यूपी : वाणिज्यकर में सचल दल की व्यवस्था खत्म करने की तैयारी, व्यापारी से लूट मामले में संलिप्तता के बाद मंथन शुरू
आगरा में चांदी व्यापारी से 43 लाख रुपये की लूट में वाणिज्यकर अधिकारियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद इसे खत्म कर प्रवर्तन विंग के पुनर्गठन पर विचार चल रहा है।
विस्तार
आगरा में चांदी व्यापारी से 43 लाख रुपये की लूट में वाणिज्यकर अधिकारियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद विभाग में सचल दल की व्यवस्था खत्म करने पर मंथन शुरू हो गया है। सचल दल का गठन कर चोरी रोकने के लिए किया गया था, लेकिन कई मामलों में शिकायत के बाद अब इसे खत्म कर प्रवर्तन विंग के पुनर्गठन पर विचार चल रहा है।
हालांकि यह मंथन फिलहाल वाणिज्यकर मुख्यालय के स्तर पर ही हो रहा है। इसका प्रस्ताव गौतमबुद्ध नगर के जोनल एडिशनल कमिश्नर ने भेजा है। इस संबंध में एक-दो बैठकें भी हो चुकी हैं। जल्द ही कुछ संशोधनों के साथ प्रवर्तन विंग के पुनर्गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। शासन स्तर से ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि सचल दल को समाप्त कर दिए जाने से व्यापारियों को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिल सकेगी।
‘सचल दल की कार्यवाहियों को लेकर अक्सर मिल रही शिकायतों को देखते इस मुद्दे पर चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन अभी तक शासन स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है। जब आएगा तो देखेंगे।’
- संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव वाणिज्यकर
नोएडा के एडिशनल कमिश्नर ने सचल दल खत्म करने का भेजा प्रस्ताव
आगरा में चांदी व्यापारी से 43 लाख की लूट प्रकरण के बाद से ही शासन स्तर से वाणिज्यकर चोरी रोकने के लिए विभागीय स्तर पर गठित प्रवर्तन विंग की काम करने वाली दो इकाइयों विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) और सचल दल (मोबाइल स्क्वायड) की समीक्षा की जा रही है। खास कर सचल दल की कार्यवाहियों के बारे में मिल रही शिकायतों को देखते हुए शासन विभागीय प्रवर्तन विंग के पुनगर्ठन पर विचार कर रहा है। उधर गौतमबुद्ध नगर जोन के एडिशनल कमिश्नर चंद्र भूषण सिंह ने वाणिज्यकर कमिश्नर को इस संबंध में एक प्रस्ताव भेजा है। जिसमें सचल दल को समाप्त करते हुए प्रवर्तन विंग के पुनर्गठन के बारे में कई सुझाव दिए गए हैं।
एडिशनल कमिश्नर के प्रस्ताव में एसआईबी और सचल दल को दिए गए अधिकारों, कार्यक्षेत्र के निर्धारण, मैनपावर के आवंटन, दोनों दलों केसंचालन पर होने वाले वित्तीय खर्च में असंतुलन समेत कई बिंदुओं पर विसंगितियों का हवाला देते हुए इसमें सुधार का सुझाव दिया गया है। विभाग के एक उच्चपदस्थ सूत्र ने बताया कि एडिशनल कमिश्नर के प्रस्ताव की मुख्यालय स्तर पर समीक्षा की जा रही है।
जीएसटी के बाद बढ़ीं मनमाने तरीके से कार्यवाही की शिकायतें
दरअसल बिक्री कर के जमाने से सचल दल पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ही प्रांत केभीतर व बाहर माल की ढुलाई वाले वाहनों की जांच केलिए ‘चेकिंग रजिस्टर’, भौतिक सत्यापन रजिस्टर व पंजी-5 जैसी व्यवस्था लागू है। इसमें चेकिंग रजिस्टर सबसे महत्वपूर्ण था, जिसमें सचल दल टीम के कार्यवाहियों का का पूरा विवरण, जांच की तारीख, समय व स्थान, सड़क पर चेक किए गए सभी वाहनों का विवरण अनिवार्य रुप से दर्ज की जाती है। इस रजिस्टर को भी पुलिस थानों के जीडी की तरह ही संवेदनशील माना जाता है। लेकिन जीएसटी लागू होने केबाद से ही यह व्यवस्था ध्वस्त हो गई। चेकिंग रजिस्टर की समीक्षा लगभग बंद हो गई है। अधिकांश जिलों में यह रजिस्टर बने ही नहीं हैं। लिहाजा सचल दल के अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीकेसे जांच और व्यापारियों के दोहन करने की शिकायतें बढ़ने लगी हैं।
