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UP Nikay Chunav : प्रदर्शन दोहराया तो बड़े दलों के लिए चुनौती बनेंगे छोटे दल व निर्दलीय, कुछ ऐसी है रणनीति
Fri, 14 Apr 2023 05:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 14 Apr 2023 05:57 AM IST
सार
माना जा रहा है कि छोटे दल और निर्दलीयों ने पिछले निकाय चुनाव के प्रदर्शन को दोहराया तो निकायों की बोर्ड और कार्यकारिणी की बैठकों में बड़े दलों के लिए चुनौती बनेंगे।
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निकाय चुनाव...
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में बड़े दल जहां महापौर और अध्यक्ष की सीटों पर कब्जा करने पर फोकस किए हुए हैं, वहीं छोटे दल अधिक से अधिक पार्षदों की सीट जीतने के लिए घेराबंदी में जुटे हैं। माना जा रहा है कि छोटे दल और निर्दलीयों ने पिछले निकाय चुनाव के प्रदर्शन को दोहराया तो निकायों की बोर्ड और कार्यकारिणी की बैठकों में बड़े दलों के लिए चुनौती बनेंगे। छोटे दलों की रणनीति यह है कि यदि पार्षदों की संख्या अधिक होगी तो निकायों के बोर्ड बैठकों में बड़े दलों को घेरने में आसानी होगी। इसी फार्मूले पर छोटे दल अपनी चुनावी रणनीति भी तैयार कर रहे हैं।
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इस बार के चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी सपा के बीच भले ही मुख्य मुकाबला होने के आसार दिख रहे हों, पर छोटे दल और निर्दलीय 2017 के चुनाव से भी बेहतर परिणाम लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके लिए ये पुख्ता चुनावी रणनीति के साथ ही प्रत्याशियों के चयन में काफी सावधानी बरत रहे हैं।
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खास तौर पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम), पीस पार्टी और आम आदमी पार्टी (आप) ने नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष के अलावा पार्षदों की सर्वाधिक सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर तैयारी में जुटे हैं।
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2017 के निकाय चुनाव के परिणामों पर नजर डाला जाए तो पाएंगे कि नगर निगमों में महापौर की 16 सीटों में से 14 भाजपा और 2 बसपा ने जीती थी, लेकिन नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष की कुल 636 सीटों में से 225 सीटों पर छोटे दलों और निर्दलीयों ने कब्जा जमाया था।
इसी प्रकारी तीनों श्रेणी के निकायों में पार्षद की कुल 11995 सीटों में से अधिकतर सीटों पर भी छोटे दल व निर्दलीयों ने चुनाव जीतकर बड़े दलों को चुनौती दी थी। इन दलों ने पार्षद की 7304 सीटों पर कब्जा किया था।