यूपी : नए उद्योगों के लिए जमीन तैयार करेंगी पुरानी-बीमार इकाइयां, विकास प्राधिकरण पहली बार ला रहा है ऐसी नीति
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) पहली बार अदालतों में फंसी बीमार और बंद इकाइयों को लेकर नीति ला रहा है।
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वैश्विक निवेशक सम्मेलन में एमओयू करने वाले उद्यमियों को जमीन का संकट दूर करने के लिए चौतरफा कवायद की जा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) पहली बार अदालतों में फंसी बीमार और बंद इकाइयों को लेकर नीति ला रहा है। ऐसी इकाइयों को लिक्विडेटर के जरिए सब डिवीजन यानी छोटे छोटे भूखंडों में बेचा जा सकेगा। अभी ऐसी जमीनों को एक साथ बेचने की बंदिश है। इस फैसले से बंद इकाइयों में फंसी लगभग 1500 एकड़ जमीन में हजारों नए उद्यम बसने का रास्ता खुलेगा।
प्रदेश में करीब 1500 एकड़ जमीन दिवालिया, बीमार और बंद हो चुकी औद्योगिक इकाइयों में फंसी है। इनमें से अधिकांश इकाइयां पूरी तरह से विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में हैं, जहां कीमतें आसमान में हैं। इन बीमार इकाइयों की जमीनें डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) और नेेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में बैंकों और कोर्ट में लिक्विडेशन के माध्यम से लॉक हो गई हैं।
बेकार पड़ी ऐसी बेशकीमती जमीनों को उपयोगी बनाने के लिए प्राधिकरण ने उप विभाजन नीति में संशोधन किए हैं। इससे अनुपयोगी भूमि को इस नीति के अन्तर्गत पुन: उपयोगी बनाए जाने के उद्देश्य से सहूलियत प्रदान की गयी है। यानी अब लिक्विडेटर की मदद से बड़ी बीमार इकाइयों की जमीनों का (सब डिवीजन) का विभाजन किया जा सकेगा। किसी दिवालिया या बीमार इकाई की 100 एकड़ जमीन है तो अभी उसकी नीलामी एकमुश्त ही की जा सकती है। नई नीति के बाद उसे टुकड़ों में बेचा जा सकेगा।
उप्र औद्योगिक विकास प्राधिकरण इसे लेकर पहली बार नीति ला रहा है जो देश में अपनी तरह का प्रयोग होगा। इस नीति को लेकर प्राधिकरण पब्लिक के बीच जाएगा। इस लागू करने से पहले फीडबैक लिया जाएगा। फीडबैक के आधार पर मिली कमियों को दूर किया जाएगा।
यूपीसीडा बोर्ड के फैसले
- झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) की स्थापना की जाएगी। विश्वस्तरीय इण्डस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने के लिए दक्ष और कुशल प्लानर को नियुक्त किया जाएगा।
- रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर परियोजना से यूपीसीडा के चिन्हित भूखण्डों को आरआरटीएस से जोड़ा जाएगा। इससे आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों की अवस्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। नोएडा पावर कम्पनी लिमिटेड (एनपीसीएल) को औद्योगिक क्षेत्र सूरजपुर साइट-5 में 33/11 केवी विद्युत सबस्टेशन की स्थापना केलिए 1000 वर्गमीटर का भूखण्ड आवंटित किया गया।
- 155 औद्योगिक क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने के लिए सड़क, नाली, पुलिया, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट, उद्यान आदि के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कन्सल्टेंट की नियुक्ति की जाएगी, जो औद्योगिक क्षेत्रों में अवशेष अवस्थापना सुविधाओं की विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) तैयार करा कर ई- निविदा की कार्यवाही कराएगी।
- यूपीसीडा ने यूपी-एसआरएलएम के साथ समझौते ज्ञापन (एमओयू) के तहत समस्त औद्योगिक क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कैंटीन संचालित करने का निर्णय लिया है।
विभिन्न न्यायालयों, डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी), नेशनल कंपली लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में हजारों एकड़ जमीन ऐसी है जो ब्लाक हो गई है। अब ऐसी जमीनों को बेचने के लिए लिक्विडेटर के जरिए उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में बेचने की नीति लाई जा रही है। इससे औद्योगिक इलाकों में जमीन का संकट कम होगा। इस नीति को लागू करने से पहले पहली बार लोगों से राय ली जाएगी। इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं का फीडबैक लिया जाएगा।
-मयूर महेश्वरी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपीसीडा