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कैबिनेट बैठक: विभागों के पुनर्गठन पर मुख्यमंत्री योगी बोले, इसपर अभी और चर्चा की जरूरत

Tue, 02 Jul 2019 10:56 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 02 Jul 2019 10:56 PM IST
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Uttar cabinet meeting may take the decision of reshaping the departments.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को विभागों के पुनर्गठन प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पर और विचार करने की जरूरत बताते हुए केंद्र में बने नए विभागों को ध्यान में रखकर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अगले 10 दिन में संशोधित प्रस्ताव को कैबिनेट के विचार के लिए रखने को कहा गया है।

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राज्य सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नीति आयोग के साथ यहां 10 मई 2017 को एक बड़ी बैठक हुई थी। इसमें नीति आयोग के उपाध्यक्ष व सीईओ के साथ 14 सचिव भी आए थे। 
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इसमें यूपी के विकास की रूपरेखा तय करने के लिए संयुक्त कार्यदल बनाया गया था। इसी बैठक में मंत्रालयों के पुनर्गठन का फैसला हुआ था। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी। 
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सिद्धार्थनाथ ने बताया अग्रवाल समिति के सुझावों पर कैबिनेट में चर्चा हुई, जिसमें यह बात सामने आई कि केंद्र सरकार में जल शक्ति सहित कुछ नए मंत्रालय बने हैं। उन्हें संज्ञान में लेकर पुनर्गठन प्रस्ताव नए सिरे से तैयार कर 10 दिन में फिर कैबिनेट के समक्ष रखा जाए। 

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की तरह योगी सरकार ‘मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्जिमम गवर्नेंस’ के फार्मूले को लागू करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कितने विभाग प्रस्तावित हैं, इस पर चर्चा का महत्व नहीं है। जब नए सिरे से मंत्रालयों के पुनर्गठन का ढांचा तैयार होगा, तब जानकारी दी जाएगी।
 

पुनर्गठन के बाद मंत्रिमंडल विस्तार व बड़े प्रशासनिक फेरबदल के आसार

विभागों व मंत्रालयों के पुनर्गठन की कार्यवाही में जिस तरह तेजी आई है, उससे साफ है कि मंत्रिमंडल का पुनर्गठन इसके बाद ही होगा। कैबिनेट की अगली बैठक में संशोधित पुनर्गठन प्रस्ताव पर निर्णय हो सकता है।

विभागों की संख्या आधे तक सीमित होने के आसार
संजय अग्रवाल समिति में प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार, प्रमुख सचिव गन्ना विकास संजय भूसरेड्डी, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार, सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास संतोष यादव शामिल थे। सचिव नियोजन नीना शर्मा समिति की संयोजक थीं। इस कमेटी ने 95 की जगह 57 विभाग करने का सुझाव दिया था। 

बाद में मुख्यमंत्री के सामने रिपोर्ट के प्रजेंटेशन के बाद विभागों की संख्या 44 तक सीमित करने पर सहमति बन गई थी। हालांकि इसमें भी अग्रवाल समिति की उस सिफारिश को यथावत रखा गया जिसमें शासन स्तर पर कृषि उत्पादन आयुक्त, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, समाज कल्याण आयुक्त व वित्त आयुक्त के पद को बनाए रखते हुए शिक्षा आयुक्त, राजस्व संसाधन आयुक्त व स्वास्थ्य आयुक्त बनाने की संस्तुति की गई थी। 

कैबिनेट के निर्देश के बाद विभागों की संख्या घटने या बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। फिलहाल ये फेरबदल शासन स्तर पर सीमित रहेंगे। निदेशालय व फील्ड स्तर पर इसके बाद विचार की संभावना है।

97 करोड़ से वीवीपैट व 1 करोड़ से ईवीएम भंडारण केंद्र बनाया

निर्वाचन विभाग ने कैबिनेट के सामने वित्तीय वर्ष 2018-19 में एकमुश्त बजट प्रावधान वाली वित्तीय स्वीकृतियां जारी किए जाने का विस्तृत ब्योरा पेश किया। इसके मुताबिक विभाग के पास इस मद के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। वित्त वर्ष के दौरान प्रदेश के 71 जिलों में वीवीपैट के भंडारण के उद्देश्य से वेयरहाउस (गोदाम) के निर्माण के लिए 97 करोड़ 93 लाख 13 हजार रुपये जारी किए गए। इसके अलावा मऊ में 1 करोड़ 7 लाख 25 हजार रुपये ईवीएम भंडारण को गोदाम बनाने के लिए दिए गए।
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