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यूपी : लंबित भुगतान पर ब्याज जोड़कर रिकवरी काटी, पर बड़ा सवाल, क्या ब्याज मिलेगा

Wed, 11 Aug 2021 10:27 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 11 Aug 2021 10:27 AM IST
सार

गन्ना मूल्य को लेकर गन्ना आयुक्त ने पांच समूहों से जुड़ी चीनी मिलों रिकवरी जारी की है और उनमें वह ब्याज भी बसूलने को कहा गया है जिसे समय पर भुगतान न करने पर अदा करने का प्रावधान है।

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UP: Recovery deducted by adding interest on pending payment, but big question, will interest be available
गन्ना - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गन्ना मूल्य को लेकर गन्ना आयुक्त ने पांच समूहों से जुड़ी चीनी मिलों रिकवरी जारी की है और उनमें वह ब्याज भी बसूलने को कहा गया है जिसे समय पर भुगतान न करने पर अदा करने का प्रावधान है। बावजूद इसके यह बड़ा सवाल है कि क्या यह ब्याज मिलें अदा करेंगी या प्रशासन इसके वसूल पाएगा। इसी ब्याज को लेकर किसान भी अदालतों  में लड़ाई लड़ रहे हैं।

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किसानों को अभी गन्ना सत्र 2020-2021 के गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो पाया है। बजाज, मोदी ग्रुप, सिंभावली, गडौरा, एरा तथा शामली मिल प्रतिनिधियों को सख्त चेतावनी केसाथ साथ पांच समूहों की रिकवरी भी जारी की गई है। गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी के मुताबिक साल में एक लाख 41 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और 12 हजार करोड़ रुपये का वह भुगतान भी प्राथमिकता पर कराया गया जो पिछला बकाया था।
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इसके अलावा अब रिकवरी के जरिए किसानों से वसूली करने के लिए कहा गया है। विदित हो कि चीनी मिलों पर अभी गन्ना किसानों के सात हजार चार सौ करोड़ रुपये बकाया है।  कुल 120 में से 36 चीनी मिलें ऐसी हैं जिन्होंने शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। 29 मिलों ने अस्सी प्रतिशत से ज्यादा भुगतान किया है। इनमें 19 चीनी मिलें 90 प्रतिशत भुगतान कर चुकी हैं।
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अहम बात यह है जिन चीनी मिलों की रिकवरी जारी की गई है उनमें मूल भुगतान के अलावा ब्याज भी जोड़ा गया है। अवशेष गन्ना मूल्य, उस पर विलंबित अवधि का देय ब्याज, गन्ना खरीद पर अवशेष अंशदान तथा अंशदान पर भी विलंबित अवधि का ब्याज लगाकर कुल रकम की रिकवरी जारी की गई हैं। साथ ही गन्ना आयुक्त ने वसूली प्रमाणपत्रों में यह भी उल्लेख किया है कि गन्ना मूल्य एवं गन्ना विकास अंशदान विलंबित भुगतान की अवधि का इस राशि पर 12 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज भी देय है। इसे भी वसूलना होगा।

अहम सवाल यह है कि भले ही गन्ना विभाग ने वसूली सर्टिफिकेट जारी कर दिए हैं पर ब्याज को वसूलना टेढ़ी खीर है। पिछले सत्रों में रिकवरी वसूली के परिप्रेक्ष्य में प्रशासन ने मिलों की चीनी कुर्क कर नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी पर मजबूत शुगर लॉबी का यह असर रहा कि नीलामी में कोई बोली दाता ही नहीं आया। ऐसे में सारा मशक्कत बेकार ही चला गया था। किसानों का कहना है कि गन्ने का भुगतान तो देर सबेर से हो जाएगा पर एक्ट के मुताबिक विलंबित राशि का ब्याज दें, इस बार भी मिलों की मंशा यह नहीं लग रही है।


इसका पुख्ता उपाय खोजना होगा। किसान नेता वीएम सिंह कहते हैं कि  इस तरह आरसी हर साल काटी जाती हैं। एक बार तो कोर्ट केआदेश पर नीलामी की प्रक्रिया भी की गई पर मिलीभगत के कारण कोई खरीदार आया ही नहीं। ये रिकवरी भी काटी जाती तो मिलें बंद होने के 15 दिन बाद। इतना लेट रिकवरी जारी करने का क्या लाभ। किसान को उसके पैसे से मतलब है। उसे समय से दिलवाया जाए।

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