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पीपीपी मॉडल से बदलेगी UP के शहरों की सूरत

Fri, 10 Oct 2014 12:17 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 10 Oct 2014 12:17 AM IST
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UP to follow PPP model of development.

प्रदेश के सभी महानगरों में जनता को बेहतर परिवहन सुविधाएं देने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल का सहारा लिया जाएगा। फ्लाई ओवर, रिंग रोड, बाईपास और चौराहों का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। बस और ट्रक टर्मिनल शहरी क्षेत्रों से बाहर होंगे।

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गाड़ियों की क्षमता के आधार पर मल्टी लेवल पार्किंग बनाई जाएगी। शहरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसलिए सुगम यातायात के और बेहतर संसाधन विकसित करने की जरूरत है। आवास नीति में इसका प्रावधान किया गया है। शहरों के लिए बने मास्टर प्लान में भी इसकी व्यवस्था है।
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इसलिए महानगरों में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए मोबिलिटी प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें शहर के क्षेत्रफल और ट्रैफिक दबाव को ध्यान में रखा जाएगा।

विकास प्राधिकरण के सीमा क्षेत्र में रिंग रोड, बाईपास बनेंगे और बस व ट्रक टर्मिनल को शहरी सीमा से बाहर किया जाएगा। साथ ही रेलवे क्रासिंगों पर जरूरत के आधार पर ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे।

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जाम से निजात पाने के लिए अलग प्लान

UP to follow PPP model of development.

जाम लगने वाले क्षेत्रों में फ्लाईओवर तथा नदियों पर पुल बना कर यातायात की बेहतर सुविधा दी जाएगी। विकास प्राधिकरण हाई डेंसिटी कॉरिडोर्स के साथ पीपीपी पर मल्टी लेवल पार्किंग, फ्लाईओवर, चौराहों का सौंदर्यीकरण व बस टर्मिनल का निर्माण कराने को प्रोत्साहन देंगे। शहरों के अंदर नए सिरे से विकास व सुधार की योजना बनाते समय पार्किंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट तथा नॉन मोटराइज्ड वाहनों यानी साइकिल व रिक्शा को बढ़ावा देने की व्यवस्था की जाएगी।

पैदल यात्रियों तथा साइकिल वालों की सुरक्षा के लिए मुख्य मार्गों के साथ फुटपाथ व साइकिल ट्रैक बनाए जाएंगे। चौराहों, सर्विस रोड, बस स्टाप व पार्किंग की सुविधाएं विकसित करते समय साइकिल चालकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

पार्किंग के लिए देंगे मुफ्त जमीन

महानगरों में मल्टी लेवल पार्किंग बनाने के लिए विकास प्राधिकरण निर्माणकर्ता को मुफ्त या सब्सिडी पर जमीन देंगे। इसके कुछ भाग पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति भी दी जाएगी।

विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष इसके लिए जरूरत के आधार पर बिल्डिंग बाईलाज में संशोधन भी कर सकेंगे। सार्वजनिक यातायात प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए परिवहन विभाग की सूचना प्रौद्योगिकी आधारित संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।

तलाशेंगे मेट्रो की संभावना

UP to follow PPP model of development.

महानगरों में यातायात को और बेहतर बनाने के लिए मास ट्रांसपोर्ट सिस्टम व्यवस्था की जाएगी। मेट्रो रेल, सीएनजी गाड़ियां चलाने और बस रेपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (बीआरटीएस) सेवा शुरू करने के लिए भी सर्वे कराते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

इसमें यह ध्यान रखा जाएगा कि कहां मेट्रो चल सकती है और कहां बीआरटीएस सेवा शुरू की जा सकती है। सीएनजी से चलने वाले वाहनों के लिए भी मार्गों को चिह्नित किया जाएगा।

इस पर प्रमुख सचि आवास सदाकांत का कहना है कि विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष, आवास आयुक्त और मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक को इस बारे में निर्देश दे दिया गया है। महानगरों की बढ़ती हुई आबादी को देखते हुए यातायात की और बेहतर सुविधा विकसित करने की जरूरत है।

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