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UP News : सरकार का मिले साथ तो बढ़े घरेलू दवा कारोबार, एक शर्त ने किया महरूम
Mon, 25 Jul 2022 04:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 25 Jul 2022 04:09 AM IST
सार
सरकारी खरीद में शामिल नहीं हो पाते हैं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के दवा उत्पादक। 20 करोड़ वार्षिक टर्न ओवर की बाध्यता से सरकारी खरीद में नहीं हो पाते हैं शामिल।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
प्रदेश की दवा कंपनियां सरकारी खरीद प्रक्रिया से बाहर हैं। यहां के अस्पतालों में पहुंचने वाली ज्यादातर दवाएं दूसरे राज्य की कंपनियों की हैं। इसकी वजह 20 करोड़ के वार्षिक टर्न ओवर की शर्त है। इस शर्त ने प्रदेश के लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्यमियों को खुदरा बाजार में दवा बेचने के लिए विवश कर दिया है। फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए जिससे इस श्रेणी की कंपनियों की भागीदारी घरेलू दवा कारोबार में बढ़ सके।
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प्रदेश में 614 दवा निर्माता कंपनियां हैं। इसमें करीब 300 लघु एवं मध्यम श्रेणी की हैं। यहां करीब एक हजार करोड़ से ज्यादा का दवा कारोबार है। कानपुर, लखनऊ, मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद, मुरादाबाद सहित अन्य जिलों में स्थित कंपनियां करीब ढाई हजार से अधिक दवाएं तैयार करती हैं। पहले इन कंपनियों में तैयार होने वाली दवाएं अस्पतालों की नियमित सरकारी खरीद में शामिल थीं, लेकिन उप्र. मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) बनने के बाद इनके दुर्दिन शुरू हो गए और ये कंपनियां सरकारी खरीद से बाहर हो गई हैं।
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ऐसे में तमाम कारोबारियों ने दवा उत्पाद का काम बंद करना शुरू कर दिया है। दवा कारोबारियों का कहना है कि सरकारी खरीद के टेंडर में हिस्सा लेने के लिए यूपीएमएससीएल ने पांच से 20 करोड़ वार्षिक टर्न ओवर की शर्त लगा दी है। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के दवा उत्पादक टेंडर में ही नहीं शामिल हो पाते हैं। ऐसे में बड़े दवा निर्माता अपनी मर्जी के हिसाब से सिंडिकेट बनाकर मूल्य तय करते हैं और उन्हें आपूर्ति का टेंडर मिल भी जाता है।
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घरेलू दवा कारोबार से बढ़ेगा रोजगार
फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन का तर्क है कि टर्न ओवर की बाध्यता खत्म कर घरेलू दवा कारोबार को बढ़ावा देना चाहिए। इससे एमएसएमई श्रेणी के दवा निर्माता उद्यमियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। हिमाचल, राजस्थान, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में सरकारी खरीद में स्थानीय एमएसएमई श्रेणी की कंपनियों को टर्न ओवर की सीमा से बाहर रखा गया है। इसी मॉडल पर प्रदेश में भी एमएसएमई श्रेणी की कंपननियों को छूट सरकार को देनी चाहिए। एसोसिएशन ने पूरे मामले से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मुख्य सचिव डीएस मिश्रा से गुहार लगाई है।
सरकारी खरीद में शामिल होने की ये है वजह
सरकारी खरीद में कंपनियों की रकम डूबने का खतरा नहीं रहता है और मार्केटिंग का खर्चा भी बचता है। मांग के अनुरूप दवा तैयार की जाती है। जरूरत के हिसाब से उतनी दवा तैयार किए जाने से एक्सपायर होने का भी खतरा नहीं रहता है। एक तरह से यह कैश क्रॉप जैसा होता है। यही वजह है कि एमएसएमई श्रेणी के दवा कारोबारी सरकारी खरीद प्रक्रिया में शामिल होने के लिए लालायित रहते हैं।
एमएसएमई श्रेणी के दवा उत्पादक टर्न ओवर की सीमा से मुक्त हों
देश के दूसरे राज्यों की तरह यूपी में भी एमएसएमई श्रेणी के दवा उत्पादकों को टर्न ओवर की सीमा से मुक्त किया जाए। जहां तक गुणवत्ता का सवाल है तो टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए गुणवत्ता प्रमाणपत्र दिया जाता है। जांच के लिए सरकारी तंत्र है। जिस कंपनी का उत्पाद खराब हो, उसे खरीद प्रक्रिया से बाहर किया जाए। हालांकि अब तक प्रदेश में एक भी ऐसा मामला नहीं आया है जिसमें स्थानीय कंपनी की दवा खाने से किसी मरीज को नुकसान हुआ हो।
- अतुल सेठ, महामंत्री फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
हमें बड़ी संख्या में दवाओं की जरूरत होती है। यूपीएमएससीएल भी एमएसएमई को बढ़ावा देना चाहता है। टेंडर में एल 1 आने वालों को आपूर्ति का अधिकार दिया जाता है। मूल्य और गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता है। जब टेंडर में एल 1 श्रेणी में एमएसएमई की कंपनी आती है तो उसे वरीयता दी जाती है।
- वी मुथु कुमार स्वामी, प्रबंध निदेशक यूपीएमएससीएल