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यूपी : पावर कॉर्पोरेशन को इसलिए लगी 100 करोड़ से ज्यादा की चपत, गोरखधंधे में कई रडार पर

Sun, 26 Sep 2021 05:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अनिल श्रीवास्तव, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 26 Sep 2021 05:19 AM IST
सार

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अस्थाई कनेक्शन में भारी घपला। दो किलोवाट कनेक्शन से खड़ी हो गईं मल्टीस्टोरी और टाउनशिप।
 

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UP: Power Corporation suffered a loss of more than 100 crores due to corruption
demo pic... - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केस-1

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ग्रेटर नोएडा शाहबेरी में खसरा नंबर 288 के लिए 3 मई, 2018 को गौरव चतुर्वेदी को दो किलोवाट का अस्थाई कनेक्शन (टीसी-55) जारी किया गया था। मौजूदा समय में खसरा नंबर 288, 289 व 302 पर 96 मकानों (डुप्लेक्स) की टाउनशिप खड़ी है।

केस-2
शाहबेरी में ही अनस चौधरी को अस्थाई कनेक्शन संख्या टीसी-114 के जरिए प्लॉट नंबर बी-2 खसरा नंबर 116 के लिए 2 किलो वाट का कनेक्शन 7 सितंबर, 2019 को जारी किया गया। वर्तमान में इस भूमि पर 6 मंजिल की 30 फ्लैट वाली इमारत खड़ी है।
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केस-3
7 जुलाई, 2021 को अमजद खान को 2 किलोवाट का अस्थाई कनेक्शन जारी किया गया था। यहां पर पांच मंजिला इमारत का निर्माण चल रहा है। मौके पर लगे मीटर में अधिकतम भार 6.2 वाट किलो वाट तथा खपत 1135 यूनिट पाई गई।
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केस-4
गौतमबुद्धनगर के चिपयाना खुर्द तिगरी में इरशाद को अस्थाई कनेक्शन के जरिए 2 किलोवाट का कनेक्शन 7 मार्च, 2020 को जारी किया किया गया। इस परिसर में 4 मंजिला 28 फ्लैट वाली इमारत पाई गई। 

ये तो बानगी है। नोएडा व ग्रेटर नोएडा में दो वाट का अस्थाई कनेक्शन लेकर मल्टीस्टोरी व टाउनशिप तैयार कराने के सैकड़ों मामले प्रकाश में आए हैं। जरूरत से कम भार का कनेक्शन देने के इस खेल से पावर कॉर्पोरेशन को 100 करोड़ से ज्यादा की चपत का खुलासा हुआ है। कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा मुख्यालय से भेजी गई टीम की जांच रिपोर्ट में मामला सामने आया है। 

रिपोर्ट के आधार पर अभी सिर्फ 23 इंजीनियर ही प्रबंधन के रडार पर हैं, लेकिन जांच का दायरा बढ़ने पर तमाम बड़ें अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं। बिजली कर्मियों व बिल्डर्स की साठगांठ से हो रहे इस खेल में बहुत सारे अस्थाई कनेक्शनों का विवरण तक गायब कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार सिर्फ एक विद्युत वितरण खंड ग्रेटर नोएडा की जांच में ही करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सभी वितरण खंडों की जांच रिपोर्ट के सामने आने पर एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।

मीटर रीडिंग में भी अनियमितता 
रिपोर्ट के अनुसार इन कनेक्शनों की न तो प्रतिमाह रीडिंग कराकर बिल बनाए गए और समयावधि विस्तार के समय बिना मीटर रीडिंग देखे और अधिकतम भार का संज्ञान लिए न्यूनतम राशि जमा कराकर या मीटर जला दिखाकर समयावधि विस्तार कर दिया गया।  

अस्थायी कनेक्शन संबंधी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं हैं। शुरुआती जांच में दोषी पाए गए अभियंताओं को स्थानांतरित करते हुए चार्जशीट दी गई है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- एम. देवराज, अध्यक्ष, उप्र. पावर कॉर्पोरेशन

