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आरटीई: डीएम ने मांगी मनमानी करने वाले निजी स्कूलों की रिपोर्ट, रद्द की जाएगी एनओसी
Fri, 11 Apr 2025 04:35 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 11 Apr 2025 04:35 PM IST
सार
आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश से वंचित रखने की शिकायत के बाद जिलाधिकारी विशाख जी मामले का संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : Freepik
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विस्तार
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत चयनित गरीब बच्चों को प्रवेश न देने वाले हाई प्रोफाइल निजी स्कूलों पर शिकंजा कसेगा। अमर उजाला की ओर से अभिभावकों का दर्द प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जिलाधिकारी विशाख जी ने मामले को संज्ञान लिया है।
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उन्होंने अभी तक जितने बच्चों को प्रवेश मिल चुका है, बीएसए से उनकी जानकारी देने के लिए कहा है। साथ ही बच्चों को दाखिला देने से इन्कार करने वाले स्कूलों की पूरी रिपोर्ट भी मांगी है। डीएम ने मामले को लेकर शुक्रवार को बैठक बुलाई। इसमें बीएसए के अलावा सभी एडिशनल सिटी मजिस्ट्रेट (एसीएम) व एडीएम सप्लाई मौजूद रहे।
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बीते दो दिनों में शिक्षा विभाग के पास करीब 300 ऐसे अभिभावकों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनके बच्चों को चयन के बावजूद निजी स्कूल प्रवेश नहीं दे रहे हैं। अमर उजाला की ओर से लगातार मुद्दा उठाए जाने के बाद करीब 700 और बच्चों को दाखिला मिला है। हालांकि, यह संख्या अभी बढ़ेगी, क्योंकि बहुत से स्कूलों ने प्रवेश लेने वाले बच्चे का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है।
एसीएम, बीईओ उतरेंगे मैदान में
आरटीई के तहत सभी चयनित बच्चों को अप्रैल में प्रवेश मिल जाए, इसकी जिम्मेदारी एसीएम और बीईओ को सौंपी जाएगी। इन्हें ब्लॉक स्तर पर नामित कर स्कूलों में भेजा जाएगा। इसका नोडल एडीएम सप्लाई को बनाया जाएगा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार जो स्कूल चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं देंगे, उनकी एनओई निरस्त कराई जाएगी।
डीआईओएस ने भी मांगा जवाब
जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने भी सभी सीबीएसई और आईसीएससीई स्कूल प्रबंधकों से आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चे का ब्योरा मांगा है। राकेश कुमार ने कहा कि एनओसी की शर्तों में स्पष्ट है कि सरकार के आदेश व निर्देश मानने पड़ेंगे।
जिलाधिकारी विशाख जी ने कहा कि निजी स्कूल आरटीई के पात्र बच्चों को पढ़ाने से इन्कार नहीं कर सकते हैं। ऐसा करने वालों की पूरी रिपोर्ट बीएसए से मांग ली गई है। जो विद्यालय अधिनियम का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ एफआईआर का विकल्प है और एनओसी भी रद्द कराई जाएगी।