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UP: दो फीसद प्रीमियम पर बीमा का मौका, प्रदेश में सामान्य से 56% कम हुई बारिश; पढ़ें कृषि विभाग की एडवाइजरी

Mon, 29 Jun 2026 07:31 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 29 Jun 2026 07:31 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में सामान्य से 56 प्रतिशत कम बारिश होने पर कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। 31 जुलाई तक मात्र दो प्रतिशत प्रीमियम पर खरीफ फसलों का बीमा कराने की अपील की गई है। साथ ही कम पानी वाली फसलों और जल संरक्षण आधारित खेती अपनाने की सलाह दी गई है।

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UP: Opportunity for insurance at a 2% premium; state records 56% less rainfall than normal—read the Agricultur
खेत की तस्वीर। - फोटो : संवाद

विस्तार

जलवायु की असामान्य परिस्थितियों के कारण मानसून की अनिश्चितता बनी हुई है। अभी तक सामान्य से 56 प्रतिशत बरसात कम हुई है, जिससे लगभग सभी जिले प्रभावित हुए हैं।ऐसे में किसानों से फसलों का बीमा कराने की अपील की गई है। 31 जुलाई से पूर्व निर्धारित वित्तमान के मात्र दो प्रतिशत प्रीमियम पर अपनी अधिसूचित खरीफ फसलों का बीमा कराया जा सकता है। कृषि विभाग ने किसानों से अल-निनो के देशव्यापी प्रभाव और विषम मानसून की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर इन सुझावों का पालन करने और अपनी फसलों का समय से बीमा कराने की अपील की है। 

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फसलों को प्राथमिकता देने के लिए कहा

धान की खेती केवल उन्हीं स्थानों पर करने का सुझाव दिया गया है जहां पानी के सुनिश्चित साधन उपलब्ध हैं। वर्षा आधारित खेती के लिए धान के स्थान पर श्रीअन्न, मक्का, उर्द, मूंग, तिल और अरहर जैसी फसलों को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। धान की रोपाई वाले खेतों में एक फीट ऊंची मेड़ बनाने की सलाह दी गई है ताकि वर्षा का जल संचित हो सके और नर्सरी में पानी का ठहराव न होने देने के निर्देश दिए गए हैं। 

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कम पानी में बेहतर उत्पादन के लिए धान की सीधी बुआई (डीएसआर) पद्धति अपनाने तथा कम दिनों में तैयार होने वाली प्रजातियों जैसे सीआर धान-100, 101, 103, आईआर-64 और एनडीआर-97 का चयन करने को कहा गया है। रोपाई के लिए 20 से 25 दिन की पौध को दो-तीन पौधा प्रति हिल और तीन-चार सेंटीमीटर की गहराई पर लगाने का सुझाव दिया गया है।

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कम पानी वाली फसलों पर जोर

आकस्मिक फसल योजना के अंतर्गत कम जल मांग वाली और सूखा सहनशील फसलों पर विशेष बल दिया गया है। ज्वार, बाजरा, सावां, कोदो और रागी जैसी श्री अन्न फसलें केवल वर्षा के जल से अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं। इनमें कीटों तथा रोगों का प्रकोप भी कम होता है। दलहनी फसलों में अरहर की बुआई मेड़ या रिज बनाकर करने की सलाह दी गई है ताकि वर्षा जल का सदुपयोग हो सके। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई विधियों को अपनाने और मिश्रित खेती के तहत मक्का के साथ अरहर या मूंग उगाने पर जोर दिया गया है।

 

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