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खून के दलाल: यूपी में ब्लड बैग की हेराफेरी का बड़ा खेल, मिलावट कर एक से बना देते दो-तीन यूनिट रक्त

Fri, 01 Jul 2022 04:48 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ 
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ  Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 01 Jul 2022 04:48 AM IST
सार

प्रदेश में करीब 10 कंपनियां ब्लड बैग की आपूर्ति करतीं हैं। सरकारी ब्लड बैंकों में टेंडर प्रक्रिया के तहत ब्लड बैग खरीदे जाते हैं, जबकि निजी ब्लड बैंक थोक विक्रेताओं से लेते हैं। थोक कारोबारियों को भी इसका लाइसेंस लेना होता है। हर बैग पर नंबर लिखा होता है। यह बैग कंपनी से किस ब्लड बैंक तक पहुंचा है, इसका पूरा विवरण दर्ज किया जाता है। एफएसडीए की जिम्मेदारी होती है कि हर माह इसका ऑडिट करे, पर ऐसा होता नहीं है।

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Up news game of adulteration of blood is being played by rigging of blood bags in Uttar Pradesh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

प्रदेश में चल रहे खून की काली कमाई में ब्लड बैग का अहम रोल होता है। ये बैग सिर्फ लाइसेंसी ब्लड बैंकों को ही मिलता हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) और ब्लड बैंकों की मिलीभगत से ये दलालों तक पहुंच जाते हैं। दलाल एक यूनिट ब्लड में मिलावट कर उसे दो से तीन यूनिट बना देते हैं। 

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प्रदेश में कुल 429 ब्लड बैंक हैं। इनमें 109 सरकारी, 112 चैरिटेबल और 208 निजी क्षेत्र के हैं। प्रदेश में करीब 10 कंपनियां ब्लड बैग की आपूर्ति करतीं हैं। सरकारी ब्लड बैंकों में टेंडर प्रक्रिया के तहत ब्लड बैग खरीदे जाते हैं, जबकि निजी ब्लड बैंक थोक विक्रेताओं से लेते हैं। थोक कारोबारियों को भी इसका लाइसेंस लेना होता है। हर बैग पर नंबर लिखा होता है। यह बैग कंपनी से किस ब्लड बैंक तक पहुंचा है, इसका पूरा विवरण दर्ज किया जाता है। एफएसडीए की जिम्मेदारी होती है कि हर माह इसका ऑडिट करे, पर ऐसा होता नहीं है। इसके अलावा कुछ कंपनियां नकली बैग भी तैयार कर लेती हैं। ये लाइसेंसी विक्रेताओं के जरिए निजी ब्लड बैंकों तक पहुंचते हैं। इनके जरिए भी मिलावट का का कारोबार चलता है। फर्जी कंपनियों के बैग पकड़ने की भी जिम्मेदारी एफएसडीए की है।

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बैग खराब करने का भी खेल
ब्लड बैंक से जुड़े सूत्रों की मानें तो कर्मचारी ब्लड बैग के खराब होने का भी खेल करते हैं। करीब एक फीसदी बैग के खराब होने की संभावना रहती है। ऐसे में थोक मार्केट से आने वाले स्टॉक को ब्लड बैग के कर्मचारी किसी न किसी कारणवश अपने रिकॉर्ड में खराब दिखाते हैं। यह बैग भी मिलावटखोरी में प्रयोग होता है। बैग खराब होने का रिकॉर्ड दुरस्त किया जाता है, लेकिन उसे नष्ट करने की जिम्मेदारी ब्लड बैंक की होती है। ऐसे में ब्लड बैग नष्ट हो रहा है अथवा उसके नाम पर पॉलीथिन नष्ट किया जा रहा है इसका खुलासा नहीं हो पाता है। एफएसडीए ब्लड बैग नष्ट होने के आंकड़ों पर आंख मूंदकर विश्वास कर लेता है।

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काला कारोबार रोकना है तो जांच जरूरी
एफएसडीए के पूर्व सहायक आयुक्त रमाशंकर बताते हैं कि जिस तरह से दवाओं की नियमित जांच होती है, उसी तरह से बैग आपूर्तिकर्ता व ब्लड बैंक की जांच होनी चाहिए। बैग पर बाकायदा बैच नंबर और आपूर्ति संख्या लिखी होती है। जब मिलान नहीं किया जाता तभी दलालों तक बैग पहुंचते हैं। इस काले कारोबार को रोकने के लिए बैग पर विशेष पर फोकस करना होगा।

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बैग दलालों तक कैसे पहुंचे जांच होगी
समय-समय पर जांच की जाती है। एसटीएफ ने नकली दस्तावेजों के सहारे गलत तरीके से प्रदेश में लाए जा रहे ब्लड को पकड़ा है। विभाग उनका सहयोग कर रही है। ब्लड बैगों की जांच की जाती है। अतिरिक्त ब्लड बैग दलालों तक कैसे पहुंचा, इसकी फिर से विस्तृत जांच की जाएगी।
- डीके तिवारी, सहायक आयुक्त, एफएसडीए

फर्जीवाड़े से बचें 

  • सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक से ही रक्त लें। उसके पाउच पर ग्रूप, एक्सपायरी नंबर, पंजीयन नंबर देख लें।  
  • यह भी देखें कि जहां से ब्लड ले रहे हैं वहां की व्यवस्थाएं ठीक हैं या नहीं। बिजली व फ्रीजर की व्यवस्था जरूर देखें।
  • यदि निजी ब्लड बैंक से रक्त ले रहे हैं तो देखें कि उसका पंजीयन है या नहीं।
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