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यूपी कैबिनेट ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे निर्माण को दी मंजूरी, 30 महीनों में बनकर तैयार होगा प्रोजेक्ट

Wed, 18 Apr 2018 02:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 18 Apr 2018 02:10 AM IST
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Uttar Pradesh government approves the express way project.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण अगले माह से शुरू हो जाएगा। इसके लिए कैबिनेट ने मंगलवार को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) यानी फाइनेंशियल बिड के मसौदे को मंजूरी दे दी है। सपा शासन में इस परियोजना की स्वीकृत सिविल लागत को 1559.97 करोड़ रुपये कम किया गया है। अब इसके सिविल वर्क पर 11800.56 करोड़ रुपये खर्च होंगे। निर्माण कार्य 30 महीनों में पूरा करना होगा।

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राज्य सरकार के प्रवक्ता और मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण आठ पैकेज में होगा। आमंत्रित की गई रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (टेक्निकल बिड) में 12 कॉन्ट्रैक्टर आए थे। अब इनसे फाइनेंशियल बिड आमंत्रित की जाएगी। सपा सरकार में इस प्रोजेक्ट की सिविल वर्क की कीमत 13360.53 करोड़ रुपये थी, जिसे घटाकर 11800.56 करोड़ रुपये पर लाया गया है। यह तब भी संभव हो सका, जब मौजूदा सरकार ने एक्सप्रेस-वे से गोरखपुर और इलाहाबाद को जोड़ने का फैसला भी किया है।
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उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लिए 413 गांवों की अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन में से 90.9 प्रतिशत का अधिग्रहण हो गया है। जमीन 120 मीटर की चौड़ाई में ली गई है। उन्होंने बताया कि जमीन की कीमत, सेंटेज, जीएसटी और यूटिलिटी शिफ्टिंग को मिलाकर इस प्रोजेक्ट की कुल कीमत 23349.37 करोड़ रुपये है। इसमें से राज्य सरकार ने 4677.25 करोड़ रुपये दे दिया है।
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हुडको से 1179 करोड़ रुपये की बतौर ऋण व्यवस्था हुई है। साथ ही 1000 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान है। शेष राशि एशियन डवलपमेंट बैंक और जीका सरीखी संस्थाओं से लोन लेकर जुटाई जाएगी। 8.25 फीसदी फ्लोटिंग रेट पर तीन साल तक ब्याज राज्य सरकार चुकाएगी। भुगतान तिमाही आधार पर किया जाएगा। बाजार से ऋण लेने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है, जो एक माह में रिपोर्ट देगी।

यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी ने बताया कि 30 अप्रैल को फाइनेंशियल बिड आमंत्रित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे 38 महीने में बनकर तैयार हुआ था, पर इस प्रोजेक्ट को 30 महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा किया जाएगा। फाइनेंशियल बिड फाइनल होने के बाद अगले महीने काम शुरू हो जाएगा। इस परियोजना से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लगभग दस हजार लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

मोहिउद्दीनपुर चीनी मिल की 60 करोड़ रुपये सीसीएल को मंजूरी

Uttar Pradesh government approves the express way project.

कैबिनेट ने मोहिउद्दीनपुर चीनी मिल के किसानों के हित में बड़ा फैसला किया है। इंडियन बैंक की गोमती नगर स्थित शाखा से 60 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) के लिए प्रदेश सरकार की शासकीय गारंटी के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यह सीसीएल वर्ष 2017-18 में उत्पादित 4.004 लाख क्विंटल चीनी को बंधक रखकर ली गई है।

इस राशि से गन्ना मूल्य और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जाएगा। प्रवक्ता ने बताया कि अब तक राज्य सरकार 19275 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी है, जबकि पिछली साल इस अवधि तक 14 हजार करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था।

जिला उद्यान अधिकारी के 50 फीसदी पद सीधी भर्ती व बाकी पदोन्नति से भरे जाएंगे
कैबिनेट ने उप्र. उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण सेवा नियमावली में बदलाव कर दिया है। यह सेवा नियमावली 1993 में बनी थीं, जिसमें कई विसंगतियां थीं। उत्तराखंड के गठन के कारण अब पर्वतीय क्षेत्र के पदों को खत्म कर दिया गया है। साथ ही वेतन समिति 2008 के निर्णयों को लागू करने का भी फैसला किया गया है।

सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि समूह क और ख के 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से आयोग के माध्यम से भरे जाएंगे, जबकि शेष 50 फीसदी पद डीपीसी के जरिए पदोन्नति देकर भरे जाएंगे। समूह ख के 50 फीसदी पद भी समूह ग से पदोन्नति के आधार पर भरे जाएंगे। इसके लिए उप्र. उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण समूह-‘ख’ सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली-2018 जारी करने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

अमेठी में चिकित्सा विभाग के भवनों को ध्वस्त करने को मंजूरी

Uttar Pradesh government approves the express way project.

