यूपी : एप पर एक क्लिक से मिलेगी शहर की सड़कों की डिटेल, जीआईएस मैप से की जाएगी लिंक; जानें कैसे
लखनऊ में शहर की सभी सड़कों का रिकॉर्ड अब रोड डायरेक्ट्री और जीआईएस मैप से लिंक किया जा रहा है, जिससे एक क्लिक पर सड़क की लंबाई, चौड़ाई, लागत और विभाग जैसी पूरी जानकारी मिल जाएगी।
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कौन सी सड़क कब बनी और कितना पैसा खर्च हुआ। सड़क कितनी लंबी- चौड़ी है। इसका हिसाब-किताब रखने को रोड डायरेक्ट्री बनाई जा रही और इसे जीआईएस मैप से लिंक जाएगा। जिससे एक क्लिक पर शहर की सभी सड़कों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाएगी। इससे सड़कों की मरम्मत की योजना तैयार करने में आसानी होगी और विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी भी नहीं डाल सकेंगे। यह काम शासन के आदेश पर हो रहा है।
शहर में सड़कों बनाने और उनकी मरम्मत का काम कई विभाग करते हैं। इनमें नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई, लखनऊ विकास प्राधिकरण और आवास विकास प्रमुख है। कई बार सड़कों की मरम्मत को लेकर यही तय करनें में विवाद होता है कि जिस सड़क की मरम्मत होनी है वह किस विभाग की है।
इसको लेकर अक्सर हैंडओवर और टेकओवर का विवाद भी विभागों के बीच आता है। दो साल पहले शहर की करीब 30 सड़कों की मरम्मत इसी कारण विवाद में फंसी रही थी। एक मंत्री के कहने पर नगर निगम ने सड़कों को लोक निर्माण विभाग को मरम्मत के लिए कागज पर हैंडओवर कर दिया था और लोक निर्माण विभाग ने यह कहकर मरम्मत नहीं की थी कि उसके पास बजट नहीं है। अब जो रोड डायरेक्ट्री बनाई जा रही है उसमें यह चिन्हित किया जा रहा है कौन सी सड़क किस विभाग की है, वह कब बनाई गई, लंबाई चौड़ाई क्या है और मौजूदा हाल में ठीक है या टूटी है।
इस तरह शासन बनवा रहा रोड डायरेक्ट्री
नगर निगम के अधिशासी अभियंता अतुल मिश्रा ने बताया कि यह काम शासन के निर्देश पर हो रहा है। यूरिडा इसकी नोडल एजेंसी है। रोड डायरेक्ट्री बनाने को लेकर सर्वे हो चुका है। अब उस सर्वे का सत्यापन विभागों से कराया जा रहा है। जिसमें यदि सर्वे में सड़क के नाम और स्वामित्व को लेकर कोई बदलाव करना हो तो वह किया जा सके।
डायरेक्ट्री को जीआईएस मैप से लिंक जाएगा। सड़कों के बारे में आसानी से जानकारी लोगों को एक क्लिक पर मिल जाए इसके लिए रिमोट सेंसिंग विभाग की ओर से एक मोबाइल एप भी तैयार किया गया है। जिसका प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है कि उसमें किस तरह से सड़कों की जानकारी फीड की जाएगी।
कार्ययोजना बनाने में बहुत आसानी होगी
अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह ने बताया कि रोड डायरेक्ट्री में सहयोग और मोबाइल एप की ट्रेनिंग नगर निगम के इंजीनियर कर रहे हैं। इसके लिए जोन बार ट्रेनिंग हो रही है। रोड डायरेक्ट्री बनने से सड़कों को बनाने की कार्ययोजना बनाने में बहुत आसानी होगी।