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UP: 30 बिंदुओं पर मेडिकल कॉलेजों की हकीकत परखेंगे आला अफसर, सभी प्रधानाचार्यों को व्यवस्था सुधारने का निर्देश
Fri, 04 Apr 2025 11:06 AM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 04 Apr 2025 11:06 AM IST
सार
यूपी में मेडिकल कॉलेज के हालात की नए सिरे से जांच कराई जाएगी। इसके लिए अफसरों को अलग-अलग जिले की जिम्मेदारी दी गई है। इस दौरान गर्मी में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव पर जोर होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : istock
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों की नए सिरे से जांच कराई जाएगी। इसकी जिम्मेदारी सचिव स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है। ये अधिकारी अप्रैल में छह जिले के कॉलेजों की जांच करेंगे। अगले माह अन्य जिलों के कॉलेजों की जांच होगी। ये अधिकारी गर्मी में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव के उपाय सहित 30 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस संबंध में प्रधानाचार्यों को पहले से ही आगाह कर दिया गया है। उन्हें चेतावनी दी गई है कि उनके यहां कमियां मिली तो कार्रवाई होनी तय है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों समीक्षा के दौरान मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने शासन स्तर के अधिकारियों को मौके पर जाकर व्यवस्था देखने का निर्देश दिया था। इसके तहत चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विभाग की सचिव अपर्णा यू को गोरखपुर, प्रयागराज और मेरठ की जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि किंजल सिंह को अयोध्या, लखीमपुर खीरी और हरदोई का जिम्मा दिया है। दोनों अधिकारी किसी भी दिन इन जिलों के कॉलेजों का निरीक्षण कर अपनी गोपनीय आख्या प्रमुख सचिव को सौंपेंगे। इस दौरान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसी तरह के नवाचार की जरूर होगी तो उसके बारे में भी सुझाव देंगे। मई माह में अन्य जिलों के कॉलेजों की जांच कराई जाएगी।
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पूरी व्यवस्था पर रहेगा फोकस
दोनों सचिव संबंधित अस्पतालों में गर्मी एवं सर्दी में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव के इंतजाम कराएंगे। इसी तरह आईसीयू में बेड की क्रियाशीलता, स्टाफ का प्रशिक्षण, मेडिकल कॉलेजों की जांच के दौरान इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर में दवा, जांच, बेड आदि की व्यवस्था और स्टॉफ, ब्लड बैंक की क्रियाशीलता, दवाओं की सूची, यूपी व पीजी की सीटों की वृद्धि संबंधी कार्यवाही आदि 30 बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
प्रधानाचार्यों को सालभर पहले दिया गया था निर्देश
प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को अप्रैल 2024 में व्यवस्था सुधार के संबंध में निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी तमाम कॉलेजों में व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं। कई कॉलेजों में तो इमरजेंसी व्यवस्था सुधारने के बजाय मरीजों को सीधे रेफर कर दिया जाता रहा है। बायोमीट्रिक हाजिरी से लेकर बायोमेडिकल वेस्ट पर भी ध्यान नहीं दिया गया। इसी तरह बिजली व्यवस्था में भी सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में अब सभी कॉलेजों में बारी-बारी से जांच कर व्यवस्थाएं सुधारी जाएंगी।