यूपी में सचल दल अधिक अधिकार संपन्न
यूपी ही एक ऐसा राज्य है जहां वाणिज्यकर विभाग कासचल अन्य राज्यों की तुलना में अधिक संपन्न है। देश के कई राज्यों में तो सचल दल की व्यवस्था ही नहीं हैं। लेकिन महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में जो सचल दल हैं उन्हें सिर्फ कर चोरी के बारे में सूचना एकत्र करने का ही अधिकार है। जबकि यूपी में सचल को सड़क पर चलने वाले माल वाहक वाहनों की जांच करने के लिए किसी भी स्तर से अनुमति लेने से छूट है और करचोरी मिलने पर अर्थदंड लगाने से लेकर माल सीज करने तक के अधिकार हैं। इस वजह से सचल दल के अधिकारियों पर मनमाने तरीके से कार्यवाही करने और व्यापारियों का उत्पीड़न करने की शिकायतों की भरमार है।
प्रस्ताव में दिए गए हैं ये प्रमुख सुझाव
- केंन्द्रीय जीएसटी केढांचे के मुताबिक जाइंट कमिश्नर के नेतृत्व में विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) इकाई का गठन किया जाए।
- सचल दल इकाईयों को समाप्त कर उसे संभागीय विशेष अनुसंधान शाखा में मर्ज कर दिया जाए।
- सचल दल को आवंटित मैनपावर व संसाधनों का इस्तेमाल एसआईबी की जांचों में आपूर्ति चेन के अंतिम छोर तक पहुंचाने में किया जाए।
- संभागीय एसआईबी इकाई को वह सभी अधिकार दे दिए जाएं जो सचल दल को दिए गए थे। ताकि डेटा विश्लेषण के आधार पर किसी जांच के सिलसिले में परिवहन के दौरान माल व वाहनों की जांच आसानी से किया जा सके।
- संभागीय स्तर पर गठित होने वाली एसआईबी टीम को पूरे प्रदेश में कहीं पर भी जाकर जांच करने अधिकार दिया जाए। ताकि वह प्रदेश की पूरी सप्लाई चेन पर नजर रख सके
- पुर्नगठित होने वाली प्रवर्तन टीम को कर चोरी के मामले में पूरे प्रदेश में कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाए। हालांकि संभाग से बाहर की कार्रवाईयों के लिए जोनल एडिशनल कमिश्नर को अधिकृत किया जाए।
- संपूर्ण प्रवर्तन व्यवस्था को माड्यूल आधारित बनाया जाए, जिसमें अधिकारियों की भूमिका निर्धारित रहे और किसी भी कार्यवाही की मंजूरी माड्यूल के अन्तर्गत ही देने की व्यवस्था रखी जाए।
सचल दल की जरूरत नहीं
प्रस्ताव के मुताबिक वाणिज्य कर विभाग में सचल दल इकाई की मौजूदा समय कोई जरूरत नहीं बताई गई है। विभाग में वर्ष 1970 में विशेष अनुसंधान शाखा और सचल दल इकाइयों का गठन किया गया। यूपी के उपभोक्ता राज्य होने की वजह से उस समय अधिकतर माल प्रदेश के बाहर से आते थे। इसीलिए करचोरी रोकने के लिए प्रदेश की सीमाओं पर चेक पोस्टें लगाई गई और चल दल को प्रदेश के अंदर कर चोरी रोकने की जिम्मेदारी दी गई। किंतु सचल दल की कारगुजारी का अनुश्रवण सदैव चुनौतीपूर्ण रहा। इसकी शिकायतें उच्च स्तर तक आती रहीं। चेकपोस्ट तो खत्म कर दिया गया, लेकिन सचल दल इकाइयां अभी भी काम कर रही हैं। गुड्स सर्विस टैक्स ;जीएसटीद्ध लागू होने के बाद पूरे देश में एक समान कर प्रणाली लागू है। इसलिए सचल दल इकाइयों की जरूरत भी नहीं है। विशेष अनुसंधान शाखा इकाइयों के सहारे चोरी रोकी जा सकती है।
सचल दल में अफसरों की भरमार
प्रस्ताव में कहा गया है कि विशेष अनुसंधान शाखा की अपेक्षा सचल दल इकाइयों के पास काम भी कम है और उसमें अफसरों की भरमार है। उदाहरण के तौर पर इसका जिक्त्रस् भी किया गया है। प्रदेश में 45 विशेष अनुसंधान शाखा और 150 सचल दल इकाइयां काम कर रही हैं। विशेष अनुसंधान शाखा में कुल 180 अधिकारी और 45 गाड़ियां हैंए जबिक सचल दल इकाई में 450 अधिकारी और 150 वाहन उपलब्ध हैं। काम के आधार पर यह बंटवारा भी गलत है।