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यूपी: निजी फाइनेंस कंपनियां वसूल रही हैं मनमाना ब्याज, शिकायतों को देखते हुए शासन ने दिए जांच के आदेश

Tue, 22 Oct 2024 09:09 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 22 Oct 2024 09:09 PM IST
सार

Finance companies of UP: यूपी में फैली निजी फाइनेंस कंपनियां ग्रामीण इलाकों में लोन देकर मनमाना ब्याज वसूल रही हैं। कई शिकायतें देखते हुए शासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। 

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UP: Private finance companies are charging arbitrary interest, in view of the complaints, the government order
यूपी की निजी फाइनेंस कंपनियां। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

निजी फाइनेंस और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर आरोप लग रहे हैं कि वे ग्रामीण इलाकों में दिए गए लोन के एवज में मनमाना ब्याज वसूल रही हैं। शासन ने ऐसी शिकायतों की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही ऋण वसूली के लिए नियमों के विपरीत जाकर कार्रवाई की शिकायतों का भी संज्ञान लिया गया है। दोनों ही मामलों की रिपोर्ट मांगी गई है।

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बैंकों का नेटवर्क प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल गया है। डेढ़ लाख से ज्यादा बीसी सखियों और बिजनेस कॉरस्पाॅन्डेंट्स ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। इस बीच निजी फाइनेंस कंपनियों की शिकायतों की संख्या ग्रामीण इलाकों से बढ़ गई है। दरअसल आरबीआई की गाइडलाइनों के मुताबिक जरूरी कागजी औपचारिकताओं के बिना सरकारी बैंक लोन नहीं देते। निजी बैंक भी ग्रामीण इलाकों में लोन देने से कतराते हैं। इसका फायदा गैर बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (एनबीएफसी) और माइक्रो फाइनेंस कंपनियां उठा रही हैं। केवल आधार कार्ड या अन्य पहचानपत्र पर ही ये कंपनियां आसानी से लोन दे रही हैं।
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बिना गारंटी का ये लोन पर्सनल लोन की श्रेणी में दिया जा रहा है, जिसे लोग अच्छी खासी संख्या में ले रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में दिए जा रहे इस लोन के एवज में 20 से 24 फीसदी तक ब्याज वसूलने के मामले सामने आए हैं। वहीं सरकारी बैंकों में पर्सनल लोन की ब्याज दर 12 से 14 फीसदी ही है। 
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ब्याज या किस्त न चुकाने की स्थिति में निजी फाइनेंस कंपनियों के एजेंट वसूली के लिए गुंडागर्दी भी करते हैं। ऐसे मामलों की शिकायतें वित्त विभाग के पास लगातार पहुंच रही हैं। इसे देखते हुए शासन ने शिकायतों की जांच के आदेश दिए हैं। वहीं विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बिना गारंटी और बिना कागजी औपचारिकताओं का लोन रिस्क की श्रेणी में आता है, इसीलिए इसकी ब्याज दर कुछ ज्यादा होती है। लोन लेते समय लोग इस पर ध्यान नहीं देते। ये भी संज्ञान में आया है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोन डिफाल्ट हुए हैं, जिन्होंने जिस काम के लिए धन लिया था, उसे निजी जरूरतों पर खर्च कर दिया।

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