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UP: जिसे समझा कान की बीमारी, वो निकला मस्तिष्क के जाल का जंजाल, चपेट में कई नौकरशाह-डॉक्टर; पढ़ें ऐसा क्यों?

Sat, 07 Feb 2026 09:01 AM IST
आकाश द्विवेदी चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 07 Feb 2026 09:01 AM IST
सार

कानों में सीटी या घंटी की आवाज अब सिर्फ कान की बीमारी नहीं, बल्कि मस्तिष्क के सर्किट असंतुलन से जुड़ी टिनिटस समस्या हो सकती है। सीबीएमआर और पीजीआई के अध्ययन में दिमाग की मैपिंग से इसके कारण सामने आए हैं, जिससे अब सटीक इलाज संभव होगा।

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UP: What was thought to be an ear ailment turned out to be a complex brain disorder... several bureaucrats and
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

अगर आपको कानों में सीटी, घंटी या मक्खी भिनभिनाने की आवाज आए तो इसे सिर्फ कान से जुड़ी बीमारी न समझें। ये दिमाग के सर्किट में गड़बड़ी यानी टिनिटस के संकेत भी हो सकते हैं। इसकी चपेट में कई नौकरशाह, डॉक्टर, व्यापारी और महिलाएं भी हैं। ये जानकारी सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर) और संजय गांधी पीजीआई के अध्ययन में सामने आई है।

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अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय शोधपत्र यूरोपियन जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंसेज में जगह मिला है। अब इस बीमारी के इलाज की नई गाइडलाइन बनाई जा रही है। कान में घंटी बजने या शोर आमतौर पर कान में संक्रमण, सुनने में कमी, ब्लड प्रेशर के कारण होती है। दवाएं चलने पर ये ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ मरीजों को लंबे इलाज के बाद भी आराम नहीं मिलता। चिकित्सा संस्थानों में हर महीने ऐसे 10 से 12 मरीज आते हैं।
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सीबीएमआर के प्रो. उत्तम कुमार के नेतृत्व में टिनिटस पर अध्ययन किया गया। इसमें सेंटर के डॉ. हिमांशु पांडे, प्रो. नीरज सिन्हा और पीजीआई के हेड एंड नेक सर्जरी के विभागाध्यक्ष प्रो. अमित केशरी शामिल रहे। विशेषज्ञों ने 57 टिनिटस और 57 सामान्य मरीज चिह्नित किए। टिनिटस वाले मरीजों पर दवाएं कई साल इलाज के बाद भी बेअसर हो रही थीं।

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की गई दिमाग की मैपिंग

सभी के दिमाग की एमआरआई मशीन से मैपिंग की गई। मस्तिष्क के सक्रिय और शांत अवस्था में लिए गए सर्किट रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया। पाया गया कि सर्किट में बदलावों के कारण टिनिटस की समस्या हो रही है। सर्किट के अलग-अलग बिंदु आपस में प्रतिक्रिया कर कान में आवाजों का आभास दिलाते हैं।

नेटवर्क असंतुलन से बजती है घंटी

प्रो. उत्तम कुमार के मुताबिक, टिनिटस में सर्किट के कुछ हिस्से जैसे स्मृति, भावना, ध्यान व अग्रभाग से जुड़े नेटवर्क असंतुलित हो जाते हैं। इससे आपसी संवाद कम हो जाता है। वहीं, कुछ हिस्सों में सक्रियता बढ़ जाती है। यही असंतुलन टिनिटस को बनाए रखता है।

अब हो सकेगा सटीक इलाज

प्रो. अमित केसरी का कहना है कि अध्ययन से तय हो गया है कि कैसे लक्षण होने पर मस्तिष्क के किस बिंदु पर लक्ष्य करके थेरेपी देनी है। अब मरीजों को मैग्नेटिक थेरेपी, साइको थेरेपी, योग, प्राणायाम समेत मस्तिष्क को आराम देने वाली दवाएं दी जाएंगी।

केस 1

45 वर्ष के शिक्षक को कान में घंटी की आवाज आती थी। उन्होंने नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ को दिखाया। एमआरआई कराई। दो साल तक दवा लेते रहे लेकिन आराम नहीं मिला। पीजीआई में कुछ दिन इलाज के बाद अब आराम है।

केस 2

52 साल के नौकरशाह को तनाव के बाद टिनिटस शुरू हुआ। ईएनटी विशेषज्ञों को दिखाया। एंजायटी की दवा से नींद बेहतर हुई लेकिन आवाज बनी रही। पीजीआई में थेरेपी से समस्या खत्म हो गई है।

केस 3

58 वर्षीय गृहिणी के दोनों कानों में हमेशा शोर महसूस होता था। हियरिंग टेस्ट सामान्य निकला। कई साल तक दवा खाती रहीं लेकिन आराम नहीं मिला। अब साइकोथेरेपी चल रही है।

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