UP News : व्यापारियों के दाखिल आईटीसी के रिफंड में खेल, होगी स्क्रूटनी, राज्यकर आयुक्त ने दिए निर्देश
राज्यकर विभाग ने जोनवार अब ऐसे मामलों की स्क्रूटनी कराने का फैसला किया है। दो करोड़ से अधिक की स्वीकृत रिफंड के मामलों की स्क्रूटनी जोन के अपर आयुक्त ग्रेड-1 व 2 (विशेष अनुसंधान शाखा) और ज्वाइंट कमिश्नर को करने की जिम्मेदारी दी गई है
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राज्यकर विभाग में तमाम प्रयासों के बाद भी अस्तित्वहीन पंजीकृत व्यक्तियों द्वारा माल और सेवा की वास्तविक आपूर्ति किए बिना ही टैक्स इंवाइस जारी करके बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मंजूर कराने का खेल जारी है। राज्यकर विभाग ने जोनवार अब ऐसे मामलों की स्क्रूटनी कराने का फैसला किया है। दो करोड़ से अधिक की स्वीकृत रिफंड के मामलों की स्क्रूटनी जोन के अपर आयुक्त ग्रेड-1 व 2 (विशेष अनुसंधान शाखा) और ज्वाइंट कमिश्नर को करने की जिम्मेदारी दी गई है जबकि 50 लाख से दो करोड़ तक के रिफंड के दावों की स्क्रूटनी की जिम्मेदारी जोन स्तर पर ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक व विशेष अनुसंधान शाखा) को सौंपी गई है।
राज्यकर आयुक्त मिनिस्ती एस ने इस संबंध में सभी जोन के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 और ग्रेड -2 (विशेष अनुसंधान शाखा के अलावा ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक और विशेष अनुसंधान शाखा) को दिशा-निर्देश भेजा है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में जीएसटी लागू होने के बाद से ही जीएसटी में पंजीकृत व्यक्तियों द्वारा माल या सेवा की आपूर्ति किए बिना ही बोगस आईटीसी क्लेम किया जा रहा है। इस खेल पर रोक लगाने के लिए राज्यकर आयुक्त ने मेंथा आयल व उसके उत्पाद के निर्यातक व्यापारियों के लिए आईटीसी स्वीकृत करने और रिफंड की स्क्रूटनी के संबंध में जारी आदेश को रद्द करते हुए नया आदेश जारी किया है।
इस आदेश के मुताबिक स्क्रूटनी के समय आईटीसी लेने के लिए पात्र व्यापारियों के संबंध में जीएसटी के ‘बीओ वेब पोर्टल’ पर उपलब्ध अन्य प्रतिकूल तथ्यों को ध्यान में रखने को कहा गया है। साथ ही रेंडम आधार पर भी कई मामलों का प्रति परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्रति परीक्षण मुख्यालय से लेकर जोन स्तर से किया जा सकता है। प्रति परीक्षण के दौरान स्क्रूटनी में अधिकारी के उदासीनता बरतने या तथ्यों की अनदेखी करने की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राज्यकर आयुक्त के आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर त्रुटिपूर्ण रिफंड के मामलों में रिफंड स्वीकृत किए जाने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के अंदर अधिनियम के मुताबिक संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। आयुक्त ने स्क्रूटनी की रिपोर्ट पोर्टल के प्रविष्टि मॉड्यूल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा ज्वाइंट कमिश्नर स्तर से की गई स्क्रूटनी की हर 15 दिन पर जोन के एडिशनल कमिश्नर द्वारा समीक्षा किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।