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यूपी: ज्ञान भारतम मिशन के तहत यूपी की 15 हजार से ज्यादा पांडुलिपियों की स्कैनिंग, खुलेंगे शोध के नए रास्ते

Tue, 13 Oct 2026 04:28 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 13 Oct 2026 04:28 PM IST
सार

ज्ञान भारतम मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के छह प्रमुख संस्थानों में 15,890 दुर्लभ पांडुलिपियों के 7,56,392 पन्नों की स्कैनिंग की गई है। इनमें से 14,594 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार हुआ और 14,208 रिकॉर्ड अपलोड किए गए। इस पहल से ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित होगी और शोधकर्ताओं व विद्यार्थियों को अध्ययन में सुविधा मिलेगी।

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UP: Over 15,000 manuscripts from UP being scanned under the 'Gyan Bharatam Mission'; new avenues for research
खुलेंगे शोध के नए रास्ते - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश की सदियों पुरानी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। ज्ञान भारतम मिशन के तहत प्रदेश के 6 प्रमुख संस्थानों में हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों को स्कैन कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।

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सितंबर 2026 तक गीता प्रेस गोरखपुर, नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और वृंदावन शोध संस्थान, मथुरा में कुल 15,890 पांडुलिपियों से जुड़े 7,56,392 पन्नों को स्कैन किया जा चुका है। इनमें से 14,594 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार हुआ है, जबकि 14,208 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं।
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संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत इन संस्थानों में अलग-अलग स्तर पर पांडुलिपियों की पहचान, स्कैनिंग, मेटाडाटा तैयार करने और डिजिटल अपलोड का काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पुराने दस्तावेजों को स्कैन करना नहीं, बल्कि उनमें मौजूद ज्ञान और ऐतिहासिक सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखना और भविष्य में शोध तथा अध्ययन के लिए डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना है।
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मथुरा के वृंदावन शोध संस्थान में 3,161 पांडुलिपियों से जुड़े 1,93,256 पन्नों को स्कैन किया जा चुका है। यहां 2,998 का मेटाडाटा तैयार हुआ और 2,846 रिकॉर्ड अपलोड किए गए हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन में 2,400 पांडुलिपियों के 1,26,878 पन्नों की स्कैनिंग हुई है। यहां 2,090 मेटाडाटा तैयार किए गए और 2,023 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 1,192 पांडुलिपियों के 90,300 पन्नों को डिजिटल रूप में स्कैन किया गया है। यहां 759 मेटाडाटा तैयार करने के साथ 759 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। वहीं राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय में 1,623 पांडुलिपियों से जुड़े 1,52,519 पन्नों की स्कैनिंग हुई है। यहां 1,472 मेटाडाटा तैयार किए गए और 1,410 रिकॉर्ड अपलोड हुए हैं।

नागरी प्रचारिणी सभा में 6,720 पांडुलिपियों से जुड़े 61,175 पन्नों को स्कैन किया गया है। यहां 6,680 मेटाडाटा तैयार किए जा चुके हैं और 6,600 रिकॉर्ड डिजिटल रूप से अपलोड हुए हैं। वहीं गीता प्रेस गोरखपुर में 794 पांडुलिपियों के 1,32,264 पन्नों की स्कैनिंग की गई है। यहां 595 मेटाडाटा तैयार हुए और 570 रिकॉर्ड अपलोड किए गए हैं।

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'पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण से शोध होगा आसान'

मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण होने से पुरानी और दुर्लभ सामग्री को समय के साथ खराब होने से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही इनका व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और साहित्य एवं इतिहास से जुड़े लोगों के लिए इन सामग्रियों तक पहुंच आसान हो सकेगी। मेटाडाटा तैयार करने से प्रत्येक पांडुलिपि की पहचान और उससे जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा रहा है।

 

पांडुलिपियों के जरिये ज्ञान की विरासत सहेजने की पहल

ज्ञान भारतम मिशन के तहत चल रहा यह अभियान उत्तर प्रदेश की साहित्यिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जुड़ी पुरानी सामग्री को नई तकनीक के जरिए सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया गीता प्रेस से लेकर नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, संस्कृत विश्वविद्यालय और वृंदावन शोध संस्थान जैसे संस्थानों में मौजूद सामग्री का डिजिटल रूपांतरण आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ शोध और अध्ययन के नए रास्ते भी खोलेगा।

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