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यूपी: नकली दवाओं पर प्रदेश में नई रणनीति, संस्थागत सप्लाई वाली दवाओं पर लिखना होगा 'इंस्टीट्यूशनल सप्लाई'

Thu, 24 Sep 2026 07:25 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 24 Sep 2026 07:25 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में नकली और अधोमानक दवाओं की बिक्री रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। संस्थागत आपूर्ति वाली दवाओं के लेबल और पैकिंग पर ‘इंस्टीट्यूशनल सप्लाई’ लिखना अनिवार्य होगा। बिलिंग और निर्धारित स्थान पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं के लिए लिखित पर्चा जरूरी होगा।

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UP New strategy against spurious medicines in the state; drugs meant for institutional supply must be labeled
दवाओं की बिक्री पर बढ़ेगी निगरानी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रदेश में नकली, काउंटरफिट और अधोमानक औषधियों की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए नई रणनीति अपनाई गई है। अब डॉक्टर अथवा अस्पताल के नाम पर कंपनी से आपूर्ति होने वाली दवाओं पर इंस्टीट्यूशनल सप्लाई लिखना होगा। प्रदेश में नकली और अधोमानक दवाओं की बिक्री जोरों पर हो रही है। तमाम प्रयास के बाद भी इस पर अंकुश नहं लग पा रहा है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नई रणनीति अपनाई है। 

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अब डॉक्टर और अस्पताल के नाम पर होने वाली दवाओं की आपूर्ति के नियमों में भी बदलाव किया गया है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डा. रोशन जैकब ने आदेश दिया है कि कंपनी, सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर और स्टॉकिस्ट को यह सुनिश्चित करना होगा कि दवा की बिलिंग उसी चिकित्सक अथवा संस्थान के नाम से की जाए, जिसे वास्तव में दवा की आपूर्ति की जानी है। विक्रय बिल में “बिल टू” और “शिप्ड टू” के रूप में अलग-अलग परिसरों को अंकित करने की व्यवस्था का दुरुपयोग न हो, यह भी सुनिश्चित करना होगा। 
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यानी बिल जिस चिकित्सक या संस्थान के नाम पर बनाया गया है, आपूर्ति भी उसी निर्धारित स्थान पर की जानी होगी। विशेष छूट पर की जा रही इंस्टीट्यूशनल सप्लाई की दवाओं के डायवर्जन और दुरुपयोग को रोकने के लिए इनके लेबल और पैकिंग पर निर्माणकर्ता फर्म अथवा सीएफए द्वारा स्पष्ट रूप से इंस्टीट्यूशनल सप्लाई अंकित किया जाना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था से यह पहचानना आसान होगा कि संबंधित दवा संस्थागत आपूर्ति के लिए है और उसे सामान्य बाजार में अनधिकृत तरीके से डायवर्ट नहीं किया जा सकता।
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ऐसे होता है खेल

औषधि निर्माता एवं विपणनकर्ता कंपनियां अपने सीएंडएफ एजेंट, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर अथवा स्टॉकिस्ट के माध्यम से चिकित्सकों और अस्पतालों/नर्सिंग होम को विशेष छूट देती हैं। कई मामलों में कंपनियां अथवा सीएंडएफ एजेंट दवाओं की बिलिंग संबंधित चिकित्सक या अस्पताल/नर्सिंग होम के नाम पर करने के बजाय अपने स्टॉकिस्ट के नाम पर करते हैं। 

इसके बाद स्टॉकिस्ट द्वारा बिल में निर्दिष्ट चिकित्सक, अस्पताल अथवा नर्सिंग होम के बजाय किसी अन्य औषधि विक्रेता या फर्म को दवाओं की आपूर्ति कर दी जाती है। ऐसे में डॉक्टर के नाम पर आने वाली दवा का मुनाफा स्टाकिस्ट कमाते हैं। कई बार विशेष छूट अथवा सस्ती दवाओं की आड़ में फर्जी बिल तैयार कर नकली और काउंटरफिट दवाओं की बिक्री की जाती है। पिछले दिनों चले अभियान में इस तरह के केस पकड़े गए हैं।
 

शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं के लिए पर्चा अनिवार्य

औषधि नियमावली के प्रावधानों के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श पर विक्रय की जाने वाली दवाओं- शेड्यूल एच, एच1 और एक्स की आपूर्ति के संबंध में भी निर्देश स्पष्ट किए गए हैं। इन दवाओं की आपूर्ति पंजीकृत चिकित्सक, अस्पताल, डिस्पेंसरी और नर्सिंग होम को उनके लिखित एवं हस्ताक्षरित क्रय आदेश पर ही की जाएगी। संबंधित क्रय आदेश की प्रति को कम से कम दो वर्ष तक सुरक्षित रखना भी अनिवार्य होगा।

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