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UP Legislative Council : ...तो सपा के बड़े नेताओं को नहीं पता विधान परिषद के लिए उम्र की सीमा
Thu, 04 Aug 2022 12:27 PM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 04 Aug 2022 12:27 PM IST
सार
UP News : अखिलेश यादव सहित 10 विधायक थे प्रस्ताव, किसी ने नहीं देखा कि हलफनामे में कीर्ति की उम्र कितनी लिखी है। नामांकन दाखिल करते वक्त प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी नरेश उत्तम पटेल भी मौजूद थे। इसके बाद भी किसी ने नामांकन पत्र पर दर्ज उम्र सीमा नहीं देखी।
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कीर्ति कोल...
- फोटो : amar ujala
विस्तार
समाजवादी पार्टी की विधान परिषद सदस्य उम्मीदवार कीर्ति कोल का पर्चा खारिज होने से पार्टी की सियासी गंभीरता पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह पर्चा तब खारिज हुआ है, जब कीर्ति के प्रस्तावक के रूप में पार्टी मुखिया अखिलेश यादव और उनके 10 विधायकों ने हस्ताक्षर किए हैं। नामांकन दाखिल करते वक्त प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी नरेश उत्तम पटेल भी मौजूद थे। इसके बाद भी किसी ने नामांकन पत्र पर दर्ज उम्र सीमा नहीं देखी। विधान परिषद के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 30 साल है, जबकि कीर्ति के पर्चे और हलफनामे में 28 साल लिखा है। यही पर्चा खारिज होने का आधार बना।
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सपा के 110 विधायक हैं, जिसमें शिवपाल सिंह यादव व कुछ अन्य विधायक अलग-थलग हैं। गठबंधन में शामिल रालोद के आठ विधायक हैं, जबकि छह विधायकों वाली सुभासपा नाता तोड़ चुकी है। ऐसे में सपा के लिए जीत दूर की कौड़ी दिख रही थी। इसके बाद भी सपा ने पूर्व सांसद भाईलाल कोल की बेटी कीर्ति कोल को मैदान में उतार दिया।
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प्रदेश में कोल बिरादरी अनुसूचित जाति में आती हैं, लेकिन सपाइयों ने उन्हें जनजाति का बताते हुए राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर नया कार्ड खेलने की कोशिश की। उन्हें उम्मीद थी कि कोल बिरादरी के जरिए राष्ट्रपति चुनाव में दलित, आदिवासी विरोधी होने के लग रहे आरोपों को खारिज किया जा सकेगा। लेकिन, पार्टी नेताओं की छोटी सी गलती ने उनके इस मनसूबे को फेल कर दिया। पर्चा खारिज होने के बाद सपा के मुख्य प्रवक्ता पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि यह गलती किन परिस्थितियों में हुई, इसकी पड़ताल की जाएगी।
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इन्होंने उठाए सवाल
उधर, समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण राज्यमंत्री संजीव गोंड ने सपा मुखिया अखिलेश यादव की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सपा ने अनुसूचित जनजाति को प्रतिनिधित्व देने का जो ढोंग रचा था, उसकी कलई खुल गई है। नाम मात्र के वोट होने के बाद भी अपना प्रत्याशी खड़ा कर अनुसूचित वर्ग के साथ भद्दा मजाक किया है। उधर, सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश कोई भी चुनाव गंभीरता से नहीं लेते हैं। उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता एमएलसी चुनाव में सामने आ गई है।