यूपी: धनतेरस से प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को मिलेगा उपमा और हलवा, जोड़ा गया मेन्यू में; जानिए डिटेल
Mid-day meal in UP: योजना के तहत हर महीने के पहले व तीसरे शुक्रवार को मीठा हलवा छात्रों को दिया जाएगा। वहीं दूसरे, चौथे और पांचवें शुक्रवार को बच्चों को उपमा परोसा जाएगा।
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प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को जाड़े में मिड-डे-मील में हलवा व उपमा भी दिया जाएगा। पूरक पोषाहार के रूप में हर शुक्रवार यह दिया जाएगा। धनतेरस से इसकी विधिवत शुरुआत होगी।
योजना के तहत हर महीने के पहले व तीसरे शुक्रवार को मीठा हलवा छात्रों को दिया जाएगा। वहीं दूसरे, चौथे और पांचवें शुक्रवार को बच्चों को उपमा (नमकीन हलवा) परोसा जाएगा।
पीएम पोषण योजना के तहत यह बच्चों को वितरित किया जाएगा। प्रदेश के कुल 1.33 लाख परिषदीय स्कूलों के 1.54 करोड़ बच्चों के मिड-डे-मील में इसे जाड़े में अतिरिक्त मेयनू के रूप में जोड़ा गया है। मिड-डे-मील प्राधिकरण ने इसके लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए हैं।
जनगणना प्रशिक्षण में लगाया तो प्रभावित होगी परीक्षा की तैयारी
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पांच फरवरी से बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। परीक्षा की तैयारियों और निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा कराने के दबाव के बीच शिक्षकों को जनगणना प्रशिक्षण में भी लगाया जा रहा है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका जताते हुए शिक्षक संगठनों ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षकों को जनगणना कार्य से मुक्त रखने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अलावा चुनाव, जनगणना और बाह्य परीक्षा ड्यूटी में लगाने पर आपत्ति जताई है। संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की है। संघ के प्रादेशिक वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए विभाग ने शैक्षिक पंचांग के अनुसार निर्धारित समय में पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने भी हाल ही में यू-ट्यूब सत्र के माध्यम से शिक्षकों को समय से कोर्स पूरा कराने पर जोर दिया है।
शिक्षक पाठ्यक्रम पूरा कराने में जुटे हैं। ऐसे में उन्हें जनगणना से पहले प्रशिक्षण और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारियों पर असर पड़ सकता है। बोर्ड परीक्षाओं से पहले अर्द्धवार्षिक, प्रायोगिक और प्री-बोर्ड परीक्षाएं भी कराई जानी हैं। ऐसे में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाए, ताकि वे समय से पाठ्यक्रम पूरा कराने के साथ विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी करा सकें। बेसिक शिक्षा के शिक्षकों के सामने भी यही स्थिति है। उनकी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 17 नवंबर से प्रस्तावित हैं, लेकिन उन्हें जनगणना प्रशिक्षण में शामिल होना पड़ रहा है।