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UP: महापौर-पार्षदों की तकरार पहुंची आर-पार की लड़ाई तक, संगठन से अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग; जानें मामला

Sat, 08 Aug 2026 11:39 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 08 Aug 2026 11:39 AM IST
सार

लखनऊ में महापौर सुषमा खर्कवाल और भाजपा पार्षदों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब संगठन तक पहुंच गया है। पार्षदों के एक गुट पर महापौर और भाजपा को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। दोनों पक्षों में अवस्थापना निधि के आवंटन को लेकर मतभेद हैं।

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UP: Rift between Mayor and councilors escalates into a full-blown confrontation; disciplinary action by the or
महापौर-पार्षदों की तकरार - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

महापौर और उनकी ही पार्टी के पार्षदों के बीच दो साल से चल रही तकरार अब आर-पार की लड़ाई तक पहुंच गई है। भाजपा के 80 पार्षद दो गुटों में हैं। इनमें से एक महापौर सुषमा खर्कवाल और दूसरा उनके विरोधियों का है। अब उन पार्षदों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संगठन को बंद लिफाफे में पत्र भेजा गया है, जो महापौर पर अवस्थापना निधि के कामों में पक्षपात करने का आरोप लगा रहे हैं। यह पत्र पार्षदों की ओर से भेजा गया है।

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महापौर का विरोधी गुट आरोप लगा रहा है कि उन्होंने अवस्थापना निधि से होने वाले कार्यों के आवंटन में पक्षपात किया है। सिर्फ उन्हीं पार्षदों के वाडों में काम दिए गए, जो उनके करीब हैं। यह आरोप भी लगाया है कि सांसद राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र के 88 वाडों में विकास कार्य के लिए केवल 18 करोड़ रुपये मिले हैं। उधर, सपा सांसद आरके चौधरी के मोहनलालगंज क्षेत्र के मात्र 22 वाडों में 32 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं। महानगर भाजपा अध्यक्ष से मिलकर इसकी शिकायत भी की गई थी।

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ये हैं महापौर के निशाने पर

भाजपा पार्षद दल के उपनेता देव शर्मा, मुन्ना मिश्रा, मुख्य सचेतक मुकेश सिंह 'मोटी', सचेतक अमित चौधरी, रंजना अवस्थी, मालती यादव, कौशलेंद्र द्विवेदी, प्रतिमा तिवारी, शैलेंद्र वर्मा, राजेश सिंह 'गब्बर', नामित पार्षद अखिलेश गिरि समेत अन्य।

बंद लिफाफे में महानगर पत्र भेजा 

नगर निगम में भाजपा पार्षद दल का उपनेता बनाए जाने को लेकर भी महापौर और पार्षदों के एक गुट के बीच मनमुटाव हुआ और मामला संगठन तक पहुंचा। इसके बाद 30 जुलाई को महानगर भाजपा अध्यक्ष आनंद द्विवेदी की ओर से जारी सूची में उन्हीं पार्षदों के नाम शामिल किए गए, जो महापौर विरोधी गुट के माने जाते हैं। सूची जारी करने से पहले आनंद द्विवेदी ने दिल्ली जाकर राजनाथ सिंह से मुलाकात भी की थी।

सूची जारी होने के बाद महापौर राजनाथ सिंह से मिलने दिल्ली गई। इसके बाद उनकी ओर से बृहस्पतिवार को बंद लिफाफे में महानगर भाजपा अध्यक्ष को पत्र भेजा गया है। इसकी प्रति प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, नगर विकास मंत्री और जिले प्रभारी मंत्री के अलावा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भेजी गई है।

 

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यह लिखा है पत्र में

पत्र में पार्षदों की ओर से लिखा गया है कि मीडिया और समाचार पत्रों से पता चला है कि चार-पांच पार्षद महापौर और भाजपा को बदनाम कर रहे हैं। इन पार्षदों ने आरोप लगाया है कि उनके वार्डों में महापौर की ओर से विकास कार्य के लिए धन आवंटित नहीं किया गया, जो गलत है। बीते तीन वर्षों में ऐसा कोई वार्ड नहीं है जिसमें धन देकर काम न कराए गए हों। 

पार्षद निधि को 1.50 करोड़ से 2.10 करोड़ रुपये किया गया है, ताकि किसी वार्ड में धन की कमी के कारण काम न रुके। रक्षा मंत्री और महापौर के कार्यों से सभी संतुष्ट हैं। चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में भ्रामक खबरों पर रोक लगाई जाए और तत्काल निर्णय लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। पत्र के साथ समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की छायाप्रति और तीन वर्षों में सभी वार्डों में कराए गए कार्यों की चुकलेट भी संलग्न की गई है।

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जानिए किसने क्या कहा

लखनऊ में महापौर सुषमा खर्कवाल की ओर से महानगर भाजपा अध्यक्ष को कथित तौर पर भेजे गए पत्र को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। महापौर सुषमा खर्कवाल ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से संगठन को कोई पत्र नहीं भेजा गया है और उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

वहीं, नगर निगम कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष सुशील तिवारी पम्मी ने दावा किया कि उन्होंने महापौर के पत्रवाहक के तौर पर बृहस्पतिवार को एक पत्र महानगर भाजपा अध्यक्ष को दिया है। उन्होंने कहा कि पत्र महापौर की ओर से था।

दूसरी ओर, महानगर भाजपा अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने बताया कि पार्षद सुशील तिवारी बृहस्पतिवार को बंद लिफाफे में एक पत्र देकर गए थे। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्होंने पत्र खोला और पढ़ा नहीं है। ऐसे में पत्र को लेकर महापौर और पार्टी पदाधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आ रहा है। मामले में पत्र की वास्तविकता और उसमें लिखी बातों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

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