अखिलेश बनाएंगे तीन नए मंत्री, किसे मिलेगा चांस?
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नवरात्र में प्रदेश मंत्रिपरिषद के विस्तार की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसकी तारीख हालांकि अभी तय नहीं हुई है लेकिन माना जा रहा है कि पितृपक्ष की समाप्ति के बाद कभी भी दो-तीन नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की भी चर्चाएं हैं।
अखिलेश यादव के मंत्रिपरिषद में फिलहाल चार स्थान खाली हैं। प्रदेश विधानसभा के सदस्यों की संख्या के आधार पर मंत्रियों की संख्या 60 तक हो सकती है, जबकि अभी 56 मंत्री हैं।
लोकसभा चुनाव से पहले आनंद सिंह, मनोज पारस, नरेंद्र सिंह यादव और तेजनारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिए गए थे जबकि शिवाकांत ओझा और यासर शाह को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। सूत्रों का कहना है कि रणनीतिक लिहाज से सरकार सभी खाली स्थानों को नहीं भरेगी। दो-या तीन लोगों को ही शामिल किया जाएगा।
ऐसे शख्स के चांस हैं ज्यादा
चर्चा यह भी चल रही है कि कि विस्तार में विधानसभा उपचुनाव जीतने वाले किसी विधायक को भी मौका दिया जा सकता है।
एक-दो पुराने विधायक पुरस्कृत हो सकते हैं या ऐसे किसी नेता को भी मौका मिल सकता है जो फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं और जिनकी भागीदारी सूबे में सपा के राजनीतिक समीकरण को और बेहतर बना सकती है।
दरअसल, जनवरी में विधानपरिषद की 12 सीटें खाली हो रही हैं। ये सीटें विधायकों के कोटे से भरी जानी हैं। जो सीटें खाली हो रही हैं, उनमें तीन पर सपा, दो पर भाजपा और सात पर बसपा के सदस्य हैं।
सपा अपने विधायकों के आधार पर आठ को परिषद में भेज सकती है। यदि सपा किसी गैरविधायक को मंत्री बनाना चाहेगी तो उसे छह महीने के अंदर परिषद की सदस्यता मिल सकती है।
मीटिंग में भी रही सुगबुगाहट
समाजवादी पार्टी ने सोमवार को सपा मुख्यालय पर उपचुनाव में हारी हुई सीटों की समीक्षा की। इस बैठक में सहारनपुर, नोएडा और लखनऊ सीटों के प्रभारी मंत्रियों, प्रत्याशियों, जिलाध्यक्षों और अन्य नेताओं को बुलाया गया। बैठक में सपा ने उन कारणों को जानना चाहा जिनकी वजह से पार्टी को इन क्षेत्रों को कामयाबी नहीं मिल सकी।
हालांकि, बैठक के दौरान भी यह सुगबुगाहट रही कि जल्द ही मंत्रिपरिषद का विस्तार हो सकता है। कुछ नेताओं ने दबी जुबां में यह बात स्वीकार भी कर ली।
गौरतलब है कि विधानसभा की जिन 11 सीटों पर उपचुनाव हुए थे। ये सीटें वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा ने जीती थी। उपचुनाव में सपा ने भाजपा से आठ सीटें छीन ली लेकिन तीन सीटों सहारपुर, नोएडा और लखनऊ पूरब पर उसे हार का सामना करना पड़ा। इन सीटों में सहारनपुर पर सपा ने अच्छा चुनाव लड़ा। लेकिन सपा उम्मीदवार जीत से काफी दूर रहे।