न रिकॉर्ड, न रजिस्टर 

जांच रिपोर्ट के अनुसार विद्युत वितरण खंड ग्रेटर नोएडा में स्थाई कनेक्शन विच्छेदन से संबंधित कोई रिकॉर्ड या रजिस्टर उपलब्ध नहीं है। जबकि संबंधित सहायक अभियंता (मीटर) द्वारा 2018 से अब तक 10 किलोवाट व उससे अधिक भार के 17 अस्थाई कनेक्शनों के संबंध में जानकारी दी गई है।  यानी 10 किलोवाट से कम के अस्थाई कनेक्शनों के स्थाई विच्छेदन व उन पर बकाया के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। 

जांच टीम ने माना है की इससे पावर कॉर्पोरेशन को राजस्व की भारी क्षति हुई है। जांच रिपोर्ट में लेखा कर्मियों के दर्ज किए गए बयान व सहायक अभियंता (मीटर) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्थाई विच्छेदन से संबंधित रिकॉर्ड की उपलब्धता के अभाव में कॉर्पोरेशन को हुई क्षति का आकलन कर पाना संभव नहीं हो पाया। वित्तीय क्षति का आकलन स्थानीय परीक्षण इकाई द्वारा वितरण इकाई को जारी किए गए सिंगल व थ्री फेज के मीटरों के पूर्ण ऑडिट प्रमाण पत्र लेने के बाद ही संभव को पाएगा।

रजिस्टर की एंट्री खोल रही पोल
जांच में खुलासा हुआ है कि विद्युत वितरण खंड ग्रेटर नोएडा में सभी अस्थाई कनेक्शन ऑफलाइन ही जारी किए गए हैं। इनसे संबंधित दो रजिस्टर खंड कार्यालय में उपलब्ध मिले। एक में क्र्तम संख्या 160 दिनांक 29-1-2021 तक दर्ज है। जबकि दूसरे में क्र्तम संख्या 161 से 166 तक कोई दिनांक अंकित नहीं है। जांच में कुल 166 अस्थाई कनेक्शन जारी होना पाया गया। इसमें क्र्तम संख्या 116 दिनांक 16-9-2019 तक अनुबंध लिपिक तथा अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर मिले। क्र्तम संख्या 116 के बाद सिर्फ अनुबंध लिपिक के हस्ताक्षर हैं। क्र्तम संख्या 160 के बाद दर्ज प्रविष्टियों में किसी के हस्ताक्षर नहीं मिले। रिपोर्ट में बतौर साक्ष्य रजिस्टर नंबर 1 की छाया प्रति भी संलग्न की गई है।

नियमित बिलिंग भी नहीं 
जांच रिपोर्ट में कहा गया है की अस्थाई कनेक्शनों की बिलिंग नियमित नहीं है तथा बिल नियमानुसार नहीं बनाए गए हैं। इससे भी राजस्व की क्षति हुई है। रजिस्टर पर मीटर इंडेंट नंबर व दिनांक अंकित नहीं है तथा मीटर संख्या का भी कोई उल्लेख नहीं किया गया है। अस्थाई कनेक्शन से संबंधित दूसरे रजिस्टर में दिनांक 29-6-2021 व 30-6-2021 में ही 2 किलोवाट के 39 कनेक्शन जारी करना दिखाया गया है। पूरे रजिस्टर में 2 किलोवाट के कुल 80 कनेक्शन 29-6-2021 से 7-7-2021 की अवधि में जारी किया जाना दिखाया गया है। दिलचस्प है कि इसमें से किसी भी कनेक्शन के लिए मीटर इंडेंट नहीं किया गया। साथ ही कनेक्शन संबंधी भार स्वीकृति अभिलेख पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता के दस्तखत बिना किसी डिस्पैच संख्या व दिनांक के पाए गए। सभी कनेक्शनों पर ऑनलाइन रसीद के माध्यम से 19,247 रुपये जमा किए गए हैं। जांच टीम ने मौके पर कुछ कनेक्शनों का स्थलीय निरीक्षण किया तो पता चला की कई कनेक्शन बिना मीटर के कृषि उपयोग के लिए 7.50 हॉर्स पावर लोड पर चल रहे थे, जिनके लिए थ्री फेज मीटर लगाए जाते हैं।

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