
विज्ञापन

अब तक नहीं उठा कोई सवाल

Uttar Pradesh government presents 2014-15 budget

यूपी में बजट सत्र 19 फरवरी से शुरू हो रहा है। 21 फरवरी को बजट व लेखानुदान पेश होने की संभावना है। यूपी के बजट की पूरी तैयारी विधान भवन में नवीन भवन के दो कमरों तक केंद्रित रहती है।

कक्ष संख्या-84 और उससे सटे कंप्यूटर कक्ष में कई बार यह माथापच्ची आधी रात के बाद तक जारी रहती है। शासन के बजट अनुभाग और बजट निदेशालय के करीब 25 से 30 अफसरों व कर्मचारियों की टीम बजट तैयार करती है। लेकिन वास्तव में बजट में क्या आ रहा है, यह जानने वाले पांच-छह लोग ही होते हैं।

बजट से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि सूबे के संसदीय इतिहास में आज तक कभी ऐसा मौका नहीं आया जब बजट की पवित्रता पर कोई सवाल उठा हो। बजट से जुड़े हर स्टाफ को पता होता है कि यह किसी भी सरकार का दृष्टिपत्र है, सदन के पटल पर आने से पहले इसकी गोपनीयता भंग नहीं होनी चाहिए। इस काम से जुड़ा हर व्यक्ति अपना बजट धर्म बड़ी ईमानदारी से निभाता आया है।

बजट कोई पढ़े, दिमाग होता है इनका

Uttar Pradesh government presents 2014-15 budget

बजट से वाहवाही मिलेगी या आलोचना, यह तो सरकार के खाते में जाता है। मगर इसकी तैयारी में पर्दे के पीछे कुछ ऐसे चेहरे हैं जो सूबे के बजट के पर्याय बन गए हैं। विभाग के मुखिया आते-जाते रहे हैं, मगर ये चेहरे रिटायरमेंट के बाद भी बजट की पहचान बने हैं। विभागीय मुखिया के नाते प्रमुख सचिव वित्त आनंद मिश्र व सचिव वित्त मुकेश मित्तल की खास भूमिका है ही, मगर बजट को शक्ल देने में जो पहला नाम आता है वह है सचिव वित्त बीएम जोशी का।

एक दशक से ज्यादा हुए सूबे के बजट की तैयारी का दारोमदार जोशी निभा रहे हैं। जोशी 2002 में रिटायर हो गए लेकिन सरकार लगातार उन्हें पुनर्नियुक्ति देकर बजट से जोड़े हुए है। जोशी का साथ दे रहे हैं विशेष सचिव एवं बजट सलाहकार लहरी यादव। यादव बजट तैयारी से 2001 से जुड़े हैं। मगर 2011 में रिटायर होने के बाद भी सरकार ने इन्हें सेवा से जाने नहीं दिया।

यादव भी पुनर्नियुक्ति केसाथ बजट का चेहरा गढ़ने में जुटे हैं। खास बात यह कि चाहे सपा सरकार रही हो या बसपा, रिटायरमेंट केबाद इन दोनों अफसरों का विकल्प कोई भी सरकार ढूंढ नहीं पाई। बजट तैयारी में जिन अन्य लोगों की मुख्य भूमिका है उनमें विशेष सचिव वित्त नीलरतन कुमार व उप सचिव आलोक दीक्षित का नाम शामिल है।

विज्ञापन

इस तरह बरती जाती है गोपनीयता

Uttar Pradesh government presents 2014-15 budget

प्रदेश में बजट की तैयारी तो सितंबर से शुरू हो जाती है मगर काम में तेजी दिसंबर से आती है। विभागों से सूचनाएं जुटाने का काम जैसे-जैसे पूरा होता जाता है, वैसे-वैसे बजट में स्टाफ की संख्या सीमित होने लगती है।

अंत में कुल जमा पांच से छह लोग ही होते हैं जिनके पास इसकी पूरी जानकारी होती है। गोपनीयता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि कैबिनेट से बजट के अप्रूवल की कार्रवाई भी आम प्रस्तावों की तरह न होकर हाथों हाथ पूरी कराई जाती है।

छपाई का काम राजकीय प्रेस ऐशबाग में इसके पेश होने के दो- तीन दिन पहले होता है। बजट की सीलबंद प्रति प्रेस को विशेष वाहक के जरिये तमाम एहतियात बरतते हुए भेजी जाती है। राजकीय प्रेस पर सुरक्षा का पहरा होता है।

बजट छपाई के लिए बेहद भरोसेमंद स्टाफ लगाए जाते हैं और कोई वरिष्ठ बजट अधिकारी इसकी निगरानी करता है। प्रेस से बजट की छपी प्रतियां बजट वाले दिन सुबह कड़े सुरक्षा घेरे में लाई जाती हैं। स्टाफ के लोग तभी चैन की सांस ले पाते हैं जब सदन में वित्त मंत्री इसे पेश कर देते हैं।

'उठा सकते हैं लोग गलत फायदा'

Uttar Pradesh government presents 2014-15 budget

केंद्र में बजट को लेकर जो परम गोपनीयता बरती जाती है वह ‘टैक्स’ की वजह से है। सरकार किस टैक्स में कटौती करने वाली है या बढ़ाने वाली है, अथवा नया टैक्स लगाने वाली है, यह केंद्रीय बजट का मुख्य आकर्षण होता है। बजट से पहले टैक्स की जानकारी सामने आ जाने से लोग उसका गलत फायदा उठा सकते हैं। प्रदेश के बजट में नए टैक्स जैसी बात नहीं होती। इसलिए यहां उस स्तर की गोपनीयता नहीं होती। इसके बावजूद इसकी गोपनीयता को लेकर पूरी सतर्कता बरती जाती है।
- वीके मित्तल, पूर्व प्रमुख सचिव वित्त एवं मुख्य सचिव

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed