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UP: टीईटी अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी शिक्षकों में बेचैनी, साल भर में पास करनी होगी परीक्षा

Sat, 30 May 2026 01:52 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 30 May 2026 01:52 PM IST
सार

TET mandatory: सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता में कोई भी छूट देने से इन्कार कर दिया। इससे यूपी के करीब पौने दो लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। 

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UP: Supreme Court's decision on mandatory TET has increased teachers' anxiety; they will have to pass the exam
अनिवार्य हुआ टीईटी पास करना। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 सुप्रीम कोर्ट ने पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता में कोई भी छूट देने से इन्कार कर दिया। लेकिन कार्यरत शिक्षकों को राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने टीईटी पास करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त, 2028 कर दी है। पहले यह समयसीमा 31 अगस्त, 2027 थी।

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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने शुक्रवार को इस बारे में समीक्षा याचिकाओं पर दिए अपने फैसले में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखा। पीठ ने कहा, ऐसा कोई तथ्य नहीं रखा गया है जिसके कारण मूल आदेश में किसी प्रकार की समीक्षा की जाए। कोर्ट ने कहा, समीक्षा याचिकाकर्ता को राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा की निरंतरता के महत्व को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का प्रयोग करते हुए कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी पास करने की समय एक साल बढ़ा दी।
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि टीईटी परीक्षा नियमित रूप से आयोजित की जाए और संभव हो तो साल में दो बार परीक्षा कराई जाए, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में समयसीमा बढ़ाने की कोई और मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। मालूम हो कि परंपरा से हटकर सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई की थी। 13 मई को सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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पांच साल से अधिक नौकरी बची तो टीईटी पास करना अनिवार्य

सितंबर, 2025 में जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने टीईटी की अनिवार्यता का फैसला दिया था। इस फैसले से देश भर के लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। यह दावा किया जा रहा है कि कई शिक्षकों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। सितंबर के फैसले में कहा गया था कि कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए, जिनकी नौकरी पांच वर्ष से ज्यादा बची है, दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। जिनकी नौकरी पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें भी अगर प्रोन्नति पानी है तो टीईटी पास करना अनिवार्य है। उस फैसले के खिलाफ करीब सवा दो सौ से अधिक समीक्षा या पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थी।

 प्रदेश में 1.86 लाख और देश भर में 22 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित

UP: Supreme Court's decision on mandatory TET has increased teachers' anxiety; they will have to pass the exam
टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षक कर रहे हैं लगातार संघर्ष

 शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को दिए गए निर्णय से प्रदेश के शिक्षकों में काफी मायूसी है। वहीं इस निर्णय से असंतुष्ट शिक्षकों ने इस मामले में सड़क से संसद तक अब आर-पार की लड़ाई लड़ने की बात कही है। टीईटी मामले में प्रदेश के 1.86 लाख से अधिक और देश भर में 22 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे।

टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षक समाज को काफी झटका लगा है। हम इस मामले में हार नहीं मानेंगे और अधिवक्ताओं से राय लेकर इसमें क्यूरेटिव पिटीशन डालेंगे। उन्होंने कहा कि सड़क पर भी आंदोलन दोबारा शुरू करेंगे। केंद्र सरकार से भी कहेंगे कि यह सही नहीं है। शिक्षकों को राहत दी जाए।

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने हमेशा कानून, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास रखते हुए अपनी लड़ाई लड़ी है। किंतु लंबे समय से लंबित व न्यायोचित मुद्दों पर शिक्षकों को निराशा मिलना काफी पीड़ादायक है। महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि संगठन इस मुद्दे को किसी भी कीमत पर ठंडे बस्ते में नहीं जाने देगा।

अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ जल्द ही देशभर के शिक्षक संगठनों, प्रतिनिधियों व विधिक विशेषज्ञों के साथ इस पर मंथन करके आगे की रणनीति तय करेगा। महासंघ शिक्षक हितों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेगा। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा है कि टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक सड़क से सदन तक आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय निराशापूर्ण है।

केंद्र ने गुपचुप तरीके से किया संशोधन

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि केंद्र ने गुपचुप तरीके से 2017 में संशोधन कर 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता संबंधी काला कानून लागू कर दिया। इसके संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को दिए गए आदेश में कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। इससे देश के प्रभावित लाखों शिक्षक काफी निराश हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी लागू करना न्यायसंगत नहीं है। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने पहले दिन से ही कहा था कि सड़क से सदन का संघर्ष करना होगा। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की है कि धैर्य बनाए रखें। संगठन द्वारा फिर से सड़क से सदन के संघर्ष किया जाएगा।

तभी हम सभी की सेवा शर्तें सुरक्षित रहेंगी। सभी एकजुट होकर आंदोलन का प्रण लें क्योंकि अब आंदोलन से ही सफलता हासिल होगी। वहीं अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि शिक्षक समाज ने हमेशा लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। किंतु बार-बार शिक्षकों की न्यायोचित मांगों की अनदेखी होना दुर्भाग्यपूर्ण व चिंताजनक है। शिक्षक समाज अब अपने मुद्दों को किसी भी परिस्थिति में ठंडे बस्ते में नहीं जाने देगा।

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