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यूपी: 11 माह की बच्ची को जन्मजात दिल की बीमारी से दिलाई निजात, रक्तवाहिका को खास डिवाइस लगाकर किया बंद

Fri, 25 Sep 2026 08:25 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला, लखनऊ
अमर उजाला, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Fri, 25 Sep 2026 08:25 PM IST
सार

लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने 11 माह की बच्ची की जन्मजात दिल की बीमारी का बिना ओपन हार्ट सर्जरी इलाज किया। कैथेटर के जरिए दिल के पास खुली रक्तवाहिका को विशेष उपकरण लगाकर बंद किया गया। उपचार के बाद बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह विभाग में पहला ऐसा मामला बताया गया।

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UP:  old girl cured of congenital heart defect; blood vessel closed using a special device.
सर्जरी - फोटो : Freepik.com

विस्तार

लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने जन्मजात दिल की बीमारी से पीड़ित 11 माह की बच्ची का बिना ओपन हार्ट सर्जरी इलाज किया। कॉर्डियोलॉजी विभाग में कैथेटर के जरिये बच्ची के दिल के पास जन्म से खुली रक्तवाहिका को खास डिवाइस लगाकर बंद किया गया। बच्ची को अब डिस्चार्ज कर दिया गया है।

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गोरखपुर निवासी 11 माह की राधिका (बदला हुआ नाम) को जन्म से सांस लेने में तकलीफ थी। उसका वजन भी सामान्य बच्चों की तरह नहीं बढ़ रहा था। बार-बार छाती के संक्रमण से भी वह परेशान थी। परिजनों ने बच्ची को स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। जांच में पता चला कि उसके दिल के पास की रक्तवाहिका खुली हुई है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई और उसे लोहिया संस्थान रेफर कर दिया।

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करीब तीन माह पहले परिजन बच्ची को लेकर लोहिया संस्थान के कॉर्डियोलॉजी विभाग पहुंचे। विभागाध्यक्ष डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि बच्ची के दिल के पास एक ऐसी रक्तवाहिका थी, जो सामान्य तौर पर जन्म के बाद खुद बंद हो जाती है, लेकिन उसमें यह खुली रह गई थी। चिकित्सा विज्ञान में इसे पीडीए (पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस) कहते हैं। रक्तवाहिका के खुले रहने से बच्ची के दिल और फेफड़ों पर ज्यादा दबाव पड़ रहा था।

डॉ. भुवन ने बताया कि कैथेटर के जरिये दिल के पास खुली रक्तवाहिका को खास डिवाइस की मदद से बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इतनी कम उम्र की बच्ची का इस तरह का इलाज विभाग में पहली बार किया गया है। बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी की समय पर पहचान जरूरी है।

कई बीमारियों का इलाज अब बिना ओपन हार्ट सर्जरी कैथेटर के जरिये किया जा सकता है। इलाज करने वाली टीम में डॉ. आशीष झा, डॉ. मिथिलेश यादव और डॉ. नीरज अवस्थी शामिल रहे। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने डॉक्टरों की टीम को बधाई दी।

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