गरजे डीजीपी जावीद, 'बिगड़े सुधर जाएं वर्ना हम सुधार देंगे'
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पुलिस प्रमुख का पद ग्रहण करते हुए जावीद अहमद ने सख्त लहजे में कि कहा कि विभाग के बिगड़े सुधर जाएं अन्यथा उन्हें सुधारा जाएगा।
खबरनवीसों से बातचीत में उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। महिलाओं व लड़कियों के प्रति अपराध करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा और यह कोशिश होगी कि ऐसे अपराध न हो सकें। उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि को बेहतर बनाया जाएगा।
पुलिस की कार्य प्रणाली में गुणात्मक सुधार लाने की कोशिश होगी उसकी प्रोफेशनल एफिशिएंसी बढ़ाई जाएगी। कई नए आईपीएस अफसरों द्वारा वरिष्ठों की बात को अनदेखा करने के सवाल पर कहा कि इसमें सुधार आ जाएगा। यह लीडरशिप (नेतृत्व) पर निर्भर करता है कि मातहतों से कैसे काम लिया जाए।
जावीद ने कहा कि क्राइम कंट्रोल, सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखना और यातायात समस्या को सुधारना उनकी खास प्राथमिकताओं में हैं।
कानून का राज होगा
इस मौके पर गोकशी की बढ़ती घटनाओं और पुलिस की संलिप्तता के सवाल पर कहा कि गोकशी रोकने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। साफ तौर पर बता दिया गया है कि इसमें लिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सरकार की प्राथमिकताओं की अनदेखी करने वालों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोग या तो काम करें या फिर साइडलाइन हों। बिगड़े हुए सुधर जाएं, नहीं तो उन्हें सुधारा जाएगा। बोले की साफ समझ लिया जाए, कानून का राज होगा और पारदर्शी कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही परफार्मेंस बेस्ड पुलिसिंग दिखाई देगी।
आतंकवादियों और आईएसआई की गतिविधियों पर उठे सवाल पर बोले कि इनकी सक्रियता है, पर इसे और गहराई से देखना होगा। पुलिस ऐसी सभी गतिविधियों पर नजर रखेगी।
मुकदमों को दर्ज करने में कोताही की बात पर कहा कि एफआईआर दर्ज करनी होगी। मुकदमा दर्ज न करने वालों पर कार्रवाई होगी। शिकायत आने पर उसका निस्तारण करना होगा, न कि उसे अनदेखा करने की कोशिश।
राजनीतिक मायने भी हैं जावीद की तैनाती के
खासी कशमकश के बाद हुई सूबे के पुलिस मुखिया की तैनाती को सिर्फ पसंद-नापसंद की कसौटी पर नहीं देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि नए मुखिया के चयन के लिए सरकार ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।
यही वजह थी जो 31 दिसंबर को डीजीपी के लिए तकरीबन फाइनल हुए प्रवीण सिंह के नाम को ऐन मौके पर दरकिनार कर दिया गया।
जावीद अहमद की ताजपोशी करने के साथ ही सपा सरकार ने अल्पसंख्यक कार्ड तो खेला ही है, साथ ही यह भी साबित करने की कोशिश की है कि उसने जो चयन किया है, वह सर्वोच्च न्यायालय की प्रकाश सिंह समिति की सिफारिशों के अनुपालन में भी की गई है।
इसके साथ-साथ सरकार ने कानून-व्यवस्था व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्षी दलों का मुंह बंद करने की कोशिश भी की है।
अल्पसंख्यकों की नाराजगी दूर करने की कोशिश
सरकार ने चुनाव से पहले अल्पसंख्यक डीजीपी की तैनात करने के साथ ही संप्रदाय के लोगों को उसका हितैषी होने का संदेश एक बार फिर दे दिया है। सरकार का यह कदम पिछले दिनों अलग-अलग जगहों पर हुए सांप्रदायिक संघर्षों की वजह से बढ़ी अल्पसंख्यक समुदाय की नाराजगी को दूर करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आरुषि-हेमराज मामले के खुलासे का श्रेय
जावीद अहमद की छवि साफ सुथरी है और सीबीआई में उनकी पांच वर्षों की प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्हें आरुषि-हेमराज हत्याकांड का सही खुलासा करने का श्रेय भी है। समझा जा रहा है कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्षी दलों द्वारा सरकार को घेरे जाने के मौके पर सरकार जावीद की छवि को भुनाएगी।
जगमोहन मामले में उठे सवाल का जवाब
इसके साथ ही सरकार ने निवर्तमान डीजीपी जगमोहन यादव द्वारा उच्च अदालत से उन्हें प्रकाश सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर दो वर्ष का सेवा विस्तार दिए जाने की पहले से उठे सवाल का जवाब भी दे दिया है। अब यह मुद्दा अगर उठता है तो सरकार के पास इसका जवाब है। कारण यह कि जावीद मार्च 2020 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।