यूपी: एक्यूआईएस मॉड्यूल की जांच का दायरा बढ़ा, प्रदेश में 50 संदिग्धों की जानकारी; पांच-छह की भूमिका संदिग्ध
एक्यूआईएस विचारधारा से जुड़े मॉड्यूल के दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस ने जांच का दायरा बढ़ाया है। प्रदेश में करीब 50 लोगों के संपर्क में होने की जानकारी मिली है। इनमें पांच-छह की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, सोशल मीडिया और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है।
विस्तार
अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) की विचारधारा से जुड़े मॉड्यूल के दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस की जांच का दायरा बढ़ गया है। जांच में प्रदेश में इस नेटवर्क से जुड़े करीब 50 लोगों के बारे में जानकारी सामने आई है। ये लोग सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। एटीएस अब इनके नेटवर्क से जुड़ाव और भूमिका की जांच कर रही है।
एटीएस ने 12 सितंबर को आजमगढ़ के दीदारगंज क्षेत्र से 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 14 सितंबर को सिद्धार्थनगर के मकसूद अली को तमिलनाडु से पकड़ा गया। आरोप है कि दोनों सोशल मीडिया पर ‘ला गालिब-इल्लल्लाह’ नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहे थे।
एटीएस के अनुसार, नबील के मोबाइल से एक्यूआईएस की विचारधारा से संबंधित सामग्री और बम बनाने से जुड़े वीडियो मिले हैं। दोनों के बम बनाने की जानकारी हासिल करने की भी बात सामने आई है। दोनों से पूछताछ और उनके डिजिटल उपकरणों की जांच के दौरान एटीएस को कई अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली। एजेंसी सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर हुई बातचीत का विश्लेषण कर रही है। संदिग्धों के बैंक खातों और लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
पांच-छह की भूमिका संदिग्ध
जांच में सामने आए करीब 50 लोगों की भूमिका एक जैसी नहीं मानी जा रही है। एटीएस यह पता लगा रही है कि कौन लोग केवल सोशल मीडिया के जरिये संपर्क में थे और किन लोगों ने नेटवर्क की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में पांच-छह ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है, जिनकी गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। कुछ संदिग्धों से पूछताछ किए जाने की भी जानकारी है।
फंडिंग के स्रोतों की जांच
एटीएस नबील और मकसूद के अलावा उनके सीधे संपर्क में रहे युवकों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गतिविधियों के लिए धन कहां से जुटाया जा रहा था। साथ ही डिजिटल माध्यम से साझा किए गए संदेशों और फाइलों का तकनीकी विश्लेषण जारी है।