अमेठी में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के रिहायशी और गैर रिहायशी भवनों के ध्वस्तीकरण के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि मुसाफिरखाना में ट्रामा सेंटर के भवन के निर्माण के लिए पुरानी पीएचसी मुसाफिर खाना का मुख्य भवन, परिवार कल्याण भवन, चिकित्साधिकारी आवास, श्रेणी-2 आवास व श्रेणी-1 आवास को ध्वस्त किया जाएगा।

जगदीशपुर ब्लॉक पर एनएनएम टीसी भवन निर्माण के लिए पुराना पीएचसी, जगदीशपुर से संबंधित अनावासीय भवन, प्रभार चिकित्साधिकारी आवास, चिकित्साधिकारी आवास, श्रेणी-2 आवास और श्रेणी-1 के आवास ध्वस्त किए जाएंगे। इसी तरह से अमेठी में प्रस्तावित 30 शैय्या मैटरनिटी विंग के भवन निर्माण के लिए पुरानी पीएचसी जामों परिसर के मुख्य भवन, प्रभारी चिकित्साधिकारी आवास, चिकित्साधिकारी आवास और श्रेणी-1 आवास भवनों के ध्वस्तीकरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।

पॉलीटेक्निक में लागू होंगी एआईसीटीई की सिफारिशें
प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थाओं में अब ‘अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद’ (एआईसीटीई) की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। इसी आधार पर प्रवक्ता समेत अन्य शिक्षकों के वेतन का निर्धारण होगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह फैसला हाईकोर्ट के निर्देश के मद्देनजर किया गया है।

प्रस्ताव के मुताबिक अब प्रवक्ता, विभागाध्यक्ष, कर्मशाला अधीक्षक, प्रधानाचार्य और पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन-भत्ते उनकी अर्हता के हिसाब से तय होंगे। इसके मुताबिक प्रवक्त्ताओं व कर्मशाला अधीक्षकों का वेतनमान 15600 से 39100 और ग्रेड वेतन 5400 हो जाएगा।

विभागाध्यक्ष का वेतनमान 37400 से 67000 व ग्रेड वेतन 9000, जबकि प्रधानाचार्य का वेतनमान 37400 से 67000 व ग्रेड वेतन 10000 होगा। साथ ही 2000 रुपये विशेष भत्ता भी दिया जाएगा। इसी तरह पुस्तकालयाध्यक्ष का वेतनमान 15600 -39100 व ग्रेड वेतन 5400 होगा।

10 लाख रुपये तक के काम ई-टेंडरिंग से मुक्त

Uttar Pradesh government approves the express way project.

अब प्रदेश में 10 लाख रुपये तक के कामों के लिए ई-टेंडरिंग की जरूरत नहीं होगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। दरअसल, सभी विभागों में निर्माण कार्यों, सेवाओं, जॉब वर्क, सामग्री खरीद, चालू और दर अनुबंध के लिए मई-2017 से ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू की गई है। एक सितंबर 2017 से इसे अनिवार्य कर दिया गया था। वित्त विभाग के पूर्व के जारी आदेश के मुताबिक एक लाख रुपये से अधिक मूल्य के सामान और सेवाओं के लिए निविदाएं ई-टेंडरिंग से आमंत्रित की जाएंगी। लेकिन अब इस सीमा को बढ़ाकर एक लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।

पॉलीटेक्निक में लागू होंगी एआईसीटीई की सिफारिशें
प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थाओं में अब ‘अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद’ (एआईसीटीई) की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। इसी आधार पर प्रवक्ता समेत अन्य शिक्षकों के वेतन का निर्धारण होगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह फैसला हाईकोर्ट के निर्देश के मद्देनजर किया गया है।

प्रस्ताव के मुताबिक अब प्रवक्ता, विभागाध्यक्ष, कर्मशाला अधीक्षक, प्रधानाचार्य और पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन-भत्ते उनकी अर्हता के हिसाब से तय होंगे। इसके मुताबिक प्रवक्त्ताओं व कर्मशाला अधीक्षकों का वेतनमान 15600 से 39100 और ग्रेड वेतन 5400 हो जाएगा। विभागाध्यक्ष का वेतनमान 37400 से 67000 व ग्रेड वेतन 9000, जबकि प्रधानाचार्य का वेतनमान 37400 से 67000 व ग्रेड वेतन 10000 होगा। साथ ही 2000 रुपये विशेष भत्ता भी दिया जाएगा। इसी तरह पुस्तकालयाध्यक्ष का वेतनमान 15600 -39100 व ग्रेड वेतन 5400 होगा।

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