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UP: प्रदेश में टैक्सी सर्विस को और सुरक्षित करने की तैयारी, पैनिक बटन के बिना नहीं चलेंगी गाड़ियां
Sat, 07 Feb 2026 07:53 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sat, 07 Feb 2026 07:53 PM IST
सार
Taxi service in UP: यूपी में ऐप आधारित कैब सर्विस में सुरक्षा के साथ उनके किरायों पर भी लगाम लगाने की तैयारी चल रही है। इसमें महिलाओं की सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाएगा।
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यूपी में टैक्सी सर्विस।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित कैब सेवाओं को लेकर पहली बार एक समग्र नीति लागू करने की तैयारी हो रही है। इस नीति का उद्देश्य ओला, उबर जैसी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के संचालन को विनियमित करना, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ड्राइवरों के हितों की रक्षा करना है। इसके तहत कैब में पैनिक बटन, जीपीएस ट्रैकिंग और 24×7 कंट्रोल रूम से जुड़ी व्यवस्था को अनिवार्य किया जा सकता है।
वहीं, ड्राइवरों के लिए पुलिस सत्यापन और प्रशिक्षण को भी जरूरी शर्त बनाया जाएगा।प्रस्तावित नीति के तहत राज्य में संचालित सभी ऐप आधारित कैब एग्रीगेटरों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही किराया निर्धारण, वाहन की फिटनेस, बीमा, ड्राइवरों की योग्यता और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को भी स्पष्ट रूप से तय किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अब तक किसी ठोस नीति के अभाव में इस क्षेत्र में कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही थीं।
नीति में महिला यात्रियों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है। इसके तहत कैब में पैनिक बटन, जीपीएस ट्रैकिंग और 24×7 कंट्रोल रूम से जुड़ी व्यवस्था को अनिवार्य किया जा सकता है। वहीं, ड्राइवरों के लिए पुलिस सत्यापन और प्रशिक्षण को भी जरूरी शर्त बनाया जाएगा।
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वहीं, ड्राइवरों के लिए पुलिस सत्यापन और प्रशिक्षण को भी जरूरी शर्त बनाया जाएगा।प्रस्तावित नीति के तहत राज्य में संचालित सभी ऐप आधारित कैब एग्रीगेटरों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही किराया निर्धारण, वाहन की फिटनेस, बीमा, ड्राइवरों की योग्यता और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को भी स्पष्ट रूप से तय किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अब तक किसी ठोस नीति के अभाव में इस क्षेत्र में कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही थीं।
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नीति में महिला यात्रियों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है। इसके तहत कैब में पैनिक बटन, जीपीएस ट्रैकिंग और 24×7 कंट्रोल रूम से जुड़ी व्यवस्था को अनिवार्य किया जा सकता है। वहीं, ड्राइवरों के लिए पुलिस सत्यापन और प्रशिक्षण को भी जरूरी शर्त बनाया जाएगा।
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पीक ऑवर में होगी किराये पर नजर
प्रस्तावित नीति में यह भी प्रावधान किया जा सकता है कि पीक ऑवर में मनमाने तरीके से किराया बढ़ाने पर रोक लगे और अधिकतम व न्यूनतम किराया सीमा तय हो। इसके अलावा, उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस नीति से जहां एक ओर यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद परिवहन सेवा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े लाखों ड्राइवरों को भी स्पष्ट नियमों के तहत काम करने का अवसर मिलेगा। नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही इसे कैब एग्रीगेटरों व अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
यह नीति उत्तर प्रदेश में शहरी परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी। साथ ही कैब से जुड़े विवादों को दूर करने में सहायक होगी। इस नीति में वे सभी कंपनियां आएंगी जो परिवहन सेवा दे रही हैं और एप पर आधारित हैं। अभी एप से चलने वाली कुछ सेवाओं में ट्रैकिंग नहीं हो सकती, लेकिन इस नियम के दायरे में आने के बाद ऐसी कंपनियां भी आ जाएंगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस नीति से जहां एक ओर यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद परिवहन सेवा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े लाखों ड्राइवरों को भी स्पष्ट नियमों के तहत काम करने का अवसर मिलेगा। नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही इसे कैब एग्रीगेटरों व अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
यह नीति उत्तर प्रदेश में शहरी परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी। साथ ही कैब से जुड़े विवादों को दूर करने में सहायक होगी। इस नीति में वे सभी कंपनियां आएंगी जो परिवहन सेवा दे रही हैं और एप पर आधारित हैं। अभी एप से चलने वाली कुछ सेवाओं में ट्रैकिंग नहीं हो सकती, लेकिन इस नियम के दायरे में आने के बाद ऐसी कंपनियां भी आ जाएंगी।