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यूपी : वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 22 फरवरी को पेश होगा, 10 मार्च तक चलेगा विधानसभा सत्र
Tue, 09 Feb 2021 08:16 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 09 Feb 2021 08:16 PM IST
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सीएम योगी अदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला।
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प्रदेश सरकार वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 22 फरवरी को पेश करेगी। बजट का आकार साढ़े पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। प्रदेश सरकार ने 18 फरवरी से बजट सत्र आहूत किया है। 18 को राज्यपाल के अभिभाषण से सत्र की शुरुआत होगी। सूत्रों ने बताया कि बजट पेश करने के लिए 19 या 22 फरवरी की तिथि पर विचार हो रहा था। 22 पर सहमति बन गई है। यह योगी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार का वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 5.5 लाख करोड़ के आसपास हो सकता है। कोरोना महामारी से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही सरकार के सामने राज्य की ऋण ग्रस्तता, राजस्व बचत, राजकोषीय घाटे में संतुलन बनाने की चुनौती है। लेकिन चुनावी वर्ष में राजस्व प्राप्तियों का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर लगाकर नई योजनाओं के लिए बजट प्रावधान का तरीका अपनाने का रास्ता खुला है। सरकार ने 2020-21 में 5,12,860.72 करोड़ का बजट पेश किया था। इसे काफी ‘रियलिस्टक’ बजट माना गया था। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस बजट में सिर्फ 6.46 फीसदी वृद्धि का अनुमान था। पर इस पूरे वित्तीय वर्ष में कोविड-19 महामारी का असर रहा और केंद्र व राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
पिछले कुछ महीनों से अर्थव्यवस्था पूर्व की स्थिति में आने के बावजूद राज्य की आय में करीब 60 हजार करोड़ तक कमी का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में सड़क, बिजली, एक्सप्रेस-वे, मेट्रो, एयरपोर्ट, छात्रवृत्ति, पेंशन जैसी भारी बजट वाली चालू योजनाओं व परियोजनाओं के साथ चुनावी वर्ष के लिए लुभावनी स्कीम के लिए बजट बंदोबस्त किस तरह हो, इस पर माथापच्ची जारी है।
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बजट प्रबंधन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि प्रदेश की ज्यादातर सरकारें चुनावी वर्ष में अक्सर सभी वित्तीय कसौटियां नजरंदाज कर देती हैं। इस कठिन परिस्थिति में यह विकल्प फिर उपलब्ध है। अधिकतम सीमा तक ऋण लेने का प्रावधान करने, राजस्व प्राप्तियों का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर पूर्ववर्ती सरकारों की तरह नई योजनाओं के लिए बजट बंदोबस्त किया जा सकता है। ऐसा करके बजट आकार 5.50 लाख करोड़ से काफी अधिक ले जाया जा सकता है।
वित्त वर्ष 2019-20 के लिए राज्य आय के त्वरित अनुमान तथा वित्त वर्ष 2020-21 के दूसरी तिमाही के अनुमान जारी कर दिए गए हैं। निदेशक अर्थ एवं संख्या प्रभाग विवेक ने बताया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में प्रचलित भावों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 16,87,818 करोड़ रुपये तथा प्रति व्यक्ति आय 65,704 रुपये रहने का अनुमान है। इसी तरह 2020-21 की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर 2020) में प्रचलित भावों पर पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद 4,07,684 करोड़ रहने का अनुमान है।
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उत्तर प्रदेश सरकार का वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 5.5 लाख करोड़ के आसपास हो सकता है। कोरोना महामारी से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही सरकार के सामने राज्य की ऋण ग्रस्तता, राजस्व बचत, राजकोषीय घाटे में संतुलन बनाने की चुनौती है। लेकिन चुनावी वर्ष में राजस्व प्राप्तियों का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर लगाकर नई योजनाओं के लिए बजट प्रावधान का तरीका अपनाने का रास्ता खुला है। सरकार ने 2020-21 में 5,12,860.72 करोड़ का बजट पेश किया था। इसे काफी ‘रियलिस्टक’ बजट माना गया था। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस बजट में सिर्फ 6.46 फीसदी वृद्धि का अनुमान था। पर इस पूरे वित्तीय वर्ष में कोविड-19 महामारी का असर रहा और केंद्र व राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
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पिछले कुछ महीनों से अर्थव्यवस्था पूर्व की स्थिति में आने के बावजूद राज्य की आय में करीब 60 हजार करोड़ तक कमी का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में सड़क, बिजली, एक्सप्रेस-वे, मेट्रो, एयरपोर्ट, छात्रवृत्ति, पेंशन जैसी भारी बजट वाली चालू योजनाओं व परियोजनाओं के साथ चुनावी वर्ष के लिए लुभावनी स्कीम के लिए बजट बंदोबस्त किस तरह हो, इस पर माथापच्ची जारी है।
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बजट प्रबंधन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि प्रदेश की ज्यादातर सरकारें चुनावी वर्ष में अक्सर सभी वित्तीय कसौटियां नजरंदाज कर देती हैं। इस कठिन परिस्थिति में यह विकल्प फिर उपलब्ध है। अधिकतम सीमा तक ऋण लेने का प्रावधान करने, राजस्व प्राप्तियों का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर पूर्ववर्ती सरकारों की तरह नई योजनाओं के लिए बजट बंदोबस्त किया जा सकता है। ऐसा करके बजट आकार 5.50 लाख करोड़ से काफी अधिक ले जाया जा सकता है।
वित्त वर्ष 2019-20 के लिए राज्य आय के त्वरित अनुमान तथा वित्त वर्ष 2020-21 के दूसरी तिमाही के अनुमान जारी कर दिए गए हैं। निदेशक अर्थ एवं संख्या प्रभाग विवेक ने बताया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में प्रचलित भावों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 16,87,818 करोड़ रुपये तथा प्रति व्यक्ति आय 65,704 रुपये रहने का अनुमान है। इसी तरह 2020-21 की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर 2020) में प्रचलित भावों पर पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद 4,07,684 करोड़ रहने का अनुमान है।
विधानसभा सचिवालय से जारी हुआ विस्तृत कार्यक्रम
विधानसभा का बजट सत्र 18 फरवरी से प्रारंभ होकर 10 मार्च तक चलेगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 22 फरवरी को पेश होगा। जारी कार्यक्रम के अनुसार, 18 फरवरी को संयुक्त सदन में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का अभिभाषण होगा। उसके बाद अध्यादेशों, अधिसूचनाओं और नियमों को सदन केपटल पर रखा जाएगा। 19 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा शुरू होगी। आधा दिन अ-सरकारी दिवस होगा। 22 फरवरी को बजट पेश होने केबाद राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। 23 फरवरी को भी अभिभाषण पर चर्चा जारी रहेगी। 24 व 25 फरवरी को बजट पर साधारण चर्चा रखी गई है। 26 फरवरी को हजरत अली के जन्मदिवस पर अवकाश रहेगा। 1, 2 व 3 मार्च को बजट पर चर्चा होगी। 4, 5, 8, 9 व 10 मार्च को बजटीय अनुदानों की मांगों पर विचार और मतदान होगा। 5 मार्च का आधा दिन अ-सरकारी दिवस रहेगा। 10 मार्च को उत्तर प्रदेश विनियोग विधेयक, 2021 का पारण होगा।