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यूपी आरओ-एआरओ परीक्षा विवाद: हाईकोर्ट का फैसला, अग्रिम नियुक्तियों पर लगायी अंतरिम रोक; आरक्षण में फंसा पेंच
Fri, 08 May 2026 11:08 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Fri, 08 May 2026 11:08 PM IST
सार
UP RO-ARO exam controversy: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को आरओ/एआरओ भर्ती परीक्षा- 2023 में आरक्षण लागू किए जाने को लेकर नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी है।
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आरओ-एआरओ की परीक्षा देकर बड़ा फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को आरओ/एआरओ भर्ती परीक्षा- 2023 में आरक्षण लागू किए जाने को लेकर विवाद मामले में, अगली सुनवायी के लिए 12 मई की तिथि नियत की है। साथ ही न्यायालय ने इन पदों पर अगली तिथि तक नई नियुक्तियाँ किए जाने पर अंतरिम रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश विवेक यादव व अन्य की ओर से दाखिल विशेष अपील पर 8 मई को पारित किया है। उक्त अपील में एकल पीठ के 1 फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें अपीलार्थियों की याचिका पर उन्हें अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया गया था।
अपीलार्थियों की ओर से दलील दी गई कि अपीलार्थी ओबीसी वर्ग से हैं जिन्हें प्रारम्भिक परीक्षा में जो मार्क्स मिले, वे सामान्य श्रेणी से मुख्य परीक्षा के लिए चयनित कम से कम 25 अभ्यर्थियों से अधिक थे, बावजूद इसके अपीलार्थियों को प्रारम्भिक परीक्षा में असफल घोषित कर दिया गया। वहीं, याचिका का विरोध करते हुए, राज्य सरकार व यूपी लोक सेवा आयोग के वकीलों ने न्यायालय को बताया कि उक्त भर्ती परीक्षा के तहत अधिकांश सफल अभ्यर्थियों को नियुक्तियाँ मिल चुकी हैं।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश विवेक यादव व अन्य की ओर से दाखिल विशेष अपील पर 8 मई को पारित किया है। उक्त अपील में एकल पीठ के 1 फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें अपीलार्थियों की याचिका पर उन्हें अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया गया था।
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अपीलार्थियों की ओर से दलील दी गई कि अपीलार्थी ओबीसी वर्ग से हैं जिन्हें प्रारम्भिक परीक्षा में जो मार्क्स मिले, वे सामान्य श्रेणी से मुख्य परीक्षा के लिए चयनित कम से कम 25 अभ्यर्थियों से अधिक थे, बावजूद इसके अपीलार्थियों को प्रारम्भिक परीक्षा में असफल घोषित कर दिया गया। वहीं, याचिका का विरोध करते हुए, राज्य सरकार व यूपी लोक सेवा आयोग के वकीलों ने न्यायालय को बताया कि उक्त भर्ती परीक्षा के तहत अधिकांश सफल अभ्यर्थियों को नियुक्तियाँ मिल चुकी हैं।
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लोक सेवा आयोग कर रहा है तैयारी
समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) परीक्षा-2023 में चयनित अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग पर हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अब हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन से जुड़े समान मामले और उस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का गहन अध्ययन कर रहा है। आयोग का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा केवल 'सूटेबिलिटी एग्जाम' होती है, जिसके अंक अंतिम मेरिट में नहीं जुड़ते, जबकि आरक्षण का अंतिम निर्धारण फाइनल चयन चरण में किया जाता है। आयोग के सचिव गिरिजेश त्यागी ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा स्तर पर आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही अंतरिम रोक दे चुका है और आयोग हाईकोर्ट में इन्हीं स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर अपना पक्ष रखेगा।