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UP News : यूपी में डेंगू, चिकनगुनिया के साथ बेकाबू हुआ स्वाइन फ्लू, गाजियाबाद-नोएडा में सबसे बुरा हाल
Mon, 31 Oct 2022 04:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 31 Oct 2022 04:54 AM IST
सार
UP News : प्रदेश में डेंगू और चिकनगुनिया के साथ स्वाइन फ्लू बेकाबू होने लगा है। स्थिति यह है कि प्रदेश में मरीजों की संख्या 381 हो गई है। इसमें गाजियाबाद पहले, गौतमबुद्ध नगर दूसरे और लखनऊ तीसरे स्थान पर है। इन तीनों जिलों को मिलाकर 294 मरीज हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश में डेंगू और चिकनगुनिया के साथ स्वाइन फ्लू बेकाबू होने लगा है। स्थिति यह है कि प्रदेश में मरीजों की संख्या 381 हो गई है। इसमें गाजियाबाद पहले, गौतमबुद्ध नगर दूसरे और लखनऊ तीसरे स्थान पर है। इन तीनों जिलों को मिलाकर 294 मरीज हैं। शासन की ओर से सभी स्वास्थ्य कर्मियों को जल्द से जल्द टीकाकरण कराने का निर्देश दिया गया है। मरीजों को भर्ती के लिए अलग- अलग वार्ड बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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प्रदेश में बारिश के बाद मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ। स्थिति यह है कि 30 अगस्त से 30 अक्तूबर तक डेंगू के मरीज की संख्या 379 से बढ़कर 5943, मलेरिया 1140 से बढ़कर 3477 और चिकनगुनिया 11 से बढ़कर 38 केस तक पहुंच गया। स्वास्थ्य विभाग इस दावे में मस्त है कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल मच्छरजनित बीमारियों की संख्या कम है। इस बीच स्वाइन फ्लू के मरीजोंं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होने लगी है।
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स्थिति यह है कि 30 अगस्त तक प्रदेश में सिर्फ 64 केस थे और इसके मरीज 19 जिलों में थे। सर्वाधिक 22 मरीज गौतमबुद्ध नगर और 17 मरीज लखनऊ में थे। लेकिन 30 अक्तूबर को यह संख्या बढ़कर 381 पर पहुंच गई है। प्रदेश के 44 जिलों में इसके मरीज मौजूद हैं। अब तक दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि जो मरीज पहले डेंगू की चपेट में आए थे, उन्हें बाद में स्वाइन फ्लू होने पर स्थिति ज्यादा गंभीर हुई है। राजधानी लखनऊ के कॉरपोरेट अस्पताल में कई ऐसे भी मरीज भर्ती हुए हैं, जिनमें डेंगू के साथ स्वाइन फ्लू भी पाया गया है। इन मरीजों को आईसीयू में रखना पड़ा है।
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कहां कितने हैं स्वाइन फ्लू के मरीज
गाजियाबाद110, गौतमबुद्ध नगर107, लख्नऊ 77, कानपुर नगर 14, लखीमपुर खीरी में नौ, हरदोई व सुल्तानपुर में पांच-पांच, रायबरेली, अयोध्या, गोरखपुर, हापुड़, प्रतापगढ़, मुजफ्फरनगर में तीन-तीन, मुरादाबाद, प्रयागराज, बुलंदशहर, फतेहपुर, बरेली, वाराणसी में दो-दो मरीज मिले हैं। इसी तरह बिजनौर, जौनपुर, आगरा, गोंडा, अलीगढ़, फिरोजाबागद, बलिया, उन्नाव, तीसापुर, जालौन, देवरिया, कानपुर देहात, बागपत, बस्ती, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, झांसी, संत कबीर नगर, अमेठी, आजमगढ़, सहारनपुर, मेरठ और पीलीभीत में एक-एक मरीज मिले हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
स्वाइन फ्लू के केस हर तीन से चार साल में बढ़ते हैं। पिछले दो साल की अपेक्षा इस बार केस अधिक हैं। पर्व की छुट्टी के बाद लोगों का आवागमन बढ़ना भी एक वजह है। इसे नियंत्रित करने केलिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों व अधीक्षकोंं को निर्देश दिया गया है कि स्वास्थ्यकर्मियों को जल्द से जल्द स्वाइन फ्लू का टीका लगवाएं। अस्पतालों में अलग से वार्ड बनाने, दवाओँ के इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी निगरानी भी की जा रही है।
-पार्थ सारथी सेन शर्मा, प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
स्वाइन फ्लू के लेकर घबराने की जरूरत नहींं है। लक्षण दिखते ही जांच कराएं। मास्क का प्रयोग कर रेस्पेरेटरी से संबंधित सभी बीमारियों को रोका जा सकता है। कोविड की तहत स्वाइन फ्लू के दौर में भी मास्क अपनाने की जरूरत है। दूसरी वजह यह भी है कि पहले टिपिकल निमोनिया समझ कर इलाज होता था। अब ऐसे लक्षण दिखते ही तत्काल स्वाइन फ्लू की जांच कराई जा रही है। इस वजह से भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इससे पीड़ित मरीज ठीक हो रहे हैं।
-डॉ. विक्रम सिंह, विभागाध्यक्ष मेडिसिन, लोहिया संस्थान