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UP News: ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत, जबरन डिस्चार्ज करने पर महिला की मौत; परिजन बोले- लापरवाही ने ले ली जान

Sat, 12 Apr 2025 03:59 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sat, 12 Apr 2025 03:59 PM IST
सार

राजधानी में निजी अस्पताल में इलाज के दौरान बहू की मौत के बाद घरवालों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। उन्होंने कहा कि हालत बिगड़ने पर बहू को जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टरों ने जितने पैसे मांगे हमने खेत बेचकर पूरे पैसे दिए। लेकिन, लापरवाही ने बहू की जान ले ली। 

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Condition deteriorated after operation woman died after being forcibly discharged family said- trea
प्रतीकात्मक चित्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को एक निजी अस्पताल से डिस्चार्ज करने के कुछ ही देर बाद महिला की मौत हो गई। घरवालों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। उन्होंने कहा कि इलाज के नाम पर उनसे आठ लाख रुपये वसूले गए। इसके बाद भी मरीज को राहत नहीं मिली। अब उसकी जान चली गई। घरवालों ने कहा कि बहू को गंभीर हालत में जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया। घर पहुंचने से पहले ही उसकी सांसें थम गईं।

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मामला विभूतिखंड क्षेत्र के मैकवेल हॉस्पिटल का है। मूल रूप से अमेठी के मोहन सरैया गांव निवासी रीता यादव (27) के पेट में कुछ दिन पहले दर्द उठा। घरवालों ने उन्हें सुल्तानपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पता चला कि उनकी आंत फट गई है। इस पर डॉक्टरों ने रीता को लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। परिजन रीता को लेकर विभूतिखंड के मैकवेल हॉस्पिटल पहुंचे।
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 26 मार्च को भर्ती हुई रीता का 27 मार्च को ऑपरेशन हुआ।शुरुआती दिनों में रीता की स्थिति सामान्य थी, मगर ऑपरेशन के बाद स्थिति सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों ने हर बार परिजनों को तसल्ली दी, सब ठीक हो जाएगा, नींद की दवा दी है, थोड़ा और समय लगेगा, लेकिन रीता की हालत नहीं सुधरी।

जमीन बेचकर जुटाया इलाज का खर्च, फिर भी नहीं बची बहू

रीता के ससुर राम मिलन ने बताया कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर 15 दिनों में करीब आठ लाख रुपये वसूल लिए। मजबूरी में उन्होंने अपनी जमीन तक बेच दी, इस उम्मीद में कि बहू ठीक होकर घर लौटेगी, लेकिन 10 अप्रैल को अस्पताल ने दो लाख रुपये और मांगे। कहा, बिना पैसे दिए मरीज को डिस्चार्ज नहीं करेंगे। परिजनों ने जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम किया, लेकिन रीता की मौत ने सबको तोड़कर रख दिया।

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बिना सहमति के जबरन डिस्चार्ज, और रास्ते में छूटा साथ

राम मिलन ने बताया कि बृहस्पतिवार को मरीज के साथ सिर्फ वही अस्पताल में थे। बेटा और अन्य परिजन रुपयों के इंतजाम के लिए घर गए थे। तभी अस्पताल वालों ने दबाव बनाकर जबरन कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए और गंभीर हालत में रीता को अस्पताल से बाहर कर दिया। वह घर तक नहीं पहुंच सकी, रास्ते में ही मौत हो गई।

थाने में दी तहरीर, मांगा इंसाफ

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह के अनुसार रीता की मौत से दुखी परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के रवैये से नाराजगी जताई है। देर रात उन्होंने विभूतिखंड थाने में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ तहरीर भी दी है। उनकी एक ही मांग है-इंसाफ। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में आरोप सही मिले तो कार्रवाई की संस्तुति होगी।

जांच रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी कार्रवाई

इंस्पेक्टर कुमार सिंह के बताया कि परिजनों ने मैकवेल हॉस्पिटल पर आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ को पत्र भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं मैकवेल हॉस्पिटल के मैनेजर सौरभ सिंह का कहना है कि तीमारदारों  का आरोप गलत है। वह अपनी मर्जी से मरीज को लेकर गए थे। उन्होंने डेढ़ लाख रुपये बिल का भुगतान भी नहीं किया।

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